Wednesday, 21 August 2019

Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi - गंगा नदी पर निबंध

Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi : दोस्तो आज हमने गंगा नदी पर निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9 ,10, 11, 12 के विद्यार्थियों के लिए लिखा है। इस लेख में हमने गंगा नदी की विशेषताओं तथा महत्व का वर्णन किया है। इस निबंध की सहायता से स्कूल के सभी विद्यार्थी Ganga Nadi पर एक अच्छा निबंध लिख सकते हैं। Here you will find Long and Short Essays on Ganga river in Hindi.

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi 100 Words

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi
    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi
    गंगा भारत की सबसे प्रसिद्ध और सबसे पवित्र मानी जाने वाली नदी है। पुराणों के अनुसार राजा भगीरथ तपस्या करके गंगा को पृथ्वी पर लाए थे अतः इसे भागीरथी भी कहा जाता है। पर्वतराज हिमालय से निकलकर पहाड़ों का चक्कर काट-काट कर हरिद्वार के मैदान में यह नदी पहुंचती है। उसके बाद सारा उत्तर भारतीय मैदान को सींचती हुई कोलकाता के पास समुद्र में मिलती है। बीच में अनेक नदियां आकर इससे मिलती हैं। प्रयाग में यमुना का इसके साथ संगम बड़ा पवित्र माना जाता है। इसके किनारे पर हरिद्वार प्रयाग काशी आदि अनेक तीर्थ स्थित हैं गंगा में स्नान करना पवित्र माना जाता है। गंगा स्नान का दृश्य अत्यंत मनोरम होता है। माना जाता है कि गंगा में स्नान करने से स्वर्ग की प्राप्ति होती है और सभी पाप धुल जाते हैं। इसके किनारे पर कई व्यापारिक नगर भी स्थित हैं जैसे कानपुर, इलाहाबाद आदि। गंगा से कई नहरे निकाली जाती है जो गांव-गांव जाकर खेतों को सींचती हैं। इसका पानी चूंकि पवित्र होता है इसलिए इसमें कभी कीड़े नहीं पड़ते। 

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi 200 Words

    हिमालय से निकलने वाली अनेक नदियों में से ब्रह्मपुत्र, गंगा तथा सतलुज प्रमुख हैं। हिंदुओं की पतित पावनी गंगा भारत के अलग-अलग भागों में विभिन्न नामों से जानी जाती है। गंगा के विस्तृत तट पर ही भारतीय सभ्यता का विकास हुआ था। इसके तट पर कई महान राज्य स्थापित हुए, कई तीर्थ स्थल बसे तथा कई ऋषि, मुनियों को मोक्ष मिला। गोस्वामी तुलसीदास ने गंगा तट के असी घाट पर बैठकर रामचरितमानस की रचना की थी। गंगा को सुरसरि भी कहा जाता है, इसलिए गंगाजल को अमृत भी कहते हैं। माना जाता है कि गंगा में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। गंगा हिमालय पर्वत के गंगोत्री हिमनद से शुरू होती है। उद्गम स्थान से गंगा नदी भागीरथी कहलाती है। यहाँ मंदाकिनी और अलकनंदा नदियाँ भी भागीरथी में मिल जाती है। बद्रीनाथ का प्रसिद्ध तीर्थ स्थान अलकनंदा के तट पर बसा है। बद्रीनाथ से यह तेज गति से आगे बढ़ती हुई ऋषिकेश पहुँचती है, जो एक सुरम्य पर्वतीय स्थल है, जहां साधु-संतों के अनेक आश्रम हैं। इसके बाद हिमालय की गोद छोड़कर गंगा हरिद्वार पहुँचती है। जिसे गंगाद्वार कहते हैं, यहाँ इसी धारा अधिक चौड़ी, परंतु गति, पहले से धीमी हो जाती है। अंत में यह पवित्र नदी बंगाल की खाड़ी में समुद्र में मिल जाती है।

