जनसंख्या की गुणवत्ता एवं जीवन स्तर में अंतर

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जनसंख्या की गुणवत्ता एवं जीवन स्तर में अंतर 

जनसंख्या के जीवन की गुणवत्ता एवं जीवन-स्तर को प्रायः एक देश एवं उसके निवासियों की आर्थिक और सामाजिक समृद्धि के रूप में देखा जाता है जबकि इन दोनों में पर्याप्त अंतर है। एक ओर, जीवन स्तर सामान्यतया एक निश्चित भौगोलिक क्षेत्र में लोगों को धन, आराम, भौतिक वस्तुएं और आवश्यकताओं की उपलब्धता से सम्बन्धित है। दूसरी ओर, जीवन की गुणवत्ता जीवन स्तर की तुलना में अधिक व्यक्तिपरक है। इसमें धन और रोजगार के साथ ही निर्मित पर्यावरण, शारीरिक एवं मानसिक स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, मनोरंजन, खुशी, अवकाश का समय और सामाजिक सम्बन्ध एवं गरीबी रहित जीवन शामिल है। 

जीवन स्तर के अन्तर्गत वे तत्व सम्मिलित होते हैं जिनकी माप आसानी से की जा सकती है और जिन्हें संख्या में व्यक्त किया जा सकता है, जैसे- सकल घरेलू उत्पाद, गरीबी की दर, जीवन प्रत्याशा, मुद्रा स्फीति की दर, श्रमिकों को प्रतिवर्ष दिये जाने वाले अवकाशों की औसत संख्या आदि। जीवन स्तर प्रायः भौगोलिक क्षेत्रों की तुलना करने के लिए उपयोग किया जाता है। जैसे दो देशों अथवा दो शहरों में जीवन स्तर का अन्तर। जबकि जीवन की गुणवत्ता के अन्तर्गत ऐसे तत्व भी शामिल होते हैं जो विशिष्टतः गुणात्मक हैं और उनकी माप करना कठिन है, जैसे- कानून का समान संरक्षण, भेदभाव से मुक्ति, धार्मिक स्वतंत्रता आदि।

जीवन-स्तर एक वस्तुपरक एवं संकुचित अवधारणा है जबकि जीवन की गुणवत्ता एक व्यक्तिपरक एवं व्यापक अवधारणा है। परन्तु, दोनों ही एक विशेष समय में एक विशेष क्षेत्र में जीवन की एक सामान्य तस्वीर प्रस्तुत करने में सहायता करते हैं, जिससे नीति-निर्माताओं को नीतियों के निर्माण एवं इनमें परिवर्तन करने में मदद मिलती है।

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