भारतीय राजनीति में दबाव समूह के प्रभाव की विवेचना कीजिए

भारतीय राजनीति में दबाव समूह के प्रभाव की विवेचना कीजिए - भारत में दबाव समूहों का निर्माण स्वतन्त्रता प्राप्ति से पूर्व ही आरम्भ हो चुका था। भारतीय रा

भारतीय राजनीति में दबाव समूह के प्रभाव की विवेचना कीजिए

    भारत में दबाव समूह

    भारत में दबाव समूहों का निर्माण स्वतन्त्रता प्राप्ति से पूर्व ही आरम्भ हो चुका था। भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना 1885 में हुई थी जिसका तब उद्देश्य राजनीतिक तथा सामाजिक क्षेत्र में ब्रिटिश सरकार से अधिकतम मविधाएं प्राप्त करना था। कोलकाता में 'इण्डिया लीग' नामक संस्था की स्थापना की गयी दो जिसका उद्देश्य ब्रिटिश सरकार में यह मांग करना था कि भारतीय लोक सेवा में भारतवासियों के लिए स्थानों की मख्या बढायो जाये तथा इस सेवा में प्रवेश के लिए निर्धारित आयु सीमा को बढ़ाया जाये। 1920 में गांधीजी ने राष्ट्रीय आन्दोलन को एक नयी दिशा दी। उन्होंने कृषक तथा श्रमिक वर्ग को सगठित कर कांग्रेस के आन्दोलन को जन आन्दोलन का रूप दिया। प्रथम विश्व युद्ध से पूर्व श्रमिक संगठनों का निर्माण हो चुका था। लवानिया तथा जैन के शब्दों में "1908 में मुम्बई में अमिक आन्दोलन तेज हुआ और एक वर्ष में सात ट्रेड यूनियनों की स्थापना हुई। 1920 में राष्ट्रीय स्तर पर एक ट्रेड यूनियन 'ऑल इण्डिया देड यूनियन कांपेस' संगठित हुई, जिसका अध्यक्ष कांग्रेस दल के तात्कालीन अध्यक्ष लाला लाजपत राय को बनाया गया। 19346 में राष्ट्रीय स्तर पर किसानों का एक संगठन 'ऑल इण्डिया किसान सभा' स्थापित हुई जिसे कांग्रेस का निर्देशन तथा समर्थन प्राप्त था। इस संस्था की ओर से जमीदारी उन्मूलन तथा भूमि के पुनर्वितरण की मांग की गयो।'

    स्वतन्त्रता के पश्चात् भारत में दबाव गुटों की संख्या स्वाभाविक रूप से बढ़ी, जिसका कारण वयस्क मताधिकार, गजनीतिक समानता, सरकार के कार्यक्षेत्र में विस्तार तथा संविधान द्वारा भाषण, प्रेस तथा समुदाय बनाने की स्वतन्त्रता के अधिकारों का दिया जाना था। भारत के संविधान में सत्ता का स्रोत जनता को माना और सरकार के निर्माण का अधिकार जनता को प्रदान किया गया। प्रतिनिध्यात्मक शासन प्रणाली की स्थापना के कारण राजनीतिक दल स्वभाविक रूप में बहुत अपिक क्रियाशील हो गये और व्यावहारिक नीति में जनसाधारण के भाग लेने के कारण म्वर्य राजनीतिक दलों ने विभिन्न वर्गों को हितों के आधार पर ठिन काना आरम्भ किया। अन, भारत में व्यावसायिक.श्रमिक व्यापारिक जातीय तथा साम्प्रदायिक हितो का प्रतिनिधित्व करने वाले मगठनों का निर्माण हुआ।

    भारतीय दबाव समूहों की स्थिति उतनी प्रभावशाली नहीं कही जा सकती जिननी पश्चिमी देशों के दबाव हो में देखी जाती है। भारत में दबाव गुटो का प्रभाव प्रशासन से कुछ सविधाएँ प्राप्त करने तक सीमित है। सरकार की नीतियों में परिवर्तन कराने को सामर्थ्य नहीं रखते। भारतीय समाज परम्परागत और आधुनिकता की विशेषताओं से युक्त रहा है। इसलिए यहाँ के दबाव समूहों में पश्चिमी और भारतीय दोनों पाये जाते हैं।