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi 250 Words

    भारत में गंगा यमुना सिंधु ब्रह्मपुत्र गोदावरी सतलज आदि अनेक नदियां बहती हैं जो समस्त भारत को सिंचित करती हैं इसलिए यदि भारत को नदियों का देश कहा जाए तो अतिशयोक्ति न होगी इन सभी नदियों का अपना विशेष महत्व है। किन्तुइन हजारों मातृ-सरिताओं में माता 'गंगाकी गरिमा कुछ और हैजो वस्तुतः अनिर्वचनीय है। संसार की बड़ी-से-बड़ी नदियाँ गंगा की गुणगरिमा की प्रतिस्पर्धा नहीं कर सकती हैंइसीलिए गंगा इस पुण्यभूमि 'आर्यावर्तकी सबसे पुण्यवती एवं मोक्षदायिनी नदी मानी गई है। इसे दुनिया के अन्य देशों में गंगेज के रूप में भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों महत्व है। गंगा का थोड़-सा गौरव आप इसी बात से समझ सकते हैं कि आजतक ऋषियोंकवियोंलोकगायकों तथा लेखकों ने गंगा-विषयक जितना साहित्य लिखा हैउतना संसार के किसी भी साहित्य में एक नदी के संबंध मेंनहीं लिखा जा सका है और न आगे ही लिखा जा सकेगा।

    गंगा तत्त्व : गंगा का व्युत्पत्तिमूलक अर्थ होता है-गां पृथ्वीं गच्छतीति गङ्गा । अर्थात्जो स्वर्ग से सीधे पृथ्वी पर आयेवह गंगा है । फिरइसकी दूसरी व्युत्पत्ति है-ग अव्ययं (स्वर्ग) गमयतीति गङ्गा । यानीजो स्वर्ग की ओर ले जायवह 'गंगाहै। अर्थ स्पष्ट है कि गंगा सीधे स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरती है और पृथ्वी से जीवों को स्वर्ग भी ले जाती है। इस प्रकारस्वर्ग और धरित्री की अविच्छिन्न सोपान-धारा बनने का सौभाग्य गंगा के अतिरिक्त संसार की किसी भी दूसरी नदी को प्राप्त नहीं है। काव्य-द्रष्टा महाकवि कालिदास ने गंगा के इस रहस्य को समझकर ही ये पंक्तियाँ लिखीं :
    जह्रोः कन्यां सगर-तनय-स्वर्ग-सोपानपङ्क्तिम्।स्वर्गारोहण-निःश्रेणिर्मोक्षमार्गाधिदेवता।।

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi 300 Words

    भारत को धर्मभूमि कहा जाता है। यहाँ पशुओं, नदियों और पेड़-पौधों की पूजा की जाती है। दुनिया में ऐसा कहीं नहीं होता। गंगा हमारे लिए एक साधारण नदी नहीं, एक पवित्र नदी है जिसमें स्नान करने से हमारे पाप धुल जाते हैं। इसलिए हम गंगा नदी को गंगा मैया कहते हैं। गंगा के तट पर बसे कई नगर हमारे तीर्थ हैं, इन तीर्थों का दर्शन अत्यंत पुण्य का कार्य है। लोग विभिन्न अवसरों पर यहाँ आकर गंगा स्नान करते हैं। इलाहाबाद में गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम स्थल पर कुंभ
    का प्रसिद्ध मेला लगता है। गंगा का जल बहुत निर्मल होता है। लोग गंगा जल डब्बों, बोतलों आदि में भरकर ले जाते हैं। यह वर्षों बाद भी खराब नहीं होता, इसमें कीड़े नहीं लगते हैं। गंगा जल की यह विशेषता उसे अन्य सभी नदियों से अलग कर देती है। गंगा किनारे की भूमि बहुत उपजाऊ होती है। उत्तर भारत के बहुत बड़े भाग की भूमि गंगा नदी के कारण ही उपजाऊ है। इस जल से सिंचाई का कार्य भी किया जाता है तथा गंगा जल का उपयोग पीने में भी किया जाता है। हमारे विभिन्न प्रकार की गतिविधियों के कारण गंगा का पवित्र जल गंदा होता चला जा रहा है। शहरों के गंदे नाले का जल गंगा नदी में छोड़ा जाता है जो उचित नहीं है। उद्योग-धंधों के कचरे और खतरनाक रसायन भी गंगा जल में छोड़े जाते हैं। हमें गंगा जल को इस तरह प्रदूषित नहीं करना चाहिए। न जाने कितने ऋषि-मुनियों ने गंगा तट पर तपस्या कर मोक्ष प्राप्त किया है। न जाने कितने पापियों का गंगा ने उद्धार किया है। गंगा नदी मरे हुए लोगों के शवों को भी अपनी गोद में लेकर उन्हें सौभाग्य प्रदान करती है। हमें ऐसी पवित्र नदी की पवित्रता को नष्ट नहीं करना चाहिए।

