छुट्टियों का सदुपयोग पर निबंध |Essay on Utilization of Holidays in Hindi

छुट्टियों का सदुपयोग पर निबंध। Essay on Utilization of Holidays in Hindi : संसार में ऐसा कोई व्यवसाय नहीं जिसमें कुछ-न-कुछ अवकाश का समय न हो, किसी व्यवसाय में अधिक छट्टियाँ होती हैं और किसी में कम, परन्तु होती अवश्य हैं। रेलवे तथा पोस्ट ऑफिस, आदि में कुछ कम छट्टियाँ होते हैं परन्तु स्कूल-कॉलेजों में अन्य विभागों की अपेक्षा कुछ अधिक छट्टियाँ होती हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि अध्यापक और विद्यार्थी दोनों ही मानसिक श्रम अधिक करते हैं। शारीरिक श्रम की अपेक्षा मानसिक श्रम मनुष्य को अधिक थका देता है। शारीरिक श्रम से केवल शरीर ही थकता है, परन्तु मानसिक श्रम से शरीर और मस्तिष्क दोनों ही प्रभावित होते हैं। इसलिए विद्यार्थी और अध्यापक को विशेष विश्राम की आवश्यकता होती है। विद्यार्थी बड़ी उत्सुकता से छुट्टियों की प्रतीक्षा करते हैं।

छुट्टियों का सदुपयोग पर निबंध। Essay on Utilization of Holidays in Hindi

जीवन की एकरसता जीवन को नीरस बना देती हैं, न उसमें आनन्द रहता है और न आकर्षण। नित्य प्रति एक से व्यवहार से, एक से कार्यक्रमों से व्यक्ति ऊब जाता है, मन उचटने लगता है। जीवन आकर्षणहीन होकर यांत्रिक मशीन की तरह चलता रहता है, उसके रक्ततन्तु शिथिल पड़ जाते हैं। जीवन और जगत् के प्रति मानसिक उल्लास व उत्साह समाप्त-सा हो जाता है। उसे सुन्दरता में भी कुरूपता दृष्टिगोचर होने लगती है। दैनिक कार्यों के अतिरिक्त उसकी कार्यक्षमता समाप्त-सी हो जाती है। इसलिए मानव जीवन में समय-समय पर विश्राम और विनोद के लिए कुछ अवकाश के अवसर आवश्यक हो जाते हैं, दैनिक जीवन के वातावरण में परिवर्तन की आवश्यकता होती है क्योंकि संसार में परिवर्तन का दूसरा नाम जीवन है।

संसार में ऐसा कोई व्यवसाय नहीं जिसमें कुछ-न-कुछ अवकाश का समय न हो, किसी व्यवसाय में अधिक छट्टियाँ होती हैं और किसी में कम, परन्तु होती अवश्य हैं। रेलवे तथा पोस्ट ऑफिस, आदि में कुछ कम छट्टियाँ होते हैं परन्तु स्कूल-कॉलेजों में अन्य विभागों की अपेक्षा कुछ अधिक छट्टियाँ होती हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि अध्यापक और विद्यार्थी दोनों ही मानसिक श्रम अधिक करते हैं। शारीरिक श्रम की अपेक्षा मानसिक श्रम मनुष्य को अधिक थका देता है। शारीरिक श्रम से केवल शरीर ही थकता है, परन्तु मानसिक श्रम से शरीर और मस्तिष्क दोनों ही प्रभावित होते हैं। इसलिए विद्यार्थी और अध्यापक को विशेष विश्राम की आवश्यकता होती है। विद्यार्थी बड़ी उत्सुकता से छुट्टियों की प्रतीक्षा करते हैं। चपरासी के हाथ में आर्डर बुक देखते ही क्लास के छात्र अध्यापक से पूछ बैठते हैं, “क्या मास्टर साहब कल की छुट्टी है इस प्रकार पूछते हुए उनके मुख पर प्रसन्नता नाच उठती है। 