    भारतीय दबाव समूहों की प्रकृति व विशेषताएं

    डॉ. रजनी कोठारी ने भारतीय हित समूहों अथवा भारतीय दबाव समूहों की प्रकृति व विशेषताओं वर्णन किया है. जो संक्षेप में निम्नलिखित है

    (1) भारत में विभिन्न हित समूहों का प्रतिनिधित्व राजनीतिक दलों के माध्यम से होता है। सरकार के द्वारा सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक विकास की गति तय होती है। अतः भारत के दबाव समूह कहीं न कहीं राजनीतिक दलों का सहारा अवश्य लेते हैं।

    (2) इस प्रकार भारत में विभिन्न हित समूहों का हित वर्गों का संगठन स्वतन्त्र व पृथक न होकर राजनीतिक दलों के गठबन्धन से हुआ है। 

    (3) भारतीय दबाव समूहों में अधिकांशतः परम्परात्मक आधार पर निर्मित वे समूह है जो किसी विशेष जाति व परिवार से सम्बन्धित होते हैं। व्यापार और उद्योगों के सिलसिले में पुश्तैनी दबाव समूह अधिकतर पाये जाते हैं। 

    (4) भारत के दबाव समूहों का आधार हित व वर्गों की अपेक्षा जातीयता पर अधिक रहता है। भले ही आर्थिक व सामाजिक विकास बाधित होता हो, यहाँ पर जाति के आधार पर गुट या हित समूह तेजी से पनपने लगते हैं। 

    (5) भारतीय दबाव समूहों को राजनीति में महत्त्व कम दिया जाता है तथा राजनीति में इन्हें भाग लेने से रोका भी जाता है और यदि ये भाग लेते भी हैं तो राजनीतिक दलों के माध्यम से भाग ले सकते हैं। 

    (6) कभी-कभी इन दबाव समूहों से क्षति भी उठानी पड़ती है। रजनी कोठारी का कहना है कि आर्थिक मांगों को यदि राजनीतिक ढंग से नहीं उठाया जाता है । तब दबाव समूहों द्वारा आन्दोलन व हिंसात्मक रूप से अपनाया जाता है। वे प्रत्यक्ष कार्यवाही तथा उपद्रव उत्पन्न करते हैं। 

    (7) भारतीय दबाव समूहों की प्रकृति पाश्चात्य देशों के दबाव समूहों की प्रकृति से भिन्न होती है। 

    (8) राजनीतिक और सामाजिक चेतना में वृद्धि से दबाव समूहों में भी वृद्धि होती है। 

    (9) भारत में स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय स्तर तक दबाव या हित समूह पाये जाते हैं। 

    (10) भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में इन दबाव समूहों को चुनाव हेतु प्रयोग किया जाता है। रॉबर्ट एल हार्डग्रेव ने भारत में दबाव समूहों की निम्नलिखित विशेषताएं बताई है 

    1. भारतीय दबाव समूहों का विकास धीमी गति से हुआ है जो दबाव समूह हैं,वे काफी दुर्बल है। 
    2. दबाव समूहों की शासन तक पहुंच कम है इसका कारण दबाव समूहों का कमजोर होना है। 
    3. कांग्रेस दल के भीतर पाये जाने वाले विभिन्न गुटों ने विशिष्ट हितों के लिए एजेण्ट के रूप में कार्य किया।
    4. भारतीय जनता में राजनीतिक बल की कमी के कारण यहां के सरकारी पदाधिकारी भी अनुत्तरदायी और भृष्ट है। रॉबर्ट एल हार्डग्रेव के अनुसार सरकारी पदाधिकारियों में भी दबाव समूहों की गतिविधियों के प्रति सदैव एक भययुक्त वातावाण बना रहता है।

    भारत में दबाव समूहों का वर्गीकरण

    भारत में दबाव समूह देश, समाज का प्रतिनिधित्व करते हैं। मोरिस जोंस के शब्दों में, यदि भारतीय शासन व्यवस्था को पूर्णतः समझना है तो गैर सरकारी एवं अज्ञात संगठनों की गतिविधियों का अध्ययन करना उपयोगी एवं अपरिहार्य है। 