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi 350 Words

    गंगा अपनी 2,525 किलोमीटर लम्बी यात्रा में भारत के पांच राज्य उत्तराखण्ड, उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखण्ड तथा पश्चिम बंगाल से होकर प्रवाहित होती है। गंगा नदी प्रदेश के 27 जनपदों में जनपद बिजनौर से बलिया तक 1,140 किलोमीटर लम्बे मार्ग में प्रवाहित होती है। गंगा नहीं के जल स्रोत मुख्यतः गंगोत्री ग्लेशियर, सतोपन्त ग्लेशियर तथा खतलिंग ग्लेशियर के सा नंदादेवी, त्रिशूल, केदारनाथ, नंदाकोट तथा कामत पर्वत हैं | गंगा नदी का बेसिन क्षेत्र भारत, नेपाल, चीन और बांग्लादेश में है। गंगा बेसिन का कुल क्षेत्रफल 1,080,000 वर्ग किलोमीटर है तथा भारत में गंगा बेसिन क्षेत्र 8,61,000 वर्ग किलोमीटर (लगभग 80 प्रतिशत) है।

    मोक्षदायिनी गंगा भारतीय संस्कृति की पवित्रतम नदी है। गंगा सनातन काल से इस भूखण्ड के विशाल जन समुदाय की संस्कृति, आस्था एवं जीवन गतिविधियों का महत्वपूर्ण केन्द्र रही है। इसके तट पर विकसित सांस्कृतिक स्थल और तीर्थ भारतीय सांस्कृतिक एवं सामाजिक व्यवस्था के विशेष अंग हैं। ऋषिकेश, हरिद्वार, गढ़मुक्तेश्वर, तीर्थराज प्रयाग, काशी तथा गंगा सागर आदि अनेक महत्वपूर्ण स्थल गंगा के किनारे स्थित हैं। देवी देवताओं को गंगा जल अर्पण, गंगा जी में स्नान तथा पूर्वजों को श्रद्धांजलि अर्पित करना गंगा से जुड़ी आस्था के महत्वपूर्ण आयाम हैं। तीर्थराज प्रयाग में प्रसिद्ध कुम्भ मेले का आयोजन भी होता है। गंगा बेसिन उर्वरा मृदा तथा जल संसाधन के कारण कृषि प्रधान जीवनशैली हेतु यमुना के जल का प्रयोग अनादि काल से सिंचाई हेतु किया जाता रहा है। 

    सदियों से महत्वपूर्ण क्षेत्र रही है। गंगा तथा इसकी सहायक नदियां विशेष रूप से वनावरण व वृक्षावरण विस्तार एवं नदियों को प्रदूषण मुक्त रखना प्रत्येक व्यक्ति का संवैधानिक, सामाजिक व नैतिक कर्तव्य है। सिंचाई, अर्थव्यवस्था, पर्यटन, जलीय जैवविविधता एवं पेय जल की अनवरत आपूर्ति हेतु नदियों को स्वच्छ रखना अपरिहार्य है। गंगा नदी की उत्पत्ति व उद्देश्य एवं दैनिक जीवन में महत्व के दृष्टिगत गंगा जीवनदायिनी व मोक्षदायिनी मानी गई है। गंगा नदी लगभग 140 मत्स्य प्रजातियों, 40 उभयचर प्रजातियों एवं राष्ट्रीय जलीय जीव डाल्फिन का वास स्थल है। पारिस्थितिकीय एवं जैवविविधता की दृष्टि से गंगा नदी अत्यन्त समृद्ध है किन्तु जैविक दबाव के कारण गंगा नदी के जल व किनारों पर स्थित वन व वनस्पतियों की गुणवत्ता व घनत्व में हास हो रहा है।

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi 400 Words

    गंगा नदी हिमालय से निकलती है और कोलकाता में हुगली नामक स्थान पर समुद्र में मिल जाती है। यह भारत की राष्ट्रीय नदी है। भारत के उत्तराखंड राज्य में अलकनंदा तथा भागीरथी जब देवप्रयाग में मिलती हैं तत्पश्चात उन से बनी संयुक्त धारा को गंगा के नाम से जाना जाता है। लेकिन भागीरथी के उद्गम स्थल को ही गंगा का उद्गम स्थल माना जाता है। यह नदी मुख्यतः भारत तथा बांग्लादेश से होकर बहती है। घागरा, गोमती, कोसी, जमुना हुगली आदि नदियां गंगा की प्रमुख सहायक नदियां हैं। 

    माना जाता है जी राजा भगीरथ के तप से प्रसन्न होकर मां गंगा शिवजी की जटाओं से होते हुए धरती पर अवतरित हुयीं और उन्होंने राजा भागीरथ के पूर्वजों को मोक्ष प्रदान किया, इसी कारण गंगा नदी को मोक्ष दायिनी भी कहा जाता है। पुराणों एवं शास्त्रों में गंगा जी का पर्याप्त महत्व वर्णित है नित्य प्रति गंगा स्नान करने से किसी प्रकार का रोग नहीं होता और असाध्य रोग भी गंगा स्नान करने से ठीक हो जाते हैं। धार्मिक दृष्टि से गंगा का विशेष महत्व है पुराणों में लिखा है:-
    गंगा गंगेति यो ब्रूयात् योजनानां शतैरपिमुच्यते सर्व पापेभ्यो विष्णुलोकं स गच्छति
    गंगा नदी के तट पर अनेक तीर्थ स्थल हैं जिनमें हरिद्वार काशी प्रयाग आदि प्रमुख हैं। प्रयाग में गंगायमुना और सरस्वती का संगम है। यहाँ प्रत्येक बारह वर्ष में कुम्भ का विशाल मेला लगता है। गंगा की एक विलक्षण विशेषता यह है कि उसके जल में कभी भी कीड़े नहीं पड़ते चाहे वह वर्षों किसी बर्तन में रखा रहे। परोपकार की दृष्टि से भी गंगा का मैदान भारत में बहुत उपजाऊ है। प्राचीन समय में जबकि यातायात के समुचित साधन नहीं थे गंगा के द्वारा ही व्यापार होता था। कानपुर, इलाहाबाद, बनारस एवं पटना आदि बड़े-बड़े प्राचीन समय के व्यापारिक केंद्र इसी नदी के तट पर बसे हुए थे। गंगा के महत्व के विषय में कई कवियों ने गंगा जी का बड़ा ही महत्वपूर्ण वर्णन किया है। हिंदी के श्रेष्ठ कवि पद्माकर ने गंगा जी के महत्व का गंगा लहरी नामक पुस्तक में वर्णन किया है:
    "पापी एक जात हुतौ गंगा के अन्हाइवे कौं ,तासों कहे कोऊ एक अधम अयान में 
    जाऊ जनि पंथी उत विपति विशेष होति,मिलैगी महान् कालकूट खान-पान में
    कहै पद्माकर मुजंगनि बधैगे अंग,संग में सभारी भूत चलैगे मसान में
    कमर कसैगे गजखाल ततकाल बिना,अम्बर फिरैगे तू दिगंबर की दिसान में"
    इस कविता में कवि ने स्तुति अलंकार के माध्यम से यह कहा है कि गंगा में स्नान करने वाला शिवजी के समान बन जाता है इसी प्रकार संस्कृत में भी अनेक कवियों और भक्तों ने गंगा के विषय में बहुत सी रचनाएं तथा स्तुतियां लिखी हैं।

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi500 Words

    गंगा नदी एक बहुत ही पवित्र नदी है और भारत में इसे हिंदू धर्म की एक देवी के रूप में पूजा जाता है। यह भारतीयों के जीवन-चक्र पर बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यह भारत की सबसे लंबी नदी है और दुनिया की सबसे लंबी नदियों में से एक है। भारत में, इसका सबसे बड़ा नदी-बेसिन है जो लगभग 8,38,200 वर्ग किमी में फैला है और इसमें प्रवाह के तीन महत्वपूर्ण क्रम हैं - मध्यम मार्ग, ऊपरी मार्ग और निचला मार्ग।

    गंगा नदी हिमालय पर्वत से निकलती है और बंगाल की खाड़ी में गिरती है। इसकी कई सहायक नदियाँ हैं जैसे घाघरा, यमुना, रामगंगा, आदि भागीरथी-हुगली और पद्मा इसके दो वितरक हैं। गंगा नदी भारत की राष्ट्रीय नदी भी है। इसे दुनिया के अन्य देशों में गंगेज के रूप में भी जाना जाता है। इसका वैज्ञानिक और आध्यात्मिक दोनों महत्व है।

