Monday, 7 February 2022

नव वामपक्ष की विचारधारा का वर्णन कीजिये।

नव वामपक्ष की विचारधारा का वर्णन कीजिये। 

नव वामपक्ष का उदय

धारणा के रूप में एक नवीन क्रान्तिकारी विचारधारा का उदय हुआ। मार्क्स की परम्परा को लेनिन, माओ इत्यादि ने आगे बढ़ाया तथा ये वामपक्षी कहलाये। परन्तु वामपक्षी विचारकों को आधुनिक युग में अपनी धारणाओं व पद्धतियों में परिवर्तन के लिए बाध्य होना पड़ा। इस प्रकार एक नव-वामपक्ष का उदय हुआ। नव-वामपक्ष से सम्बन्धित विचारक हिंसात्मक तौर-तरीकों में विश्वास नहीं रखते। राजनीतिक सिद्धान्तों के क्षेत्र में इनके द्वारा पूंजीवादी उदारवादी व्यवस्था की आलोचना तो पूर्ववत् ही की जाती है परन्तु इसमें परिवर्तन हेतु सर्वहारा के अधिनायकतन्त्र के स्थान पर अहिंसात्मक व क्रमिक परिवर्तनों की भी बात की जाती है।

नव-वामपक्षी विचारक राजनीतिक व्यवस्था में मध्यम वर्ग की उपस्थिति व महत्व से इनकार नहीं करता है। इन विचारकों का मत है कि राज्य में प्राकृतिक संसाधनों, सार्वजनिक सेवाओं इत्यादि का लाभ प्रत्येक नागरिक को समानता से प्राप्त हो और पूंजीवादी शोषण के दमन चक्र की समाप्ति हो परन्तु इस कार्य हेतु यह विचारक संवैधानिक परिवर्तन में विश्वास करते हैं। उदाहरण के तौर पर रॉल्स का वितरणात्मक न्याय का सिद्धांत इसी प्रकार का उदाहरण प्रस्तुत करता है। 



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