    भारत में दबाव समूहों का वर्गीकरण निम्न प्रकार है

    आमण्ड और पावेल ने भारतीय दबाव समूहों को चार समूहों में विभाजित किया है

    1. संस्थानात्मक दबाव समूह : संस्थानात्मक दबाव समूह राजनीतिक दलों विधानमण्डलों, सेना, नौकरशाहों में प्रभावशाली होते हैं। ये औपचारिक संगठन होते है। ये स्वायन रूप से क्रियाशील रहकर अपने हितों को अभिव्यक्ति के साथ माथ अन्य सामाजिक समुदायों के हितों का प्रतिनिधित्व भी करते हैं। ये दबाव समूह निर्णय प्रक्रिया का अभिन्न भाग होते हैं। संस्थात्मक दबाव समूह में प्रमुख है -कांग्रेस कार्य समिति, कांग्रेस संसदीय बोर्ड, मुख्यमंत्री क्लब, केन्द्रीय चुनाव समिनि, नौकरशाही और सेना। 

    2. समुदायात्मक दबाव समूह : ये दबाव समूह विशेष हितों को पूर्ति के लिए बनाये जाते हैं। ये आधुनिक भारत में भारतीय राजनीति में सक्रिय है । इनमें प्रमुख है- श्रमिक संघ, व्यावसायिक संघ, कृषक समुदाय, छात्र समुदाय, कर्मचारी संप, साम्प्रदायिक संघ।

    श्रमिक संघों का उद्देश्य श्रमिकों के आर्थिक, राजनीतिक, सामाजिक और संस्कृतिक हितों की रक्षा करना होता है। श्रमिक संघों ने सरकारी नीतियों को आंशिक रूप से प्रभावित किया है। इनमें मुख्य है- भारतीय मजदूर संघ, यूंनाइटेड कांग्रेस, इण्डियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस (INTUC), ऑल इण्डिया ट्रेड यूनियन कमिस (AINTUC)।

    इस समय 'ऑल इण्डिया ट्रेड यूनियन कांग्रेस' तथा 'यूनाइटेड ट्रेड यूनियन कांग्रेस' साम्यवादी दलों के नियन्त्रण में हैं, 'हिन्द मजदूर सभा पर समाजवादी दलों को नियन्त्रण है और 'इण्डियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस पर कांग्रेस दल का स्वामित्व है। इन चारों संघों में इण्डियन नेशनल ट्रेड यूनियन कांग्रेस सबसे बड़ा श्रमिक संगठन है। जिसको सदस्य संख्या अन्य संघों की अपेक्षा बहुत ज्यादा है। भारतीय श्रमिक संघों की निम्नलिखित विशेषताएं -

    भारतीय श्रमिक संघ की विशेषताएं

    1. भारतीय श्रमिक संगठन सुसंगठित नहीं है जिसमे सरकार पर उनका पूरा दबाव नही पड़ता। 
    2. भारतीय श्रमिक संगठन राजनीतिक दलों के नियत्रण में कार्य करते है जिसमे श्रमिकों के हितों की अपेक्षा दलों के हितों को अधिक महत्व देते है।
    3. श्रमिक संगठनों के विभिन्न राजनीषिक दलों से सम्बद्ध होने के कारण उनमें पारम्परिक मतभेद पाया जाता है। 
    4. अधिकाश श्रमिकों के अशिक्षित होने के कारण उनका नेतृत्व श्रमिकों के हाथों में न होका मंत्री या राजनीतिक नेताओं के हाथों में होता है। 
    5. श्रमिक संगठनों को आर्थिक स्थिति कमजोर होती है इसलिए वे अपने उद्देश्यों को प्रभावशाली ढंग से प्रचारित नहीं कर पाते। 
    6. श्रमिक संगठन यद्यपि अपनी कुछ मागें मनवाने में सफल हुए, जैसे-मजदूरी की दरें बढ़वाना, कार्य करने की दशाओ में सुधार आदि परन्तु ये सफलता उन्हें पारस्परिक वार्ता और विधायकों के माध्यम से प्राप्त हुई हैं. सामूहिक मौदेबाजी से नहीं । 