ग्रीष्म काल की भयंकरता तथा विद्यार्थियों के स्वास्थ्य को दृष्टि में रखकर मई और जून में कॉलिज बन्द हो जाते हैं। इसका कारण यह भी है कि विद्यार्थी पूरे वर्ष पढ़ने में परिश्रम करता है। मार्च और अप्रैल के महीनों में वह अपने परिश्रम की परीक्षा देता है । इसके पश्चात उसे पूर्ण विश्राम के लिये कुछ समय चाहिये। इन्हीं सब कारणों से हमारे छोटे और बड़े स्कूल 40 दिन के लिये बन्द हो जाते हैं। हमें इन लम्बी छुट्टियों को व्यर्थ में नहीं गंवा देना चाहिये। कुछ छात्र इन लम्बी छुट्टियों का समुचित उपयोग नहीं करते, वे केवल खेल-कूद में सारा समय बिता देते हैं। बहुत थोड़े छात्र ऐसे होते हैं, जो अपना अवकाश का समय संतुलित और समान रूप से विभक्त करके उसका सदुपयोग करते हैं। कुछ दिन भर सोते ही सोते बिता देते हैं, कुछ दिन भर गप्प में, कुछ आपस के झगड़ों में और कुछ दुव्र्यसनों में फंसकर अपने अवकाश के अमुल्य समय को नष्ट कर देते हैं। अन्त में माता-पिता कहने लगते हैं कि हे भगवान इनकी छुट्टियाँ कब खत्म होंगी।

अवकाश के दिनों में विश्राम और विनोद आवश्यक है, परन्त मनोविनोद भी ऐसे होने चाहियें जिनसे हमारा कुछ लाभ हो। पढ़े-लिखे व्यक्तियों का मनोरंजन करने वाली वस्तुओं में पुस्तक का स्थान सर्वप्रथम है। पुस्तकों जैसा साथी संसार में कोई नहीं हो सकता, चाहे धूप हो या वर्षा, ग्रीष्म हो या शीत वे हर समय आपको संगति दे सकती हैं, आपका मनोविनोद कर सकती हैं। यह साथी एक ऐसा साथी है, जो मस्तिष्क के साथ-साथ हृदय की भी क्षुधा शान्त करता है। यह साथी हमें अतीत की मधुर स्मृतियों की याद दिलाता हुआ, वर्तमान के दर्शन कराता हुआ। भविष्य की ओर अग्रसर करता है। यह साथी आपको अनेक आनन्द दे सकता है, इससे आपकी न कभी लड़ाई हो सकती है न झगड़ा। यदि आप चाहें तो घर बैठे ही बैठे देश-देशान्तर के भ्रमण का आनन्द ले सकते हैं। यह साथी आपको ज्ञान की शिक्षा दे सकता है, दुःख में धैर्य और संयम भी सिखा देता है। शिक्षाप्रद उपन्यास और कविताओं के अध्ययन से मन ही मन मानव के व्यक्तित्व का विकास भी होता है। परन्तु साथी का चुनाव अपनी योग्यता और विचारों के अनुसार होना चाहिये। इतना ध्यान रखना चाहिये कि वह साहित्य सत्साहित्य हो, ऐसा न हो कि वह आपको पतन की ओर अग्रसर करने में सहायक सिद्ध हो जाये। पुस्तकों के अतिरिक्त इन लम्बी-लम्बी छुट्टियों में विद्यार्थियों के लिए बहुत से हितकर कार्य हैं जैसे बागवानी। यह हमारे स्थायी मनोरंजन का साधन है। फोटोग्राफी भी मनोरंजन और समय-यापन का अच्छा साधन है। प्रकृति के रमणीय दृश्यों का चित्र लेकर आप अपना मनोरंजन कर सकते हैं, अपने मित्रों, सम्बन्धियों, मुहल्ले वालों का चित्र लेकर तथा उन्हें वे चित्र उपहारस्वरूप भेंट करके आप उनके स्नेह-भाजन बन सकते है। यदि हम अपने अवकाश के समय को समाज सेवा में व्यतीत करें तो हमारी भी उन्नति होगी और देश एवं जाति का उत्थान भी। अशिक्षित को शिक्षा व शिक्षा का महत्त्व बतायें, स्वयं भी अपने गाँव, अपने मुहल्ले, अपने घर की सफाई में अपना समय व्यतीत करें। अपने-अपने गाँव तथा मुहल्ले में पुस्तकालय, वाचनालय, व्यायामशालायें तथा नाट्य परिषदों की स्थापना करके अपने ग्रीष्मावकाश को सफलतापूर्वक व्यतीत कर सकते हैं। कवि गोष्ठी तथा सांस्कृतिक सभायें भी समय के सदुपयोग के लिए उपयुक्त हैं। अधिक परिश्रम करने के कारण विद्यार्थियों का स्वास्थ्य भी खराब हो जाता है, उन्हें ग्रीष्मावकाश में अपने स्वास्थ्य के सुधार के लिये भी आवश्यक प्रयत्न करने चाहिये।

ग्रीष्मावकाश के सदुपयोग के और भी साधन हैं, परन्तु वे धनसाध्य हैं। इन छुट्टियों में विद्यार्थियों को नये-नये ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थानों का भ्रमण करना चाहिये। देशाटन से मनोरंजन के साथ-साथ शिक्षा भी प्राप्त होती है। इससे विद्यार्थी नवीन भाषा, नये रीति-रिवाज, नई वेशभूषा से परिचित होते हैं। इनसे हमारे मानसिक क्षितिज का विकास होता है। गगनचुम्बी पर्वत-मालायें, सघन बुन, हरी-भरी घाटियाँ हमारे जीवन को सरसता प्रदान करती हैं। प्रकृति के सम्पर्क में आने से हमारा मन प्रसन्न हो जाता है और खिन्नता दूर हो जाती है। तीर्थस्थानों में भ्रमण करने से हमारे हृदय में धार्मिक भावनायें जाग्रत हो जाती हैं। घर से बाहर निकलने से हमें स्वावलम्बी बनने का अभ्यास होता है, व्यावहारिक ज्ञान की वृद्धि होती है। इससे शीलता तथा कष्ट सहन करने की क्षमता आती है। 

इन सबके साथ-साथ हमें यह भी ध्यान रखना चाहिये कि पिछले वर्ष हमारे कौन-से विषय कमजोर थे, जिनमें हमें दूसरों का सहारा लेना पड़ता था। उन विषयों की कमजोरी को अपने बदिमान मित्रों के सहयोग से या अध्यापकों से मिलकर दूर कर लेना चाहिये, या आगामी वर्ष में पढाई जाने वाली पुस्तकों का थोड़ा पूर्व ज्ञान कर लेना चाहिये, इससे विद्यार्थी को आगे के अध्ययन में सरलता हो जाती है। अध्यापकों ने जो काम छुट्टी में करने को दिया हो उसे पूरा करना चाहिये। एक विद्वान् की उक्ति है कि- 

“काव्यशास्त्रविनोदेन कालो गच्छति धीमताम् ।
व्यसनेन च मूर्खणाम निद्रया कलहेन वा ।।"

बुद्धिमान विद्यार्थियों के अवकाश का समय भी पुसत्कानन्द में ही व्यतीत होता है। ज्ञान दो प्रकार का होता है—एक स्वावलम्बी और दूसरा परावलम्बी। परावलम्बी ज्ञान हमें गुरुजनों से एवं अच्छी पुस्तकें पढ़ने से प्राप्त होता है। हम लोग अपने-अपने विद्यालय में उसे प्राप्त करते हैं। परन्तु स्वावलम्बी ज्ञान हमें स्वयं अपने द्वारा ही प्राप्त होता है और उसके अर्जन के लिए उचित समय विद्यार्थी के अवकाश के क्षण हैं, चाहे वह ग्रीष्मावकाश हो और चाहे वह दशहरावकाश हो। उसमें वह स्वावलम्बी ज्ञान को अधिक मात्रा में प्राप्त करके अपने लम्बे अवकाश को सफल बना सकता है।

अवकाश के समय विशेष रूप से सावधान रहने की आवश्यकता है कि विद्यार्थी भूलकर भी कुसंगति में न पड़े। भले और विद्वान् व्यक्तियों की संगत में रहने का प्रयास करे क्योंकि

"कबीरा संगत साधु की ज्यों गंधी की वास।
जो कछु गंधी दे नहीं तो भी वास सुबास ।।" 

संसार में सबसे अधिक मूल्यवान वस्तु समय है, प्रत्येक व्यक्ति को समय का महत्त्व समझना चाहिये, “समय चूकि पुनि का पछताने" जब समय बीत जाता है तब मनुष्य केवल पछताता ही रहता है और फिर उसे कोई लाभ नहीं होता। जो समय का जितना आदर करेगा, समय भी उसका उतना ही आदर करेगा। विशेष रूप से छात्रों को अपना अवकाश कुरुचिपूर्ण बातों में व्यतीत न करके ऐसे सत्कार्यों में व्यतीत करना चाहिये, जिनसे उनमें नैतिक एवं शैक्षणिक भावनाओं का संचार हो और वे सन्मार्गगामी बन सकें।
Similar Essay : 

COMMENTS

Name

10 line essay,281,10 Lines in Gujarati,1,Aapka Bunty,3,Aarti Sangrah,3,Aayog,3,Agyeya,4,Akbar Birbal,1,Antar,97,anuched lekhan,50,article,17,asprishyata,1,Bahu ki Vida,1,Bengali Essays,135,Bengali Letters,20,bengali stories,12,best hindi poem,13,Bhagat ki Gat,2,Bhagwati Charan Varma,3,Bhishma Shahni,6,Bhor ka Tara,1,Biography,141,Biology,67,Boodhi Kaki,1,Buddhapath,2,Chandradhar Sharma Guleri,2,charitra chitran,175,chhand,1,Chief ki Daawat,3,Chini Feriwala,3,chitralekha,6,Chota jadugar,3,Claim Kahani,2,Countries,10,Dairy Lekhan,1,Daroga Amichand,2,Demography,10,deshbhkati poem,3,Dharmaveer Bharti,10,Dharmveer Bharti,1,Diary Lekhan,7,Do Bailon ki Katha,1,Dushyant Kumar,1,Economics,1,Eidgah Kahani,5,essay,731,Essay on Animals,3,festival poems,4,French Essays,1,funny hindi poem,1,funny hindi story,3,Gaban,12,Geography,3,German essays,1,Godan,8,grammar,19,gujarati,30,Gujarati Nibandh,214,gujarati patra,20,Guliki Banno,3,Gulli Danda Kahani,1,Haar ki Jeet,2,Harishankar Parsai,2,harm,1,hindi grammar,11,hindi motivational story,2,hindi poem for kids,3,hindi poems,54,hindi rhyms,3,hindi short poems,8,hindi stories with moral,15,History,32,Information,843,Jagdish Chandra Mathur,1,Jahirat Lekhan,1,jainendra Kumar,2,jatak story,1,Jayshankar Prasad,6,Jeep par Sawar Illian,3,jivan parichay,146,Kafan,8,Kahani,23,Kamleshwar,8,kannada,98,Kashinath Singh,2,Kathavastu,17,kavita in hindi,41,Kedarnath Agrawal,1,Khoyi Hui Dishayen,3,kriya,1,Kya Pooja Kya Archan Re Kavita,1,long essay,426,Madhur madhur mere deepak jal,1,Mahadevi Varma,7,Mahanagar Ki Maithili,1,Mahashudra,1,Main Haar Gayi,2,Maithilisharan Gupt,1,Majboori Kahani,3,malayalam,139,malayalam essay,112,malayalam letter,10,malayalam speech,36,malayalam words,1,Mannu Bhandari,7,Marathi Kathapurti Lekhan,3,Marathi Nibandh,261,Marathi Patra,25,Marathi Samvad,13,marathi vritant lekhan,3,Mohan Rakesh,2,Mohandas Naimishrai,1,Monuments,1,MOTHERS DAY POEM,22,Muhavare,138,Nagarjuna,1,Names,2,Narendra Sharma,1,Nasha Kahani,6,NCERT,26,Neeli Jheel,2,nibandh,731,nursery rhymes,10,odia essay,60,odia letters,86,Panch Parmeshwar,10,panchtantra,26,Parinde Kahani,1,Paryayvachi Shabd,229,patra,142,Poos ki Raat,9,Portuguese Essays,1,pratyay,186,Premchand,65,Punjab,28,Punjabi Essays,72,Punjabi Letters,13,Punjabi Poems,9,Raja Nirbansiya,4,Rajendra yadav,3,Rakh Kahani,2,Ramesh Bakshi,1,Ramvriksh Benipuri,1,Rani Ma ka Chabutra,1,ras,1,Roj Kahani,2,Russian Essays,1,Sadgati Kahani,1,samvad lekhan,155,Samvad yojna,1,Samvidhanvad,1,sangya,1,Sanjeev,2,sanskrit biography,4,Sanskrit Dialogue Writing,5,sanskrit essay,262,sanskrit grammar,157,sanskrit patra,26,Sanskrit Poem,3,sanskrit story,2,Sanskrit words,26,Sara Akash Upanyas,7,Saransh,59,sarvnam,1,Savitri