Friday, 11 January 2019

सोना का चरित्र-चित्रण - दीपदान एकांकी

सोना का चरित्र-चित्रण - दीपदान एकांकी

सोना दीपदान एकांकी की दूसरी प्रमुख पात्र है। उसकी प्रमुख चारित्रिक विशेषताएँ निम्नवत् हैं–
अत्यंत सुंदर : सोना रावल सरूपसिंह की अत्यंत रूपवती लड़की है। उसकी आयु 16 वर्ष है। वह कुंवर उदयसिंह के साथ खेलती है तथा आयु में उससे दो वर्ष बड़ी है।

वाक्पटु एवं शिष्टाचारी : सोना बोलने में निपुण व राजमहल के शिष्टाचार से परिचित है। उसके शिष्टाचार व वाकपटुता का उस समय पता चलता है जब वह महल में कुंवर उदय सिंह को दीपदान उत्सव के लिए लेने आती है। महल में प्रवेश कर वह पन्ना धाय को प्रणाम करती है और उनसे उदयसिंह के विषय में पूछती है। पन्ना के कहने पर-,‘‘ वे थक गए हैं। सोना चाहते हैं।’’ तब वह प्रत्युत्तर देती है, ‘‘सोना चाहते हैं! तो मैं भी तो सोना हूँ।’’

सरल स्वभाव : सोना स्वभाव से सरल है। वह राजमहल में होने वाले षड्यंत्रों से अनभिज्ञ है। पन्ना के सम्मुख नृत्य की बात करना, बनवीर द्वारा कही गई बातों को खेल-खेल में पन्ना को बता देना, मयूरपक्ष कुंड उत्सव की बातों का वर्णन करना उसके सरल स्वभाल के ही प्रमाण हैं।

अस्थिर : सोना स्वयं को स्थिर नहीं रख पाती। वह भ्रमित-सी दिखाई पड़ती है, क्योंकि वह एक ओर कुंवर उदयसिंह से प्रेम करती है और दूसरी ओर बनवीर के प्रलोभन में आ जाती है।
इस प्रकार निष्कर्ष रूप में कहा जा सकता है कि सोना में अल्हड़ कन्या की समस्त विशेषताएँ हैं।


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