    गंगा नदी के बारे में
    गंगा नदी बांग्लादेश और भारत दोनों से होकर बहती है। इसकी लंबाई लगभग 2525 किमी है और इसका मुंह गंगा डेल्टा है। इसके बहुत सारे स्रोत हैं, और उनमें से कुछ ग्लेशियर हैं, जिनमें सतोपंथ ग्लेशियर भी शामिल हैं। नदी का ऊपरी हिस्सा अपने स्रोत से हरिद्वार तक फैला है।

     नदी का मध्य मार्ग हरिद्वार से शुरू होता है तथा बिहार के राजमहल पहाड़ियों तक जाता है। इस दौरान, नदी उत्तर प्रदेश और बिहार के प्रमुख शहरों से होकर गुजरती है और विभिन्न सहायक नदियों, जैसे घाघरा, राम गंगा, गोमती, कोसी, और गंडक से बाएं से चंबल, जमुना, आदि से जुड़ी हुई है। जमुना गंगा नदी की एक प्रमुख सहायक नदी है। निचला मार्ग पश्चिम बंगाल से शुरू होता है। यह नदी राजमहल पहाड़ियों से दक्षिण की ओर बहती है। 

    भारत में गंगा नदी का महत्व
    हिन्दू धर्म में गंगा नदी बहुत पवित्र मानी जाती है। गंगा को देवी या माता का दर्जा प्राप्त है। देवी गंगा की पूजा की जाती है और जल को औषधीय गुणों के लिए जाना जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार गंगा नदी भगवान शिव की जटाओं से होते हुए धरती पर अवतरित हुई है। गंगा नदी का सिंचित जल भारत में भूमि को उपजाऊ बनाता है, उत्तर भारत के मैदान इसका प्रमुख उदाहरण है। गंगा नदी का भारतीयों के लिए बहुत महत्व है। गैर-हिंदू और हिंदू दोनों इस दैवीय नदी के मूल्य को महसूस करते हैं गंगा के किनारे कई धार्मिक-सांस्कृतिक मेलों व उत्सवों का आयोजन भी किया जाता है जैसे कुंभ मेला, गंगा मेला व देव-दीपावली इत्यादि।  

    उपसंहार : 
    इन्ही महान उपहारों के कारण गंगा भारत में सबसे प्रसिद्ध नदियों में से एक है। गंगा नदी का पानी पूरे वर्ष उपलब्ध रहता है क्योंकि यह एक बारहमासी नदी है। इस पावन नदी ने भारत में बहुत उपजाऊ बाढ़ के मैदानों का गठन किया है। यह अपने तटों पर उपजाऊ भूमि से हमें स्वर्ण फसलें प्रदान करती है। इसका पानी व्यापक रूप से सिंचाई और कृषि प्रयोजन में उपयोग किया जाता है। गंगा भारत में राष्ट्रीय जलमार्ग रही है। इसके अतिरिक्त गंगा नदी मीठे पानी की डॉलफिन मछली तथा कछुओं के लिए प्राकृतिक आवास भी उपलब्ध कराती है। 

    Ganga Nadi Par Nibandh In Hindi 700  Words 

    गंगा भारत की नदी है। यह हिमालय से निकलती है और बंगाल की घाटी में विसर्जित होती है। यह निरंतर प्रवाहमयी नदी है। यह पापियों का उद्धार करने वाली नदी है। भारतीय धर्मग्रंथों में इसे पवित्र नदी माना गया है और इसे माता का दर्जा दिया गया है। गंगा केवल नदी ही नहींएक संस्कृति है। गंगा नदी के तट पर अनेक पवित्र तीर्थों का निवास है।

    गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है। गंगा का यह नाम राजा भगीरथ के नाम पर पड़ा। कहा जाता है कि राजा भगीरथ के साठ हज़ार पुत्र थे। शापवश उनके सभी पुत्र भस्म हो गए थे। तब राजा ने कठोर तपस्या की। इसके फलस्वरूप गंगा शिवजी की जटा से निकलकर देवभूमि भारत पर अवतरित हुई। इससे भगीरथ के साठ हज़ार पुत्रों का उद्धार हुआ। तब से लेकर गंगा अब तक न जाने कितने पापियों का उद्धार कर चुकी है। लोग यहाँ स्नान करने आते हैं। इसमें मृतकों के शव बहाए जाते हैं। इसके तट पर शवदाह के कार्यक्रम होते हैं। गंगा तट पर पूजा-पाठभजन-कीर्तन आदि के कार्यक्रम चलते ही रहते हैं।

