Thursday, 14 February 2019

निर्मल ग्राम योजना पर निबंध Essay on Nirmal Gram Yojana in Hindi

निर्मल ग्राम योजना पर निबंध Essay on Nirmal Gram Yojana in Hindi

भारत की 70 प्रतिशत से अधिक आबादी गांवों में रहती है। ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए स्‍वच्‍छ, स्‍वास्‍थ्‍यकर एवं साफ सुथरा वातावरण उपलब्‍ध कराना सरकार के ग्रामीण स्‍वच्‍छता कार्यक्रम के समक्ष के लिए प्रमुख चुनौती रही है। सरकारी ग्रामीण स्‍वच्‍छता भारत में 1980 के विश्‍व जल दशक में केन्‍द्र बिन्‍दु बनी जब केन्‍द्रीय ग्रामीण स्‍वच्‍छता कार्यक्रम (सीआरएसपी) 1986 में ग्रामीण क्षेत्रों में स्‍वच्‍छता सुविधाएं उपलब्‍ध कराने के लिए शुरू किया गया था। यह आपूर्ति संचालित, उच्‍च आर्थिक सहायता एवं आधारभूत संरचनाजन्‍य कार्यक्रम के रूप में प्रारंभ हुआ, लेकिन इसने विशेष प्रगति नहीं की। बाद में कुछ राज्‍यों में समुदाय-संचालित, जागरूकता बढ़ाने वाले अभियान की सफलता और सीआरएसपी के मूल्‍यांकन से 1999 में सम्‍पूर्ण स्‍वच्‍छता अभियान (टीएससी) के गठन को बढ़ावा मिला। तब से ग्रामीण विकास मंत्रालय के अंतर्गत पेयजल आपूर्ति एवं स्‍वच्‍छता विभाग द्वारा कार्यक्रम के क्रियान्‍वयन की मजबूती के लिए अनेक नए प्रयास किए गए।
Nirmal Gram Yojana
ग्रामीण स्‍वच्‍छता करवेज 2001 में केवल 22 प्रतिशत था, उसे वर्तमान 2010-11 में 70.37 प्रतिशत से अधिक करने के लिए नई नीतियों का उपयोग सफल रहा है। सन् 2005 से संचालित कार्यक्रम में से एक निर्मल ग्राम पुरस्‍कार या एनजीपी रहा है। यह एक समग्र प्रोत्‍साहन राशि आधारित कार्यक्रम है, जो पूर्ण स्‍वच्‍छता कवरेज प्राप्‍त करने वाले तथा खुले में शौच जाने की प्रथा को पूर्णरूपेण समाप्‍त करने वाली पंचायती राज संस्‍थाओं को इनाम देकर उनके प्रयासों को मान्‍यता देता है। पंचायती राज संस्‍थाओं को स्‍वच्‍छता कार्यक्रम अपनाने के लिए बढ़ावा देने के लिए उन पीआरआई को इनाम दिया जाता है, जिन्‍होंने खुले में शौच जाने से मुक्‍त वातावरण का लक्ष्‍य शत-प्रतिशत अर्जित कर लिया है। निर्मल ग्राम पुरस्‍कार के अंतर्गत प्रोत्‍साहन राशियों ने स्‍वच्‍छता कवरेज में वृद्धि लाने में योगदान दिया है।

सिक्‍किम पूर्ण-स्‍वच्‍छता कवरेज प्राप्‍त करने वाला देश का पहला निर्मल राज्‍य हो गया है। निर्मल ग्राम पुरस्‍कार की अवधारणा का सामाजिक अभियां‍त्रिकी एवं समुदाय गतिशीलता के एक मात्र अस्‍त्र के रूप में अंतर्राष्‍ट्रीय जयघोष हुआ। इसने ग्रामीण स्‍वच्‍छता जैसे कठिन कार्यक्रम को गति देने में सहायता प्रदान की है। 1999 में टीएससी शुरू होने के बाद औसत कवरेज 2001 से 2004 के मध्‍य 3 प्रतिशत वार्षिक रूप से बढ़ा। 2004 में एनजीपी शुरू होने के बाद औसत कवरेज में प्रत्‍येक वर्ष लगभग 7-8 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

एनजीपी प्राप्‍त करने वाली प्रत्‍येक ग्राम पंचायत आस-पास के गांवों में लहर लाने वाला प्रभाव पैदा कर रही है। प्रोत्‍साहन राशि ने पूरे देश में पंचायती राज नेताओं की कल्‍पना शक्‍ति को प्रज्‍वलित कर दिया है तथा उन्‍हें स्‍वच्‍छता का विजेता बना दिया है। यह ग्रामीण स्‍वच्‍छता कवरेज में 2005 से आश्‍चर्यजनक प्रगति के पीछे मुख्‍य प्रवर्तक रही है। एनजीपी के अंतर्गत पिछले 5 वर्षों में निम्‍नलिखित पीआरआई एवं अन्‍य संस्‍थानों ने पुरस्‍कार अर्जित किए हैं:

वर्ष
एनजीपी पाने वाली ग्राम   पंचायतों की संख्‍या
एनजीपी पाने वाली ब्‍लॉक पंचायतों की संख्‍या
एनजीपी पाने वाली जिला पंचायतों की संख्‍या
एनजीपी पाने वाले संस्‍थाओं की संख्‍या
2005
38
2
-
-
2006
760
9
-
4
2007
4945
14
-
9
2008
12144
112
8
10
2009
4566
28
2
-
2010
2808
1
-
-
वर्ष 2010-11 में 21 राज्‍यों की 2808 से अधिक ग्राम पंचायतों को निर्मल ग्राम पुरस्‍कार के लिए चुना गया है, जो इस प्रकार है:

क्र.सं.
राज्‍य का नाम
2010-11 एनजीपी के लिए चुनी गई ग्राम पंचायतें
क्र.सं.
राज्‍य का नाम
2010-11 एनजीपी के लिए चुनी गई ग्राम पंचायतें
1
आंध्र प्रदेश
44
2
अरूणाचल प्रदेश
3
3
असम
2
4
बिहार
13
5
छत्तीसगढ़
172
6
गुजरात
189
7
हरियाणा
259
8
हिमाचल प्रदेश
168
9
कर्नाटक
121
10
केरल
103
11
मध्‍य प्रदेश
344
12
महाराष्‍ट्र
694
13
मेघालय
160
14
मिजोरम
5
15
नागालैंड
23
16
ओडिशा
81
17
पंजाब
51
18
राजस्‍थान
82
19
तमिलनाडु
237
20
उत्तर प्रदेश
44

कुल योग



2808

निर्मल ग्राम की पहल में एक साफ स्‍वास्‍थ्‍यकर एवं स्‍वच्‍छ ग्रामीण भारत की ओर ले जाने की क्षमता है, जहां समुदाय सामन से मार्गदर्शन करता है और समर्थ वातावरण बनाने की दिशा में अपने तरीके कार्य करता है। निर्मल ग्राम पुरस्‍कार चयन किए गए पीआरआई के प्रतिनिधियों का मनोबल बढ़ाता है और समग्र स्‍वच्‍छता अभियान को देश में लागू करने के लिए प्रोत्‍साहन देता है।
Similar Articles

SHARE THIS

Author:

I am writing to express my concern over the Hindi Language. I have iven my views and thoughts about Hindi Language. Hindivyakran.com contains a large number of hindi litracy articles.

0 comments: