हाथ कंगन को आरसी क्या मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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हाथ कंगन को आरसी क्या मुहावरे का अर्थ

हाथ कंगन को आरसी क्या मुहावरे का अर्थ है– प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती; यथार्थ को साबित करने की जरुरत नहीं होती।

हाथ कंगन को आरसी क्या मुहावरे का वाक्य प्रयोग

वाक्य प्रयोग- क्या कह रहे हो, दस पुस्तकें लाए हो; सामने ही तो हैं गिन क्यों नहीं लेते ! हाथ कंगन को आरसी क्या।

वाक्य प्रयोग- उसने अपनी विद्वता से सबको प्रभावित कर लिया। उसकी विद्वता के सभी कायल हो गए। सच ही कहा है, 'हाथ कंगन को आरसी क्या'? 

वाक्य प्रयोग- भारत की ब्रम्होस मिसाइल की मारक क्षमता पर बहुत से लोगों को संदेह था किन्तु डिफेन्स एक्सपो के दौरान लोगों के समक्ष हुए प्रक्षेपण ने उनके संदेह को समाप्त कर दिया। सत्य ही कहा गया है हाथ कंगन को आरसी क्या।

वाक्य प्रयोग- विवेकानन्द ने अपनी विद्वता से सबको प्रभावित कर लिया। शिकागो सम्मेलन के दौरान सभी अमेरिकी भी उनकी विद्वता के कायल हो गये। सच ही कहा है 'हांथ कंगन को आरसी क्या '।

वाक्य प्रयोग- पाकिस्तान सदैव विश्व पटल पर आतंकवादी गतिविधयों में संलिप्तता से इन्कार करता रहता है किन्तु संसद भवन पर हमले के दौरान प्राप्त साक्ष्य पाकिस्तान की संलिप्तता को प्रामाणित करते हैं। सत्य ही कहा गया है 'हाथ कंगन को आरसी क्या'।

हाथ कंगन को आरसी क्या एक प्रसिद्ध हिन्दी मुहावरा/लोकोक्ति है जिसका का अर्थ है– प्रत्यक्ष को प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती; यथार्थ को साबित करने की जरुरत नहीं होती। मान लीजिये यदि कोई बात पहले से ही स्थापित हो या हमारी आँखों के सामने प्रत्यक्ष हो तो इस मुहावरे का प्रयोग करते हैं। 

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