Monday, 17 January 2022

विधानसभा अध्यक्ष के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए।

विधानसभा अध्यक्ष के कार्य एवं शक्तियों का वर्णन कीजिए।

विधानसभा अध्यक्ष के कार्य

विधानसभा अध्यक्ष के प्रमुख कार्य निम्नलिखित हैं:-

  1. विधानसभा अध्यक्ष सदन में शान्ति व्यवस्था बनाये रखता है तथा इसके लिए उसे समस्त आवश्यक कार्यवाही करने का अधिकार है।
  2. विधानसभा अध्यक्ष विधानसभा की बैठकों की अध्यक्षता करता है और सदन की कार्यवाही का संचालन करता
  3. विधानसभा अध्यक्ष सदन की कार्यवाही से ऐसे शब्दों को निकाले जाने का आदेश दे सकता है जो संसदीय अथया अशिष्ट हैं।
  4. विधानसभा अध्यक्ष सदन के नेता के परामर्श से सदन की कार्यवाही का क्रम निश्चित कर सकता है।
  5. विधानसभा अध्यक्ष प्रश्नों को स्वीकार करता है अथवा नियम के विरुद्ध होने पर उन्हें अस्वीकार करता है।
  6. विधानसभा अध्यक्ष किसी प्रश्न पर मतदान कराता है और परिणाम की घोषणा करता है।
  7. वह निर्णय भी करता है कि कोई विधेयक धन विधेयक है या नहीं।
  8. वह सदन के सदस्यों के अधिकारों की रक्षा करता है।
  9. वह विधानसभा में होने वाली बैठकों की अध्यक्षता करता है।
  10. सदन का संचालन करना।
  11. विधानसभा में विधेयकों को प्रस्तुत करने की अनुमति देना।
  12. विधेयकों पर बहस का समय निश्चित करना तथा सदस्यों का बोलने का क्रम एवं समय सीमा निर्धारित करना।
  13. सदन में अनुशासन को बनाये रखना।
  14. विधानसभा अध्यक्ष ही संयुक्त अधिवेशन की अध्यक्षता करता है। 
  15. विधानसभा में विधेयकों पर मतदान करवाता है।
  16. किसी भी विधेयक के पास करने का अन्तिम निर्णय अध्यक्ष का ही होता है उसे चुनौती नहीं दी जा सकती।
  17. किसी भी विधेयक पर पक्ष एवं विपक्ष में बराबर मत पड़ने की स्थिति में अध्यक्ष को निर्णायक मत देने की शक्ति प्राप्त है।
  18. वह सदन के सदस्यों के विशेष अधिकारों की भी रक्षा करता है। किसी के द्वारा भी इसका उल्लंघन करने की स्थिति में वह उसकों दण्ड दे सकता है।

विधानसभा अध्यक्ष की शक्तियाँ 

विधानसभा अध्यक्ष की मुख्य शक्तियाँ निम्नवत हैं -

  1. विधानसभा की बैठकों का संचालन करता है और वह सदन में शांति एवं और व्यवस्था बनाये रखता है।
  2. सदन में उपस्थित किये गये प्रत्येक प्रश्न का निर्णय उपस्थित तथा मतदान में भाग लेने वाले सदस्यों के बहुमत द्वारा किया जाता है पर 'टाई पड़ने अर्थात दोनों के मत समान होने पर अध्यक्ष को अपना निर्णायक मत देने का अधिकार होता है।
  3. सदन के नेता के परामर्श के बाद वह सदन की कार्यवाही का क्रम निर्धारित करता है।
  4. यदि विधानसभा के अधिवेशन में किसी समय गणपूर्ति नहीं है तो अध्यक्ष को यह अधिकार प्राप्त है की वह अधिवेशन को तब तक के लिये निलंबित कर दे जब तकं गणपूर्ति नहीं हो जाती है।

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