    व्यवसायिक संघों का उद्देश्य व्यवसायिकों के राजनीतिक, आर्थिक, व्यावसायिक और सामाजिक हितों की रक्षा करना है। इन संगठनों ने सरकारी नीतियों को बहुत अधिक प्रभावित किया है। इनमें मुख्य हैफेडरेशन ऑफ इण्डियन चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इण्डस्ट्री (EICCI). एसोसिएटेड चेम्बर्स ऑफ कॉमर्स, ऑल इण्डिया मैन्युफैक्चरर्स आर्गेनाइजेशन। इस संगठन का राजनीतिक दलों से सम्बन्ध होता है। यह संसद से सम्पर्क रखता है। इसके मंत्रियों और स्थायी कर्मचारियों से व्यक्तिगत सम्पर्क होते हैं। इसका प्रेस पर नियन्त्रण है क्योंकि प्रेस बड़े पंजीपतियों द्वारा चलायी जाती है. उदाहरणार्थ-'टाइम्स ऑफ इण्डिया', 'इकोनोमिक टाइम्स'- डालमिया जैन द्वारा हिन्दुस्तान टाइम्स' 'ईस्टर्न इकोनोमिक' बिड़ला द्वारा 'स्टेटसमैन और कामर्स' टाटा और मफतलाल द्वारा 'इण्डियन एक्सप्रेस और फाइनेंशियल एक्सप्रेस' गोइनका द्वारा चलाये जा रहे है। इन समाचार-पत्रों तथा मासिक पत्रिकाओं द्वारा व्यापारिक संघ सरकार के निर्णय तथा समस्याओं पर प्रकाश डालते हैं और जनमत को अपने पक्ष में करने का प्रयत्न करते हैं।

    कृषक समुदाय-19वीं शताब्दी के आरम्भ में कृषक आन्दोलन बंगाल, महाराष्ट्र और पंजाब में शुरू हुए लेकिन उन आन्दोलनों का कोई असर नहीं हुआ। 1917 में गांधी जी ने चम्पारन के किसानों को संगठित किया। 1918 में गुजरात में लगान वसूली के खिलाफ किसानों से सत्याग्रह कराया। 1928 में लगान के विरुद्ध 'बारदोली सत्याग्रह' कराया। 1932 में जूट और कपास के उत्पादको को कांग्रेस ने संगठित किया। 1936 में कांग्रेस ने लखनऊ अधिवेशन में एक कृषि सुधार योजना अपनायी गयी। इसके लिए इसी वर्ष कुछ कांग्रेसियों और साम्यवादी दल के नेताओं द्वारा 'ऑल इण्डिया किसान कांग्रेस' की स्थापना की गयी। कुछ कांग्रेसियों ने इस संगठन का विरोध किया, इसलिए 1937 में इस संगठन का नाम बदल कर 'ऑल इण्डिया किसान सभा' कर दिया गया।

    यह संगठन आज भी साम्यवादी दल के नियन्त्रण में है। इसी तरह अन्य दलों ने भी कृषक संगठन बनाये; जैसे-समाजवादी दल ने 'हिन्द किसान पंचायत' तथा वामपंथी दलों ने 'संयुक्त किसान समा। किसान लांबी के प्रभाव के कारण सरकार कृषि पर आय कर नहीं लगा सकी है। मार्च 1977 के चुनावों के बाद स्थापित जनता पार्टी शासन में किसान लॉबी का प्रभाव बढ़ा । चौ. वरणमिह ने "किसान रैली' और 'किसान सम्मेलन के माध्यम से किसानों में संगठित करने का प्रयास किया। चौ. चरणसिंह ने वित्तमंत्री के रूप में अपने बजट में खाद डीजल कृषि उत्पादन आदि पर किसानों को कुछ रियायतें देने का प्रयत्न किया।

    गुजरात में भारतीय किसान संघ' ने सितम्बर 1984 से मार्च 1997 तक 17 विराट प्रदर्शन तथा कई रैलियां निकाली।