Number 2,2,Shankar Puntambekar,1,Sharad Joshi,3,Sharandata,1,Shatranj Ke Khiladi,1,short essay,66,slogan,3,Solutions,3,spanish essays,1,speech,6,Striling-Pulling,25,Subhadra Kumari Chauhan,1,Subhan Khan,1,Sudarshan,2,Sudha Arora,1,Sukh Kahani,2,suktiparak nibandh,20,Suryakant Tripathi Nirala,1,Swarg aur Prithvi,3,tamil,16,Tasveer Kahani,1,telugu,66,Telugu Stories,65,uddeshya,8,upsarg,67,UPSC Essays,100,Usne Kaha Tha,2,Vinod Rastogi,1,Vipathga,2,visheshan,2,Wahi ki Wahi Baat,1,Wangchoo,2,words,44,Yahi Sach Hai kahani,2,Yashpal,5,Yoddha Kahani,2,Zaheer Qureshi,1,कहानी लेखन,17,कहानी सारांश,56,तेनालीराम,4,नाटक,51,मेरी माँ,7,लोककथा,15,शिकायती पत्र,1,हजारी प्रसाद द्विवेदी जी,9,हिंदी कहानी,110,
ltr
item
HindiVyakran: छुट्टियों का सदुपयोग पर निबंध |Essay on Utilization of Holidays in Hindi
छुट्टियों का सदुपयोग पर निबंध |Essay on Utilization of Holidays in Hindi
छुट्टियों का सदुपयोग पर निबंध। Essay on Utilization of Holidays in Hindi : संसार में ऐसा कोई व्यवसाय नहीं जिसमें कुछ-न-कुछ अवकाश का समय न हो, किसी व्यवसाय में अधिक छट्टियाँ होती हैं और किसी में कम, परन्तु होती अवश्य हैं। रेलवे तथा पोस्ट ऑफिस, आदि में कुछ कम छट्टियाँ होते हैं परन्तु स्कूल-कॉलेजों में अन्य विभागों की अपेक्षा कुछ अधिक छट्टियाँ होती हैं। इसका मुख्य कारण यही है कि अध्यापक और विद्यार्थी दोनों ही मानसिक श्रम अधिक करते हैं। शारीरिक श्रम की अपेक्षा मानसिक श्रम मनुष्य को अधिक थका देता है। शारीरिक श्रम से केवल शरीर ही थकता है, परन्तु मानसिक श्रम से शरीर और मस्तिष्क दोनों ही प्रभावित होते हैं। इसलिए विद्यार्थी और अध्यापक को विशेष विश्राम की आवश्यकता होती है। विद्यार्थी बड़ी उत्सुकता से छुट्टियों की प्रतीक्षा करते हैं।
HindiVyakran
https://www.hindivyakran.com/2019/03/essay-on-utilization-of-holidays-in-hindi.html
https://www.hindivyakran.com/
https://www.hindivyakran.com/
https://www.hindivyakran.com/2019/03/essay-on-utilization-of-holidays-in-hindi.html
true
736603553334411621
UTF-8
Loaded All Posts Not found any posts VIEW ALL Readmore Reply Cancel reply Delete By Home PAGES POSTS View All RECOMMENDED FOR YOU LABEL ARCHIVE SEARCH ALL POSTS Not found any post match with your request Back Home Sunday Monday Tuesday Wednesday Thursday Friday Saturday Sun Mon Tue Wed Thu Fri Sat January February March April May June July August September October November December Jan Feb Mar Apr May Jun Jul Aug Sep Oct Nov Dec just now 1 minute ago $$1$$ minutes ago 1 hour ago $$1$$ hours ago Yesterday $$1$$ days ago $$1$$ weeks ago more than 5 weeks ago Followers Follow THIS PREMIUM CONTENT IS LOCKED STEP 1: Share to a social network STEP 2: Click the link on your social network Copy All Code Select All Code All codes were copied to your clipboard Can not copy the codes / texts, please press [CTRL]+[C] (or CMD+C with Mac) to copy Table of Content