Wednesday, 20 July 2022

पर्यावरण संरक्षण के संबंध में दो मित्रो के बीच संवाद - Paryavaran Sanrakshan Ke Sambandh Mein Do Mitro Ke Beech Samvad Lekhan

पर्यावरण संरक्षण के संबंध में दो मित्रो के बीच संवाद लिखिए : In This article, We are providing दो मित्रो के बीच पर्यावरण संरक्षण के संबंध में संवाद लेखन and Paryavaran Sanrakshan Ke Sambandh Mein Do Mitro Ke Beech Samvad Lekhan for Students and teachers.

    पर्यावरण संरक्षण के संबंध में दो मित्रो के बीच संवाद

    आर्यन : कैसे हो आदित्य, इतने दिनों से कहाँ थे ?

    आदित्य : दरअसल आर्यन, मैं बहुत दिनों तक बीमार था, इसलिए घर पर ही आराम कर रहा था।

    आर्यन : क्यों क्या हो गया था तुम्हे ?

    आदित्य : सबसे पहले पापा को तेज बुखार आया फिर एक-एक करके सभी संक्रमित हो गए। प्रदूषण बहुत फैला है आजकल इस कारण लोग अक्सर बीमार पड़ रहे है।

    आर्यन : हां, ये बात तो तुमने एकदम सही कही लेकिन प्रदूषण के लिए भी हम लोग ही जिम्मेदार हैं।

    आदित्य : हां, हम इंसानों ने धरती का पर्यावरण बर्बाद कर दिया है, हर जगह धुआं-धुआं फैला रखा है, इस दूषित वातावरण में कोई सांस भी नहीं ले पा रहा, हमें पर्यावरण को सुरक्षित रखने के लिए कुछ न कुछ करना चाहिए। 

    आर्यन : इसकी शुरुआत हम अपने आप से कर सकते है। सोचो अगर हम लोग अपने आस-पास के काम के लिए साइकिल का उपयोग करें तो व्यायाम भी हो जायेगा और पर्यावरण की मदद भी हो जाएगी। 

    आदित्य : बहुत खूब! मै अपने और मित्रों से भी बात करता हूं। मेरे पिताजी ने वैसे भी हमारी कोलोनी में पर्यावरण संरक्षण हेतु अभियान चलाया है। हमारी कॉलोनी में प्लास्टिक की थैलियों का बहिष्कार किया गया है, कोई भी बाज़ार जाता है तो घर से थैली लेकर जाता है। हम लोगों ने इस दीवाली पटाखे न जलाने का भी निश्चय किया है।

    आर्यन : बहुत अच्छा काम कर रहे हो आप लोग, उस अभियान में मै भी तुम्हारे साथ हूं। कल हम फिर मिलकर इस कार्य को आगे बढ़ाने के संबंध में बात करेंगे। चलता हूं अब।

    आर्यन : ठीक है।


    दो मित्रो के बीच पर्यावरण संरक्षण के संबंध में संवाद

    मीना : निशा तुम कैसी हो ?

    निशा : मैं ठीक हूँ !!तुम कैसी हो ?

    मीना : मैं भी ठीक हूँ।

    मीना : ( खांसते हुए...) आजकल प्रदूषण बहुत बढ़ गया है। जिसके चलते पर्यावरण को बहुत नुकसान हो रहा है।

    निशा : हां तुम सही कह रही हो। प्रदूषण के कारण कई नई बीमारियाँ पैदा हुई हैं जो बहुत जानलेवा है ।

    मीना : निशा, तुम्हे याद है ना कि पर्यावरण दिवस आने वाला है ।

    निशा : हाँ मीना, मुझे याद है कि ५ जून को पर्यावरण दिवस है ।

    मीना : तुम्हे पता है इसे मनाने की घोषणा वर्ष १९७२ में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई थी ।

    निशा : हाँ मीना, पर इसे हर वर्ष मनाने की शुरुआत वर्ष १९७३ से हुई और इसे हर वर्ष एक थीम के तहत मनाया जाता है ।

    मीना : तो पर्यावरण दिवस २०२१ की थीम क्या है ?

    निशा : इस वर्ष पर्यावरण दिवस की थीम “रिस्टोर अवर अर्थ” है ।

    मीना : अरे वाह ! तुम्हे तो इस बारे में बहुत जानकारी है ।

    निशा : मुझे इस विषय पर पढ़ना और काम करना बहुत पसंद है ।

    मीना : तो फिर तुम क्या करने वाली हो पर्यावरण दिवस पर ?

    निशा : हमारी सोसाइटी की बैठक में हमने फैसला किया है कि कोरोना के संक्रमण को देखते हुए हम सब अपने घर पर ही कम से कम एक पेड़ लगा कर इसे मनाएंगे और हाँ, पेड़ लगाने के विडियो और फोटो को सोसाइटी के वाट्सएप ग्रुप में भी डालेंगे जिससे सबकी भागीदारी सुनिश्चित हो सके।

    मीना : अरे वाह ! यह तो तुमने बहुत अच्छी बात बताई । मैं भी अपनी कोलोनी के लोगों से इस तरह से पर्यावरण दिवस मनाने की बात करुँगी ।


    Paryavaran Sanrakshan Ke Sambandh Mein Do Mitro Ke Beech Samvad

    राम : आज अख़बार में छपा था कि बढ़ते प्रदूषण के कारण शहर की वायु विषैली हो गयी है। 

    मोहन : हां तुम सही कह रहे हो। प्रदूषण के कारण कई नई बीमारियाँ पैदा हुई हैं जो बहुत जानलेवा है ।

    राम : पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने की शुरुआत हम इंसानों ने ही कि है और इसे हमें ही सुधारना होगा ।

    मोहन : आजकल पर्यावरण बहुत प्रदूषित हो गया है।

    राम : हां !! हमें कहीं भी गंदगी नहीं फैलानी चाहिए जिससे कि पर्यावरण प्रदूषित ना हो और उसे कुछ नुकसान ना पहुंचे।

    मोहन : हां तुम सही कह रहे हो। अगर हम पर्यावरण को नुकसान पहुंचाएंगे तो इससे हमें कोई फायदा भी नहीं होगा बल्कि इससे उल्टा हमें ही नुकसान होगा।

    राम : पर क्या फायदा !! हम इंसान कभी नहीं सुधर पाएंगे। हर जगह गंदगी तो पक्का दिखेगी।

    मोहन : हां तुम सही कह रहे हो। पर हमे इसे सुधारना ही होगा। तो क्यों ना हम पर्यावरण को बचाने के लिए सफाई की शुरुआत अपने घर से ही करे। तभी तो हम बाहर भी स्वच्छता बनाए रख सकेंगे।

    राम : हां मोहन क्यों ना आज से ही इसे शुरू कर दिया जाए।

    मोहन : हां राम क्यों नहीं!! नेक काम मैं देरी किस बात की !!

    राम : तो चलो ।


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