    उतर प्रदेश में 'भारतीय किसान यूनियन' के नाम से एक किसान संगठन का निर्माण किया जिसे चौधरी महेन्द्रसिंह टिकेन का चमत्कारी नेतृत्व मिला। इस संगठन का उत्तर प्रदेश सरकार से टकराव हुआ। 25

    अक्टूबर, 1089 से 3 अक्टूबर, 198 नक नई दिल्ली के इण्डिया गेट के आगे वोट बलय पर लगभग 2 किसानो ने हिस्सा लेकर अपनी संगठन की शक्ति का प्रदर्शन किया।

    छात्र समुदाय-गव समुदाप ने राष्ट्रीय आन्दोलन में सक्रिय भाग लिया था। 1921 में गांपी के असहयोग आन्दोलन में छात्रों ने सरकारी सहायता प्राप्त शिक्षा संस्थाओं से अपना नाता नोढ़ लिया था। का के मंगठनों का सम्बन्ध राजनीतिक दलो से रहा है; उदाहरणार्थ-'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP का सम्बन्ध भारतीय जनता पार्टी से 'स्टूडेण्ट फेडरेशन' का सम्बन्। साम्यवादी दल से. 'नेशनल यूनिपन अप स्टूडेण्ट्स आगेनाइजेशन' का सम्बन्ध कांग्रेस पार्टी से है। इन संगठनों को ये राजनीतिक दल ही आमिद सहायता करते हैं। कभी-कभी राजनीतिक दलों के आदान पर ये छात्र संगठन हड़ताल. चन्द, पेराव जैसे कार्य भी करते रहते हैं।

    सरकारी कर्मचारी संघ भी गलत सरकारी नीतियों का विरोध अपने तरीके से करते रहते हैं। इन संगठनों ने वेतन संशोधन तथा मंहगाई भत्ते की मांगें भी पूरी कराने के लिए हड़ताल, बन्द आदि का आश्रय लिया है। इनमें मुख्य हैं- ऑल इण्डिया रेलवे मैन एसोसिएशन', 'आल इण्डिया पोस्ट एण्ड टेलीग्राफ वर्कर्स यूनियन' 'ऑल इण्डिया टीचर्स एसोसिएशन' आदि।

    साम्प्रदायिक मंगठन भी अपने संगठन बनाते हैं। जैसे-'हिन्दू महासभा', 'कायस्थ सभा', 'भारतीय ईसाइयों को अखिल भारतीय परिषद', 'पारसी एसोसिएशन' आदि। इस संगठन की अपनी विशिष्ट मांगें होती हैं। उन्हीं को प्राप्त कराने के लिए ये सरकार को प्रभावित करते हैं। 

    3. भारतीय राजनीति में असमुदायात्मक दवाव समूह (The Non-Associational Pressure Groups in Indian Politics)

    ये समूह संगठित नहीं होते । ये अनौपचारिक रूप से अपने हितों की अभिव्यक्ति करते हैं। इनमें मुख्य निम्न ये हैं-

    साम्प्रदायिक तथा धार्मिक समुदाय-इनमें आने वाले संगठनों के कुछ नाम इस प्रकार है-मुस्लिम मजलिस, विश्व हिन्दू परिषद, बावरी एक्शन कमेटी.जमायत-ए-इस्लाम-ए-हिन्द, जमायत-ए-इस्लाम, जैन समाज, चर्च, वैष्णव समाज, नय्यर सेवा समाज आदि। इनकी अपनी पाठशाला, विश्वविद्यालय, छात्रावास आदि है। ये निर्वाचनों में सक्रिय होकर प्रत्याशियों के लिए कार्य करने हैं।

    जातीय समुदाय- भारतीय राजनीति में जाति का प्रभाव बहुत समय से रहा है। जाति अपने को संगठित करके राजनीतिक हितों को प्राप्त करना चाहती हैं । तमिलनाडु में नाडार जाति संघ, आन्ध्र प्रदेश में काम्मा और रेडो जाति समुदाय, राजस्थान में जाट और राजपूत, गुजरात में क्षत्रिय महासभा आदि ने संगठित होकर राजनीति को प्रभावित करने का प्रयास किया है। जाटों ने तेरहवीं लोकसभा में आरक्षण की मांग की जिसे अगस्त 1999 स्वीकार कर लिया गया। आज जाति का प्रभाव प्रत्याशी चुनने में,मन्त्रिमण्डल गठन में,मतदान करते समय देखा जा सकता है।

