दबाव समूह और राजनीतिक दल में क्या अंतर है ?

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दबाव समूह और राजनीतिक दल में क्या अंतर है ?

दबाव समूहों के सबसे अधिक घनिष्ठ एवं उलझे हुए सम्बन्ध राजनीतिक दलों से होते हैं। श्रमिक युवक, नारी, दलित, व्यावसायिक आदि के संगठनों में राजनीतिक दल भी रुचि लेते हैं। ये वर्ग राजनीतिक दलों के माध्यम से अपने हितों की रक्षा चाहते हैं। राजनीतिक दल स्वयं भी कुछ दबाव समूहों में अपनी रुचि दिखाते हैं और कुछ दबाव समूहों का निर्माण राजनीतिक दलों की पहल पर होता है। इंग्लैण्ड का श्रमिक दल अनेक श्रमिक संगठनों से मिलकर बना है। अत: राजनीतिक दल दबाव समूहों से बनते हैं। अत: दोनों में सम्बन्ध होने स्वाभाविक है, दोनों में पारम्परिक निर्भरता पायो जाती है। परन्तु दोनों में कुछ अन्तर भी हैं।

दबाव समूह और राजनीतिक दल में अंतर

1. राजनीतिक दलों का लक्ष्य चुनाव के माध्यम से सत्ता प्राप्त करना होता है जबकि दबाव समूह चुनाव और सत्ता के चक्कर में न पड़कर केवल विधायकों, सार्वजनिक अधिकारियों को अपने हित में प्रभावित करना चाहते हैं। 

2. राजनीतिक दलों का आधार राष्ट्रीय होता है। राष्ट्रीय हित उनके कार्यक्रम का महत्त्वपूर्ण अंग होते हैं। वे राष्ट्रीय अथवा प्रान्तीय या कुछ दल क्षेत्रीय समस्याओं से जुड़े रहते हैं जबकि दबाव समूह का सारा कार्यक्रम अपने वर्ग से सम्बन्धित होता है। 

3. राजनीतिक दलों की सदस्य संख्या लाखों में होती है। दबाव समूह के सदस्य सिर्फ उस वर्ग के लोग होते हैं जिनका वह संगठन होता है। 

4. राजनितिक दल संगठित होते हैं उनका अपना संविधान होता है उनकी नीति कार्यक्रम निश्चित होते हैं, वे मान्यता प्राप्त होते हैं जबकि दबाव समूह संगठित-असंगठित , मान्यता प्राप्त या अमान्यता प्राप्त हो सकते हैं 

5. राजनीतिक दल अपने उदेश्यों की पूर्ति के लिए केवल संवैधानिक साधनों का ही सहारा लेते है। जबकि दबाव समूह अपने उदेश्यो को पूर्ति के लिए उचित-अनुचित किसी भी प्रकार के साधनों का सहारा ले लेते है। 

6.  राजनीतिक दल सदैव क्रियाशील रहते हैं चुनावों के समय उनकी क्रियाशीतता बढ जाती। लेकिन उसके बाद भी सरकार की नीति, जनमत आदि का ध्यान रखते है और जब आवश्यकता समझते है वे आन्दोलन या प्रदर्शन आदि का सहारा ले लेते है लेकिन दबाव समूह केवल अपने उद्देश्य-पूर्ति के लिए कार्य करते समय ही क्रियाशील रहते हैं। 

न्यूमैन ने राजनितिक दलो तथा दबाव समूहों में अंतर स्पष्ट करते हुए कहा है कि- दबाव समूह मूलतः ऐसे एक जातीय हितों का प्रतिनिधित्व करते हैं जो अपने को प्रभावशाली बनाना चाहते हैं। एक हित समूह तभी सशक्त एवं प्रभावशाली बनता है जब उसका कोई सुस्पष्ट विशेष उद्देश्य होता है। इसके विपरीत राजनीतिक दल पद प्राप्त करने के इच्छुक होते हैं और नीति सम्बन्धी निर्णयों को अपने हाथ में लेने का प्रयास करते हैं इसलिए वे बहुजातीय समूहों को एकीकत करते है। वस्ततः राजनीतिक समाज के  अंतर्गत विद्यमान विभिन्न शक्तियों में मेल स्थापित करना ही उनका मुख्य उद्देश्य होता है । उनका काम एकीकरण करना है जो हित-समूहों के क्षेत्र में नहीं आता। इस प्रकार दबाव समूह और राजनीतिक दल में बहुत अन्तर है।

दबाव गुट और लॉबी -दबाव गुट और लॉबी में अन्तर हैं। दबाव गुट अपने हितों को पूर्ति के लिए जनमत और विधायकों दोनों पर निर्भर रहते हैं जबकि लॉबी का सम्बन्ध सिर्फ विधायकों से ही होता है। लॉबी आवश्यकता पड़ने पर किसी विधेयक को पास कराने या न कराने का भरसक प्रयास विधायकों के माध्यम से करती है. इसका सम्बन्ध जनमत से नहीं होता है।

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