भारत में दलितों की समस्याओं के हल हेतु सुझाव दीजिये।

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भारत में दलितों की समस्याओं के हल हेतु सुझाव दीजिये।

दलितों की समस्याओं के हल हेतु सुझाव - यद्यपि केन्द्रीय सरकार, राज्य सरकारों, अखिल भारतीय हरिजन सेवक संघ, आर्य समाज, राम कृष्ण मिशन, रेडक्रास आदि ने दलितों के उद्धार के लिय भरसक प्रयत्व किये हैं, तथापि यह दूषित प्रथा आज भी कछ सीमा तक प्रचलित है। अतः अभी भी इनका सामाजिक उत्थान ठीक तरह से नहीं हो पाया है। इसका मुख्य कारण दलित लोगों की आर्थिक हीनता है। धनाभाव के कारण ये लोग शिक्षा भी ग्रहण नहीं कर पाते हैं।। वास्तविक रूप में यदि अस्पृश्यता का दूर करना है तो केवल सरकारी प्रयास ही काफी नहीं हैं। अपित इसके निवारण के लिये जनता तैयार नहीं है। दलितों की समस्याओं के समाधान के लिये कुछ प्रभावशाली सुझाव / उपाय निम्न प्रकार हैं -

दलितों की समस्याओं के हल हेतु सुझाव / उपाय

  • 21 सूत्रीय दलित एजेण्डे (भोपाल घोषणा पत्र) को लागू किया जाना चाहिये।
  • दलितों की आर्थिक दशा में सुधार किया जाना चाहिए ताकि इनका जीवन ऊँचा उठ सके तथा इसकी बहुत सी निर्योग्यातएँ दूर हो सकें।
  • अनुसूचित जातियों के लिए पृथक् विद्यालय नहीं खोले जाने चाहिए।
  • धार्मिक तथा राजनीतिक अवसरों पर भी दलित जातियों के सदस्यों को सम्मिलित होने का समान अवसर मिलना चाहिए।
  • अस्पृश्यता निवारण के लिये चलचित्रों, नाटकों गीतों आदि द्वारा जनमत तैयार किया जाना चाहिए ताकि साधारण जनता अस्पृश्यता के दूषित परिणामों को जान सके। शिक्षा द्वारा भी इसकी समाप्ति के पक्ष में जनमत तैयार किया जाना चाहिये।
  • केन्द्रीय सरकार एवं अन्य सरकारों को अन्तर-जातीय विवाहों को प्रोत्साहन देना चाहिए।
  • इन लोगों की बस्तियाँ साधारण बस्तियों में ही होनी चाहिये जिससे भेदभाव की प्रवृत्ति में कुछ कमी हो सके।
  • सरकार द्वारा इन अनुसूचित जातियों के लोगों को आवश्यक सामाजिक सुरक्षा प्रदान की जानी चाहिए।
  • स्वस्थ मनोरंजन के द्वारा इनके नैतिक स्तर को ऊँचा उठाने का भरसक प्रयत्न किया जाना चाहिए।
  • जो घृणा वाले पेशे हैं उनमें कुछ सुधार होना जरूरी है।
  • अस्पृश्यता जाति व्यवस्था का ही अभिशाप है। अतः जाति व्यवस्था को यदि समाप्त कर दिया जाए तो अस्पृश्यता भी अपने आप समाप्त हो जायेगी। प्रचार तथा शिक्षा द्वारा जाति व्यवस्था को समाप्त करने के प्रयास किए जाने चाहिये।
  • अछुतों की दशा सुधारने के लिए ग्रामों में प्रौढ़ शिक्षा का स्तर ऊँचा उठाने का प्रयत्न किया जाना चाहिये।
  • इन लोगों का शोषण समाप्त होना चाहिये तथा इनके कार्य के बदले उचित वेतन देने सम्बन्धी नियम बनाए जाने चाहिये।
  • सभी जातियों के बच्चों को एक साथ रहने के लिये प्रोत्साहन दिया जाना चाहिए जिससे वे भविष्य में भी एक साथ रह सकें।

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