    गंगा हिमालय में स्थित गंगोत्री नामक स्थान से निकलती है। हिमालय की बर्फ़ पिघलकर इसमें आती रहती है। अतः इस नदी में पूरे वर्ष जल रहता है। इस सदानीरा नदी का जल करोड़ों लोगों की प्यास बुझाता है। करोड़ों पशु-पक्षी इसके जल पर निर्भर हैं। लाखों एकड़ जमीन इस जल से सिंचित होती है। गंगा नदी पर फरक्का आदि कई बाँध बनाकर बहुउद्देशीय परियोजना लागू की गई है।

    अपने उद्गम स्थान से चलते हुए गंगा का जल बहुत पवित्र एवं स्वच्छ होता है। हरिद्वार तक इसका जल निर्मल बना रहता है। फिर धीरे-धीरे इसमें शहरों के गंदे नाले का जल और कूड़ा-करकट मिलता जाता है। इसका पवित्र जल मलिन हो जाता है। इसकी मलिनता मानवीय गतिविधियों की उपज है। लोग इसमें गंदा पानी छोड़ते हैं। इसमें सड़ी-गली पूजन सामग्रियाँ डाली जाती हैं। इसमें पशुओं को नहलाया जाता है और मल-मूत्र छोड़ा जाता है। इस तरह गंगा प्रदूषित होती जाती है। वह नदी जो हमारी पहचान हैहमारी प्राचीन सभ्यता की प्रतीक हैवह अपनी अस्मिता खो रही है।

    गंगा जल में अनेक विशेषताएँ हैं। इसका जल कभी भी खराब नहीं होता है। बोतल  में वर्षों तक रखने पर भी इसमें कीटाणु नहीं पनपते। हिन्दू लोग गंगा जल से पूजा-पाठ करते हैं। गंगा तट पर बिखरी चिकनी मिट्टी 'मृतिकासे दंतमंजन बनाए जाते हैं। लोग इससे तिलक करते हैं।

    गंगा तट पर अनेक तीर्थ हैं। बनारसकाशीप्रयाग (इलाहाबाद)हरिद्वार आदि इनमें प्रमुख हैं। प्रयाग में गंगायमुना और सरस्वती का संगम है। यहाँ प्रत्येक बारह वर्ष में कुम्भ का विशाल मेला लगता है। लोग बडी संख्या में यहाँ आकर संगम स्नान करते हैं। बनारस और काशी में तो पूरे वर्ष ही भक्तों का समागम होता है। पवित्र तिथियों पर लोग निकटतम गंगा घाट पर जाकर स्नान करते हैं और पुण्य लाभ अर्जित करते हैं। विभिन्न अवसरों पर यहाँ मेले लगा करते हैं।

    गंगा अपना रूप बदलती रहती है। आरंभ में यह सिकुड़ी सी होती है पर मैदानी भागों में इसका तट चौड़ा हो जाता है। चौड़े तटों के इस पार से उस पार जाने के लिए नौकाएँ एवं स्टीमर चलती हैं। गंगा नदी पर अनेक स्थानों पर लंबे पुल भी बनाए गए हैं। इससे परिवहन सरल हो गया है।

    गंगा नदी अपने तटवर्ती क्षेत्रों की भूमि को उपजाऊ बनाकर चलती है। भूमि को यह सींचती भी है। अत: कृषि की समृद्धि में इसका बहुत योगदान है। जैसे-जैसे गंगा नदी आगे बढ़ती हैउसमें कई नदियाँ मिलती जाती हैं। इसकी धारा वेगवती होती जाती है। वर्षा ऋतु में तो इसमें कई स्थानों पर बाढ़ आ जाती है। बाढ़ से फ़सलों और संपत्ति की भारी हानि होती है। अंत में यह बंगाल में घुसती है। यहाँ इसकी धारा सुस्त पड़ जाती है जिससे बेसिन का निर्माण होता है। फिर यह बंगाल की खाड़ी (समुद्र) में समा जाती है। इस प्रकार गंगा नदी की यात्रा समाप्त हो जाती है।

    गंगा नदी का भारतीय संस्कृति में अन्यतम स्थान है। इसलिए इसे राष्ट्रीय नदी घोषित कर दिया गया है। गंगा की सफ़ाई के लिए कुछ कार्ययोजनाएँ भी बनाई गई हैं। लोगों को इसमें सहभागिता करनी चाहिए। गंगा जल को प्रदूषण से मुक्त रखने के लिए उपयुक्त प्रयास करने चाहिए।

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