    गांधीवादी समुदाय-गांधीवादी संगठन के अनेक उदाहरण हैं, जैसे-सर्वसेवा संघ, सर्वोदय, भूदान, खादी ग्रामोद्योग संघ, गांधी शान्ति प्रतिष्ठान आदि । इनका प्रभाव शासकीय नीतियों पर बहुत पड़ा है। इनका कार्य सार्वजनिक कल्याण के लिए होता है। इनके प्रमुख नेता आचार्य विनोबा भावे, जयप्रकाश नारायण, काका कालेकर, दादा धर्माधिकारी आदि रहे हैं।

    भाषागत समुदाय ने भी राजनीति के महत्त्वपूर्ण भूमिका निभायी है। राज्यों का बंटवारा भाषा के आधार पर हुआ है, जैसे-1953 में आंध्र प्रदेश का निर्माण, 1960 में मुम्बई राज्य का विभाजन और महाराष्ट्र एवं गुजरात का निर्माण, 1966 में पंजाब का विभाजन । उत्तर प्रदेश में उर्दू भाषा को राजकीय मान्यता प्राप्त सूची में स्थान दिलाना भाषागत आधार पर किये गये कार्य हैं।

    सिण्डीकेट 1960-70 तक इसका प्रभाव भारतीय राजनीति में रहा। यह शब्द एक संगठन के लिए प्रयुक्त होता था जिसमें कांग्रेस के कुछ प्रभावशाली नेता और मुख्यमन्त्री थे। उन्होंने नेहरू जी के उत्तराधिकारी के रूप में लालबहादुर शास्त्री के चयन में कामराज को कांग्रेस का अध्यक्ष बनाने में, इन्दिरा गांधी को 1950 में प्रधानमन्त्री बनाने में, चौथे आम चुनाव के बाद मोरारजी देसाई को उप-प्रधानमन्त्री बनाने में इसने महत्त्वपूर्ण भूमिका का निभायी थी। पोरे भोरे इसका प्रभाव कम होता गया और 1969 में कांग्रेस के विभाजन के साथ इसका प्रभाव समाप्त है।

    युवा तर्क (Young Turks)- इसका प्रादुर्भाव भारतीय राजनीति मे 1969 के पश्चात होता है। यह एक वामपंथी संगठन है। ये समाजवादी निर्णयों पर बल देते हैं। भारतीय संविधान में 24वे, 25वे और 26वें संशोधनों पर वामपंथी गुटों का प्रभाव है। 

    4. भारतीय राजनीति में प्रदर्शनकारी दबाव समूह : प्रदर्शन समूहों में जम्मू और कश्मीर लिबरेशन फ्रंट, बम्बर खालमा सिख स्टूडेन्टस फेडरेशन, खालिस्नान कमान्डो फोर्स (पंजाब), उल्फा (असम), रणवीर सेना (बिहार) आदि प्रमुख हैं। इनका उद्देश्य राजनीतिक हत्या, हिमा.दगे, सार्वजनिक सम्पत्ति को नुकसान पहुंचाना. आग लगाना, विरोध दिवस मनाना आदि होता है । इनका तर्क यह होता है कि सरकार लोगों को न्यायोचित मांगों की ओर ध्यान नहीं देवी । शान्तिपूर्ण मांगों की ओर ध्यान नहीं दिया जाता तो ये दबाव गुट इस प्रकार की कार्यवाही करते हैं। 

    दबाव समूहों के दोष

    भारतीय दबाव गुटों के अनेक दोष देखे जा सकते हैं.जो निम्नलिखित है

    1. दबाव समूह क्षेत्रीयता को बढ़ावा देते हैं जो राष्ट्रीय हित में नहीं है। 

    2 दबाव गुट सकीर्ण विचारधारा को बढ़ावा देते हैं। 

    3. जाति समुदाय पर्म को बढ़ावा देते हैं। 

    4. ये समूर हिमा, अनशन, सत्यापह, हड़ताल आदि अवैधानिक साधनों का सहारा लेते हैं। 

    5. विदेशी सहायता से प्रभावित होते हैं। 

    6. भारत में दवाव गुटों की कार्यशैली गुप्त रखी जाती है.जन- सामान्य का उसकी सूचना नहीं मिलती।

