Tuesday, 15 March 2022

भारतीय नगरों की प्रमुख विशेषताएं बताइए

भारतीय नगरों की प्रमुख विशेषताएं बताइए

भारतीय नगरों की विशेषता : सभी दृष्टिकोण और अध्ययन के आधार पर भारतीय नगरों की प्रमुख संरचनात्मक विशेषताएँ अथवा लक्षणों को हम निम्नलिखित प्रकार से समझ सकते हैं -

भारतीय नगरों की विशेषताएं

  1. सामाजिक विभिन्नता (Social Heterogeneity)
  2. घनी जनसंख्या (Congestion)
  3. व्यक्तिवादिता (Individualism)
  4. व्यवसायों में विभिन्नता (Variety of Occupations)
  5. धर्म एवं परिवार का कम महत्व (Lesser Importance of Religion and Family)
  6. फिजूलखर्जी और कृत्रिमता (Extravagance and Artificiality) 

1. सामाजिक विभिन्नता (Social Heterogeneity) - नगरों में सामाजिक विभिन्नता पायी जाती है अर्थात यहाँ के जीवन में एकरूपता का अभाव पाया जाता है। इसका प्रमुख कारण विभिन्न वर्गों के लोगों का नगर में बसना है। इस विभिन्नता के कारण नगरों में सामाजिक विभिन्नता बनी रहती है।

2. घनी जनसंख्या (Congestion) - नगरों में घनी जनसंख्या पायी जाती है। विशेषकर औद्योगिक दृष्टि से महत्वपूर्ण नगरों में अधिक घनी जनसंख्या पायी जाती है। व्यापार, वाणिज्य, शिक्षा, राजनीति आदि का क्षेत्र अधिक विस्तृत होने के कारण नगरों की जनसंख्या अधिक घनी है।

3. व्यक्तिवादिता (Individualism) - नगरों में व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा उसके व्यक्तिगत गुणों पर निर्भर करता है, नगरों की यह विशेषता व्यक्ति को स्वार्थी बना देती है। इस प्रकार व्यक्ति कभी-कभी इतना अधिक स्वार्थी हो जाता है कि अपने परिवार की चिन्ता नहीं करता है।

4. व्यवसायों में विभिन्नता (Variety of Occupations) - नगरों में विभिन्न प्रकार के व्यवसाय होते हैं। यहाँ यदि कोई क्लर्क है तो कोई लेखा अधिकारी, कोई मास्टर है, कोई कपडे की मिल का मालिक है तो कोई टैक्सी ड्राइवर तो कोई प्राइवेट नौकर, कोई टेलीफन अधिकारी है, तो कोई बाजार में आवाज लगाकर चाट बेचने वाला।

5. धर्म एवं परिवार का कम महत्व (Lesser Importance of Religion and Family) - नगरों में धर्म एवं परिवार का महत्व कम होता है क्योंकि नगरों की शिक्षा का सम्बन्ध विज्ञान से होता है। अतः . नगरों में रूढ़िवादिता एवं अन्धविश्वास अपना घर नहीं बना पाते इसके अतिरिक्त अन्य आवश्यकताओं की पूर्ति बाहरी समितियों द्वारा हो जाती है। यही कारण है कि नगरों में परिवार का बहुत कम महत्व होता है।

6. फिजूलखर्जी और कृत्रिमता (Extravagance and Artificiality) - नगरों में व्यक्ति की सामाजिक प्रतिष्ठा काफी हद तक फिजूलखर्ची और कृत्रिमता जितनी अधिक होगी, उसकी सामाजिक प्रतिष्ठा उतनी ही अधिक होती है। इसी कृत्रिमता को बनाए रखने के लिए फिजूल खर्च करना आवश्यक हो जाता है।


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