Tuesday, 31 May 2022

सारानुवाद और भावानुवाद में अंतर बताइये

सारानुवाद और भावानुवाद में अंतर बताइये

    सारानुवाद और भावानुवाद

    सारानुवाद एक प्रकार का भावानुवाद ही है क्योंकि दोनों में ही मूल कथ्य का समग्रता में अनुवाद न करके मूल भावों को संप्रेषित किया जाता है। दोनों प्रकार के अनुवादों में भाषिक तत्वों की ओर ध्यान न देकर उसमें निहित भाव की ओर ध्यान दिया जाता है। इन दोनों में कुछ प्रमुख अंतर इस प्रकार हैं :

    सारानुवाद और भावानुवाद में अंतर बताइये

    सारानुवाद और भावानुवाद में अंतर

    सारानुवादभावानुवाद
    सारानुवाद में भावानुवाद जैसी मौलिकता नहीं होती। इसमें सूचना की प्रधानता होती है।इसमें एक प्रकार की मौलिकता होती है (एक सीमा तक मूल रचना से स्वतंत्र, प्राय: साहित्यिक कृतियों के)
    अभिव्यक्ति के आकार की सीमा होती है, संक्षेपण अपेषित है।इसमें विस्तार की अपेक्षा रहती है और प्राय: संक्षेपण नहीं होता।
    मूल भाव का संप्रेषण सूत्र रूप में होता है। प्रत्येक पद या वाक्य की अर्थ-व्यंजना का अंतरण संभव नहीं होता।इसमें प्रत्येक पद या वाक्य की अर्थ व्यंजना का अंतरण अनुज्ञेय है। 
    सृजन के साथ संपादन भी निहित रहता है।इसमें सृजन मौलिक सृजन है।
    यह निरंतरता मूल कृति के उद्देश्य के अनुरूप ही होती है।मूल कृति के अनुरूप निरंता बनी रहती है।
    इसका कलेवर मूल कृति की अपेक्षा बहुत छोटा होता है।इसका विस्तार मूल कृति की तुलना में सीमित हो सकता है अथवा आद्योपांत मूल कृति के साथसाथ भी चल सकता है अथवा अधिक विस्तृत भी हो सकता है।

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