    7. दवाव गुट रिश्वत और धन देकर विधायकों को अपनी ओर कर लेते हैं और अपने हित में नीतियाँ बनवाते हैं।

    8. सरकारी कर्मचारियों द्वारा अचानक काम बन्द कर देने से प्रशासन ठप्प हो जाता है जिससे जनता को बहुत असुविधा होती है। 

    दबाव समूहों के दोष दूर करने का उपाय

    अनेक दोषों के होते हुए भी दबाव समूह आज अपनी अनिवार्यता को बढ़ाते जा रहे हैं। लोकतन्त्र में विचाराभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता का अधिकार होता है इसलिए अभिव्यक्ति पर प्रतिबन्ध लगाना अनुचित है। दबाव समूहों के सुधारने को क्या विधि हो,इस पर विचार करना है। दबाव समूह भी वर्गों के माध्यम से जनता की ही आकांक्षाओं की अभिव्यक्ति करते हैं। क्योंकि वर्ग भी जनता में से ही बने हैं अतः इनमें सुधारों की आवश्यकता है

    1. दबाव समूहों को आवश्यक रूप से पंजीकृत कराना चाहिए। 

    2. दबाव समूहों के कार्यों को वार्षिक रिपोर्ट प्रकाशित की जानी चाहिए। 

    3. दबाव समूहों के आय-व्यय का लेखा-जोखा भी प्रकाशित होना चाहिए। 

    4. दबाव समूहों के सदस्यों की संख्या का विवरण भी प्रकाशित होना चाहिए । 

    5. दबाव समूहों का संविधान होना चाहिए। 

    6. दबाव समूहों के द्वारा किये जाने वाले अनुचित कार्यों को रोकने के लिए सरकार कठोर कदम उठाये ।

