नगरीयता एवं नगरीकरण में अंतर - Nagarikaran evam Nagariyata mein Antar

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नगरीयता एवं नगरीकरण में अंतर - Nagarikaran evam Nagariyata mein Antar

नगरीयता एवं नगरीकरण के सम्बन्ध में यदि बात की जाए तो प्रायः नगरीयता एवं नगरीकरण को एक ही अर्थ में प्रयोग किया जाता है। जबकि इनमें परस्पर काफी अन्तर पाया जाता है। चूंकि ये दोनों ही प्रक्रियायें नगरों से सम्बन्धित होती हैं। अतः इन्हें समान माना जाता है। वास्तव में नगरीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो नगरीय प्रभावों का प्रसार करती है। वास्तव में नगरीकरण सामाजिक गतिशीलता का परिणाम होती है जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों से व्यक्ति प्रवर्जन या प्रवास के द्वारा नगरीय केन्द्रों में निवास करने लगता है। नगरीय केन्द्रों तथा नगर में रहकर व्यक्ति जिस जीवन पद्धति को अपनाता है वह पद्धति नगरीयता कहलाती है। कहने का तात्पर्य यह है कि नगरीयता व्यक्ति के जीवन जीने का एक ढंग है जो विशेष नगरीयय सामाजिक व्यवस्था को जन्म देता है। जबकि नगरीकरण नगरीय विशेषताओं को स्थापित करने में अपना विशेष योगदान देता है। अतः कहा जा सकता है कि नगरीकरण के कारण नगरों को निर्माण एवं विकास होता है। जबकि नगरीयता नगरों में निवास करने वाले व्यक्ति के जीवन जीने के तरीके तथा उनमें होने वाले परिवर्तनों को स्पष्ट करता है। नगरीकरण एवं नगरीयता के अंतर को स्पष्ट करने के लिए अनेक समाजशास्त्रियों ने अपने-अपने विचार प्रस्तुत किये हैं जो निम्नांकित हैं

नगरीयता एवं नगरीकरण में अंतर

1. शशि के जैन के अनुसार- नगरीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो नगरीय प्रभावों का प्रसार करता है। जबकि नगरों में व्यक्ति जिस तरह रहता है या जीवन व्यतीत करता है, उसे नगरीयता कहते हैं। जीवन की यह विधि नगरी या कस्बों तक ही सीमित है। 

2. नेल्स एण्डरसन के कथनानुसार-नगरीकरण प्रायः बड़े नगरों में केन्द्रित है और उद्योग की ओर उन्मुख है इसे प्रायः पाश्चात्य कहा जाता है और एक जीवन के ढंग के रूप में नगरीयता कहा जाता है।

3. बर्गेल के अनुसार-'नगरीकरण एक प्रक्रिया के रूप में जबकि नगरीयता एक देश या परिस्थितियों के रूप में समझे जायेंगे। 

4. एम0 एस0 ए0 राव- नगरीकरण जहां एक प्रक्रिया है। वहीं पर नगरीयता जीवन ढंग को व्यक्त करती है। 

5. थॉम्पसन एवं लुईस- "नगरीकरण उस प्रक्रिया को कहते हैं। जिसके अन्तर्गत किसी देश की जनसंख्या बढ़ती दर से शहरों में आकर बसने लगती है। नगरीयता एक ऐसी जीवन-यापन करने की विधि है जो नगरों में अपनायी जाती है। 

6. क्वीन एवं कारपेंटर-नगरीयता का प्रयोग हम नगर निवास की घटना को पहचानने के लिए करते हैं नगरीयकरण का प्रयोग एक विशिष्ट जीवन शैली जो अद्भुत रूप से नगर निवास से जुड़ी है, को पहचानने के लिए करते हैं।

अतः उपरोक्त समाजशास्त्रियों की परिभाषाओं के आधार पर कहा जा सकता है कि नगरीकरण और नगरीयता दो अलग-अलग अवधारणाएं हैं। जिन्हें प्रायः एक समझने की भूल की जाती है। जिसमें नगरीकरण के अतत ग्रामों का नगरों के रूप में बदलना तथा नगरीयता का तात्पर्य ऐसी जीवन पद्धति से है जो अनौपचारिक सम्बन्धों पर आधारित, अस्थायितव एवं परिवर्तनशील जैसी विशेषताओं से युक्त होती है।

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