दो मित्रों के बीच आतंकवाद पर संवाद लेखन - Do Mitro Ke Beech Aatankwad Par Samvad Lekhan

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दो मित्रों के बीच आतंकवाद पर संवाद लिखिए। : In This article, We are providing दो मित्रों के बीच आतंकवाद पर संवाद लेखन and Do Mitro Ke Beech Aatankwad Par Samvad Lekhan for Students and teachers.

    दो मित्रों के बीच आतंकवाद पर संवाद लेखन

    अरुण : हेलो राज, क्या तुमने आज का अखबार पढ़ा है?

    राज : नहीं, मैंने आज अखबार नहीं पढ़ा। क्यों, क्या छपा है ?

    अरुण : इसमें छपा है कि पेरिस में आतंकियों की वजह से हुआ बम ब्लास्ट।

    राज : मुझे समझ नहीं आता कि कोई इतना क्रूर कैसे हो सकता है? आखिरकार वे भी हमारी तरह इंसान हैं। 

    अरुण : हाँ, वे भी हमारी तरह इंसान हैं। लेकिन उनका दिल मर चुका है इसलिए उन्हें दूसरों का दर्द महसूस नहीं होता।

    राज : उन्हें ऐसा क्रूर किसने बनाया? आतंकवाद के मुख्य कारण क्या है?

    अरुण : इन लोगों के दिमाग में झूठा धार्मिक जहर भरा गया है। मेरी समझ में तो आतंकवाद एक मानसिक बीमारी या मनोदशा हैं। 

    राज : समय आ गया है कि सरकार आतंकवाद को नियंत्रित करने के लिए प्रभावी ढंग से काम करे।

    अरुण : तुम्हारे विचार से आतंकवाद को कैसे रोका जा सकता है? 

    राज : आतंकवाद को दूर करने के लिए युवाओं व बालकों को उचित नैतिक शिक्षा देने की आवश्यकता हैं जिससे वह पथ-भ्रष्ट न हों और किसी विदेशी शक्ति के हाथ का खिलौना नहीं बनें 

    अरुण : हाँ, और ये युवा इस कदर इन लोगों के बातों में आ जाते हैं कि अपने दिमाग से काम करना ही बंद कर देते हैं। यहाँ तक कि कई बार तो बेरोजगार युवा भी लालच में इनका साथ देते हैं।

    राज : शिक्षा से ही नागरिकों को आतंकवादी बनने से रोकना संभव है।

    अरुण : तुम बहुत सही कह रहे हो। बढ़ते आतंकवाद को कम करने का यह सबसे अच्छा उपाय है।


    Do Mitro Ke Beech Aatankwad Par Samvad Lekhan

    अजय : कैसे हो विजय, इतने दिनों से कहाँ थे ?

    विजय : मैं ठीक हूँअजय लेकिन तुम कुछ चिंतित से दिख रहे हो।  सब ठीक है न ?

    अजय : आज के समाचार पत्रों के मुख पृष्ठ खबर ही ऐसी छपी है, जिसे सोचकर मैं चिंतित हूँ। 

    विजय : आज मेरे घर अखबार नहीं आया। बताओ तो सही ऐसी क्या खबर है।

    अजय : आज जम्मू-कश्मीर की एक घाटी में हुए आतंकी हमले की खबर पढ़कर दुख हुआ। कई निर्दोष लोग मारे गए। हालाँकि सभी आतंकवादी मारे गए लेकिन हमारा एक जवान भी शहीद हो गया। चिंता इस बात की है कि इतना प्रयास करने के बाद भी आतंकवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है।

    विजय : भाई, यह कुछ गुमराह युवकों की गलत सोच, लालच और बुरे कार्यों का परिणाम है। ऐसे लोग अपनी मांग मनवाने के लिए आतंक का सहारा लेते है जिससे समाज में अशांति फैलती हैं।

    अजय : आतंकवादं अब नासूर बन गया है। एक घटना का घाव भर नहीं पाता है कि किसी दूसरी आतंकी घटना की खबर आ जाती है। पता नहीं आतंकी ऐसा क्यों करते हैं?

    विजय : कुछ आतंकी तो धन की लालच में ऐसा करते हैं जबकि कुछ आतंकियों के मस्तिष्क में जाति, धर्म, भाषा आदि का जहर इस तरह भर दिया जाता है कि वे अपनी जान की परवाह किए बिना आतंकी घटनाओं को अंजाम देते हैं।

    अजय : पर यह मानवता के लिए कलंक के समान है। इसे रोका जाना चाहिए।

    विजय : यह काम अकेले सरकार से नहीं होगा। इसके लिए युवाओं को भी अपनी सोच बदल लेनी चाहिए।

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