Friday, 24 December 2021

कांग्रेस सच्चे अर्थों में राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व करती थी, स्पष्ट कीजिये।

कांग्रेस सच्चे अर्थों में राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व करती थी, स्पष्ट कीजिये।

इस लेख में जानिए किस प्रकार कांग्रेस ने भारतियों की राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व किया तथा स्वतंत्रता आंदोलन में एक राष्ट्रीय दल की भूमिका निभाई।

कांग्रेस : राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना एक अखिल भारतीय स्तर के राजनीतिक संगठन के रूप में सन् 1885 ई. में की गयी थी। इस संगठन का उद्देश्य जाति, धर्म या वर्ण इत्यादि भेदभावों से परे उठकर समस्त भारतवासियों का प्रतिनिधित्व करना था। इसका राष्ट्रीय स्वरूप इसी बात से प्रमाणित हो जाता है कि इसके प्रथम अध्यक्ष 'व्योमेश चन्द्र बनर्जी' ईसाई थे। तत्पश्चात् द्वितीय अध्यक्ष दादाभाई नौरोजी पारसी थे तो वहीं अगले अध्यक्ष बदरुद्दीन तैय्यव जी मुसलमान थे। इस प्रकार स्पष्ट रूप से कांग्रेस एक राष्ट्रीय संगठन थी और यह सच्चे अर्थों में राष्ट्रीयता का प्रतिनिधित्व करती थी। यद्यपि कांग्रेस में हिन्दुओं की संख्या अधिक थी परन्तु इसका प्रमुख कारण भारत में हिन्दुओं की आबादी सर्वाधिक होना ही था। कांग्रेस में सदैव मुस्लिमों सहित भारत के सभी वर्गों को आनुपातिक रूप से समान प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया। इस सन्दर्भ में 1931 ई. में द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गाँधी द्वारा दिया गया वक्तव्य विशेष रूप से उल्लेखनीय है. जिसमें उन्होने कहा था कि. "कांग्रेस सच्चे अर्थों में राष्ट्रीय संगठन है। यह किसी विशेष जाति, धर्म, वर्ग या हितों का प्रतिनिधित्व नहीं करती है। यह समस्त भारतीय हितों और सभी वर्गों का प्रतिनिधि होने का दावा करती है।"

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