नगरीय संरचना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।

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नगरीय संरचना पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये।

नगरीय संरचना : नगर एक ऐसा स्थान है जहाँ मानव, कृषि के अतिरिक्त, अन्य अनेक व्यवसायों में व्यस्त है। नगर वह सम्पूर्ण समाज है जहाँ जनसंख्या बहुत अधिक होती है। यहाँ सामान्यतः सामुदायिक भावना की कमी होती है। अधिकांश समाजशास्त्रियों की मान्यता है कि व्यवसाय, पर्यावरण, जनसंख्या गतिशीलता, विभेदीकरण तथा विजातीयता या विषमता. नगरीय जीवन की प्रमुख विशेषताएँ हैं। हम कह सकते हैं कि नगर एक ऐसा समुदाय है जहाँ आर्थिक, सामाजिक और सांस्कृतिक विषमता, जनसंख्या का अधिक घनत्व, नियन्त्रण के औपचारिक साधन, कृत्रिमता, व्यक्तिवाद की प्रधानता, प्रतिस्पर्धा, संघर्ष एवं विभेदीकरण प्रमुख रूप से पाए जाते हैं।

बर्गल के अनुसार - "प्रत्येक व्यक्ति यह जानता है कि शहर या नगर क्या है, किन्तु किसी ने भी सन्तोषजनक परिभाषा नहीं दी है' नगर केवल एक निवास का स्थान ही नहीं, वरन एक विशिष्ट पर्यावरण का सूचक भी है। यह जीवन जीने का एक विशिष्ट ढंग और एक विशिष्ट संस्कृति का सूचक भी है। नगरों की जनसंख्या अधिक होती है, वहाँ जनघनत्व भी अधिक पाया जाता है। व्यवसायों की बहुलता एवं भिन्नता, औपचारिक व द्वितीयक सम्बन्धों की प्रधानता, भौतिकवाद, कृत्रिमता, जटिलता, व्यस्तता, गतिशीलता आदि नगरीय जीवन की विशेषताएँ हैं। यहाँ परिवार, नातेदारी एवं पड़ोस का अधिक महत्व नहीं होता। यहाँ व्यक्ति अपनी विभिन्न आवश्यकताओं की पूर्ति के लिए अनेक द्वैतीयक संगठनों का सदस्य होता है। काननी दृष्टिकोण से नगर वह स्थान है जिसे उच्च सत्ता के चार्टर द्वारा नगर (शहर) घोषित किया गया हो। नगर की यह आधुनिक परिभाषा आधुनिक सन्दर्भ में तो ठीक है, परन्तु प्राचीन समय में चार्टर द्वारा किसी निवास स्थान को नगर घोषित करने की प्रथा नहीं थी। यदि हम शब्द की रचना की दृष्टि से देखें तो 'शहर' या 'नगर' अथवा अंग्रेजी भाषा के 'सिटी' (City) का हिन्दी अनुवाद है। स्वयं 'सिटी' शब्द लैटिन भाषा के 'सिविटाज' (Civitas) से बना है जिसका तात्पर्य है नागरिकता। अंग्रेजी भाषा का 'Urban' शब्द लैटिन भाषा के 'Urbanus' से बना है जिसका अर्थ है 'शहर' । लैटिन भाषा के 'Urbs' का अर्थ भी 'City' अर्थात शहर ही है।

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