ऊँची दुकान फीका पकवान मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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ऊँची दुकान फीका पकवान मुहावरे का अर्थ

ऊँची दुकान फीका पकवान मुहावरे का अर्थ होता है– उपरी दिखावा करना; केवल बाहरी दिखावा करना; नाम बड़े दर्शन छोटे; दिखावा मात्र; आडम्बर ही आडम्बर; केवल वाह्य प्रदर्शन; वास्तविकता से दिखावा अधिक; दिखावा अधिक, वास्तविकता कम।

ऊँची दुकान फीका पकवान मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

वाक्य प्रयोग- वर्तमान अंग्रेजी माध्यम के कुछ स्कूल गुणवत्ता युक्त शिक्षा का प्रलोभन देकर बच्चों का प्रवेश तो ले लेते हैं किन्तु उनके पठन-पाठन में किसी भी प्रकार का सुधार देखने को नहीं मिलता है। ऐसे स्कूल ऊँची दुकान फीके पकवान कहावत को चरितार्थ करते हैं।

वाक्य प्रयोग- बीकानेरवाले की मिठाई बासी और बेस्वाद निकली, सच है ऊँची दुकान फीका पकवान।

वाक्य प्रयोग- अपने बच्चों के सर्वांगीण विकास के लिए आज कल उनके परिजन बड़े-बड़े स्कूलों के प्रलोभन में फंस जाते हैं। अच्छी फीस देने के बावजूद भी बच्चों के बौद्धिक स्तर में किसी भी प्रकार की प्रगति देखने को नहीं मिलती है। आज कल के स्कूल ऊँची दुकान फीका पकवान जैसा ही व्यवहार करते हैं।

वाक्य प्रयोग- वर्तमान युग में पाखण्डी संतों ने हमारी संस्कृति को कलंकित करने का काम किया है। धर्म ग्रन्थों का ज्ञान न होने पर भी वे अपने आप को धर्म ग्रन्थों के मर्मज्ञ बताते फिरतें है। इनका यह व्यवहार ऊँची दुकान फीका पकवान की कहावत को चरितार्थ करता है।

वाक्य प्रयोग- छब्बनदास कॉलेज का नाम ही नाम रह गया है। अब पहले जैसी बात नहीं रही, पढ़ाई-लिखाई का स्तर तो गिरता ही जा रहा है। किसी ने सच ही कहा है- ऊँची दुकान फीका पकवान।

ऊँची दुकान फीका पकवान एक प्रसिद्ध हिन्दी मुहावरा है जिसका का अर्थ है– आवश्यकता से कम देना, आवश्यकता की तुलना में बहुत कम सामान उपलब्ध कराना, आवश्यकता से बहुत कम मिलना; आवश्यकता से कम प्राप्त होना; अधिक खाने वाले को कम चीज़ देना। मान लीजिये आपने किसी जगह के बारे में बड़ी-बड़ी बातें सुनी हैं परन्तु जब आप वहां जाते हैं तो वास्तविकता उसके विपरीत होती है तो ऊँची दुकान फीका पकवान कहावत का प्रयोग करेंगे।

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