Wednesday, 16 February 2022

परंपरागत और आधुनिक राजनीति में अंतर स्पष्ट कीजिए।

परंपरागत और आधुनिक राजनीति में अंतर स्पष्ट कीजिए।

परंपरागत और आधुनिक राजनीति में अंतर

परंपरागत व आधुनिक तुलनात्मक राजनीतिक दृष्टिकोण दोनों में कुछ मौलिक अंतर ऐसे हैं जिनके कारण तुलनात्मक राजनीति का परम्परागत परिपेक्ष्य व आधुनिक से अलग हो जाता है यह अंतर निम्नलिखित आधारों पर स्पष्ट किया जा सकता है

1.अध्ययन क्षेत्र के आधार पर - परंपरागत तुलनात्मक राजनीति का अध्ययन क्षेत्र आधुनिक तुलनात्मक राजनीति से अलग है। परम्परागत में केवल पाश्चात्य राजनीतिक व्यवस्थाओं का ही अध्ययन किया जाता है जबकि आधुनिक राजनीति में सम्पूर्ण विश्व की सम्प्रमुख व्यवस्थाओं का अध्ययन सम्मिलित किया जाता है। परम्परागत में पहले केवल लोकतान्त्रिक व्यवस्थाओं का अध्ययन किया जाता था परन्तु जर्मनी व इटली में अधिनायकवाद व रूस में साम्यवाद के उदय से इनको भी अध्ययन में सम्मिलित किया जाने लगा। आधुनिक तुलनात्मक राजनीति का विषय क्षेत्र कुछ बेहतर है इसमें सम्पूर्ण विश्व की व प्रमुखता राज्यों की राजनीतिक व्यवस्थाओं का भी अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार दोनों में अध्ययन क्षेत्र के आधार पर अन्तर पाया जाता है।

2.अध्ययन के दृष्टिकोण का आधार - परम्परागत तुलनात्मक राजनीति व आधुनिक राजनीति में मौलिक अंतर दृष्टिकोण का है। परम्परागत का अध्ययन क्षेत्र औपचारिक कानूनी व संस्थागत है जबकि आधुनिक तुलनात्मक राजनीति में यह सम्मिलित तो है परन्तु इसके साथ ही साथ उन राजनीतिक व्यवहारों का भी अध्ययन सम्मिलित होता है। इसके साथ ही साथ उन औपचारिक व अनौपचारिक दोनों पहलुओं का अध्ययन किया है।

3. अध्ययन उद्देश्य के आधार पर - परम्परागत तुलनात्मक राजनीतिक अध्ययन सरकारों व संस्थाओं की व्याख्या तक ही सीमित रहे, इसमें विचित्र राजनीतिक व्यवहार की प्रकृति को समझने के लिए इनकी व्याख्या ही काफी समझी गई, लेकिन आधुनिक तुलनात्मक राजनीतिक अध्ययनों का तो प्रमुख ध्येय ही समस्याओं के समाधान का रहा है इस प्रकार एक मुख्यतया समस्या-समाधानात्मक अध्ययन है।

4. विश्लेषण पद्धति के आधार पर अन्तर - इन दोनों में विश्लेषण पद्धति का भी विशेष अंतर पाया जाता है परम्परागत तुलनात्मक राजनीति का शासन व्यवस्थाओं व सरकारों के केवल विवेचन मात्र से सम्बन्ध था। इसमें संविधान द्वारा स्थापित शासन तन्त्र का औपचारिक वर्णन मात्र किया जाता है। आधुनिक तुलनात्मक राजनीतिक अध्ययन विवेचन मात्र तक सीमित नहीं रहे। यह विश्लेषणात्मक है इसमें व्याख्या ही काफी समझी गई पर आधुनिक तुलनात्मक राजनीतिक अध्ययनों का प्रमख ध्येय ही समस्याओं के समझने के लिए किया जाता है।

उपर्युक्त विवेचना द्वारा यह स्पष्ट है कि तुलनात्मक राजनीति के परम्परागत व आधुनिक सुनिश्चित आधार पर अलग-अलग नहीं होने पर भी दोनों में काफी अन्तर है। 


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