कफन कहानी के पात्र परिचय- Kafan Kahani ke Patra Parichay

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कफन कहानी के पात्र परिचय

कफन कहानी के पात्रों का चरित्र चित्रण : 'कफन' कहानी में प्रमुख पात्र हैं घीसू और माधव जबकि बुधिया की कराहने की आवाज ही उनके होने का अहसास करवाती है। घीसू और माधव पिता-पुत्र हैं और बुधिया माधव की पत्नी है । पिता-पुत्र दोनों जघन्य आलसी, अकर्मण्य कामचोर, भूख- परस्त हैं। जब फाके के दिन आते हैं तो ही वे पेड़ की लकड़ियाँ बेचने जाते हैं। उनके दिल में जैसे मनुष्यता मर चुकी है। प्रेम, दया, करुणा, आत्मसम्मान, औरत की मर्यादा आदि समस्त मानवीय गुण जैसे अफीम की पिनक में सोये पड़े हैं। झोपड़ी के अंदर बुधिया दम तोड़ रही है किन्तु इनका दिल नहीं पिघलता, बड़े मजे से बैठकर गरम-गरम आलुओं को निगलते हैं। बुधिया से बढ़कर उनके लिए आलू की कीमत ज्यादा है।

कफन कहानी के पात्र परिचय- Kafan Kahani ke Patra Parichay

माधव ऐसा पात्र है जिसे यही डर है कि अगर वह प्रसव से छटपटाती हुई पत्नी के पास चला गया तो उसका बाप उससे अधिक आलू चट कर जायेगा। दोनों यही सोचते हैं कि बुधिया कितनी जल्दी मरे ताकि वे आराम से सो सके। दूसरी तरफ घीसू के लिए भी जीवन में और कुछ भी महत्त्वपूर्ण नहीं है। उसे साठ वर्ष की लम्बी ज़िन्दगी की सबसे बड़ी और ताजी याद अगर कोई है तो वह बीस वर्ष पहले की ठाकुर की बारात। मनुष्य के जीवन की महत्वपूर्ण घटना ही उसकी सबसे बड़ी याद होती है। अभी तक घीसू के नाक में पूरियों और कचौरियों की भीनी-भीनी सुगन्ध महक रही है। ज़िन्दगी में पहली बार उसको ऐसा भोजन भर - पेट मिला था। माधव बेचारा सुनकर ही आनन्द लेता है। उसे तो यह भी नसीब नहीं हुआ। भर पेट भोजन ही उनकी सबसे अधिक सुखप्रद स्मृति है-यही उनका स्वप्न भी। बुधिया के कफ़न की कमाई ने उनके सभी अरमान पूरे कर दिये- शराब की बोतल और भर - पेट दावत । घीसू और माधव, प्रेमचन्द के अन्य पात्रों की ही भाँति मात्र उनकी कल्पना की उपज नहीं हैं। वर्तमान समय में समाज में हमें ऐसे पात्रों का परिचय होता है। घीसू और माधव न तो हमारे क्रोध के पात्र हैं और न घृणा के इन पर तो हमें दया आती है कि शोषण ने इनको कितना वीभत्स बना दिया है।

बुधिया के कराहने की आवाज़ और प्रसव वेदना से तड़प-तड़प कर मर जाना ही उसके प्रति दया की भावना भर देता है। बुधिया की मृत्यु दैन्य की द्रावक तस्वीर प्रस्तुत करती है। अपनों के होते हुए एक गर्भवती स्त्री का प्रसव वेदना में तड़पकर मरना एक लज्जाजनक हादसा है। अतः चरित्र चित्रण की दृष्टि से 'कफन' कहानी में इन पात्रों के माध्यम से प्रेमचन्द ने कटु यथार्थ से पाठकों को अवगत करवाया है।

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