    COMMENTS

    Name

    10 line essay,281,10 Lines in Gujarati,1,Aapka Bunty,3,Aarti Sangrah,3,Aayog,3,Agyeya,4,Akbar Birbal,1,Antar,170,anuched lekhan,50,article,17,asprishyata,1,Bahu ki Vida,1,Bengali Essays,135,Bengali Letters,20,bengali stories,12,best hindi poem,13,Bhagat ki Gat,2,Bhagwati Charan Varma,3,Bhishma Shahni,6,Bhor ka Tara,1,Biography,141,Biology,88,Boodhi Kaki,1,Buddhapath,2,Chandradhar Sharma Guleri,2,charitra chitran,203,chemistry,1,chhand,1,Chief ki Daawat,3,Chini Feriwala,3,chitralekha,6,Chota jadugar,3,Civics,32,Claim Kahani,2,Countries,10,Dairy Lekhan,1,Daroga Amichand,2,Demography,10,deshbhkati poem,3,Dharmaveer Bharti,10,Dharmveer Bharti,1,Diary Lekhan,7,Do Bailon ki Katha,1,Dushyant Kumar,1,Economics,29,education,1,Eidgah Kahani,5,essay,736,Essay on Animals,3,festival poems,4,French Essays,1,funny hindi poem,1,funny hindi story,3,Gaban,12,Geography,44,German essays,1,Godan,8,grammar,19,gujarati,30,Gujarati Nibandh,214,gujarati patra,20,Guliki Banno,3,Gulli Danda Kahani,1,Haar ki Jeet,2,Harishankar Parsai,2,harm,1,hindi grammar,14,hindi motivational story,2,hindi poem for kids,3,hindi poems,54,hindi rhyms,3,hindi short poems,8,hindi stories with moral,15,History,42,Information,890,Jagdish Chandra Mathur,1,Jahirat Lekhan,1,jainendra Kumar,2,jatak story,1,Jayshankar Prasad,6,Jeep par Sawar Illian,3,jivan parichay,147,Kafan,8,Kahani,24,Kamleshwar,8,kannada,98,Kashinath Singh,2,Kathavastu,33,kavita in hindi,41,Kedarnath Agrawal,1,Khoyi Hui Dishayen,3,kriya,1,Kya Pooja Kya Archan Re Kavita,1,long essay,426,Madhur madhur mere deepak jal,1,Mahadevi Varma,7,Mahanagar Ki Maithili,1,Mahashudra,1,Main Haar Gayi,2,Maithilisharan Gupt,1,Majboori Kahani,3,malayalam,139,malayalam essay,112,malayalam letter,10,malayalam speech,36,malayalam words,1,Management,1,Mannu Bhandari,7,Marathi Kathapurti Lekhan,3,Marathi Nibandh,261,Marathi Patra,25,Marathi Samvad,13,marathi vritant lekhan,3,Mohan Rakesh,2,Mohandas Naimishrai,1,Monuments,1,MOTHERS DAY POEM,22,Muhavare,138,Nagarjuna,1,Names,2,Narendra Sharma,1,Nasha Kahani,6,NCERT,27,Neeli Jheel,2,nibandh,740,nursery rhymes,10,odia essay,60,odia letters,86,Panch Parmeshwar,10,panchtantra,26,Parinde Kahani,1,Paryayvachi Shabd,229,patra,145,Physics,2,Poos ki Raat,9,Portuguese Essays,1,pratyay,186,Premchand,65,Punjab,28,Punjabi Essays,72,Punjabi Letters,13,Punjabi Poems,9,Raja Nirbansiya,4,Rajendra yadav,3,Rakh Kahani,2,Ramesh Bakshi,1,Ramvriksh Benipuri,1,Rani Ma ka Chabutra,1,ras,1,Roj Kahani,2,Russian Essays,1,Sadgati Kahani,1,samvad lekhan,163,Samvad yojna,1,Samvidhanvad,1,sangya,1,Sanjeev,2,sanskrit biography,4,Sanskrit Dialogue Writing,5,sanskrit essay,263,sanskrit grammar,157,sanskrit patra,26,Sanskrit Poem,3,sanskrit story,2,Sanskrit words,26,Sara Akash Upanyas,7,Saransh,61,sarvnam,1,Savitri Number 2,2,Shankar Puntambekar,1,Sharad Joshi,3,Sharandata,1,Shatranj Ke Khiladi,1,short essay,66,slogan,3,sociology,8,Solutions,3,spanish essays,1,speech,6,Striling-Pulling,25,Subhadra Kumari Chauhan,1,Subhan Khan,1,Sudarshan,2,Sudha Arora,1,Sukh Kahani,2,suktiparak nibandh,20,Suryakant Tripathi Nirala,1,Swarg aur Prithvi,3,tamil,16,Tasveer Kahani,1,telugu,66,Telugu Stories,65,uddeshya,14,upsarg,67,UPSC Essays,100,Usne Kaha Tha,2,Vinod Rastogi,1,Vipathga,2,visheshan,2,Wahi ki Wahi Baat,1,Wangchoo,2,words,44,Yahi Sach Hai kahani,2,Yashpal,5,Yoddha Kahani,2,Zaheer Qureshi,1,कहानी लेखन,17,कहानी सारांश,56,तेनालीराम,4,नाटक,51,मेरी माँ,7,लोककथा,15,शिकायती पत्र,1,हजारी प्रसाद द्विवेदी जी,9,हिंदी कहानी,110,
    ltr
    item
    HindiVyakran: भारतीय राजनीति में दबाव समूह के प्रभाव की विवेचना कीजिए
    भारतीय राजनीति में दबाव समूह के प्रभाव की विवेचना कीजिए
    भारतीय राजनीति में दबाव समूह के प्रभाव की विवेचना कीजिए - भारत में दबाव समूहों का निर्माण स्वतन्त्रता प्राप्ति से पूर्व ही आरम्भ हो चुका था। भारतीय रा
    HindiVyakran
    https://www.hindivyakran.com/2022/03/bhartiya-rajniti-mein-dawab-samooh.html
    https://www.hindivyakran.com/
    https://www.hindivyakran.com/
    https://www.hindivyakran.com/2022/03/bhartiya-rajniti-mein-dawab-samooh.html
    true
    736603553334411621
    UTF-8
    Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content