Monday, 14 February 2022

तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति की विवेचना कीजिए।

तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति की विवेचना कीजिए। 

तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति

तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति को लेकर विद्वानों में विचार-विभेद हैं। मोटे तौर पर तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति प्रकृति सम्बन्धी विचारों को दो प्रमुख धारणाओं में विभक्त किया जाता है। राजनीति-शास्त्र के विद्वान व तुलनात्मक राजनीति के अग्रणी कम या अधिक मात्रा में दोनों में से किसी एक धारणा के समर्थक दिखायी देते हैं। यह दो धारणाएँ हैं

  1. उर्ध्वाधर तुलनात्मक राजनीति
  2. क्षैतीज तुलनात्मक राजनीति

उपरोक्त दोनों धारणाओं के विस्तृत विवेचन के बाद ही तुलनात्मक राजनीति की प्रकृति सम्बन्धी सही विचारधारा का निरूपण सम्भव है इसलिये इनका अलग-अलग व विस्तार से वर्णन करना आवश्यक ही नहीं, अनिवार्य भी है।

उर्ध्वाधर तुलनात्मक राजनीति

इस विचार के समर्थकों के अनुसार, तुलनात्मक राजनीति एक ही देश में स्थित विभिन्न स्तरों पर स्थापित सरकारों व उनको प्रभावित करने वाले राजनीतिक व्यवहारों का तुलनात्मक विश्लेषण व अध्ययन है। इसके विचारक यह मानते हैं कि प्रत्येक राज्य में कई स्तरों पर सरकारें होती हैं। मोटे रूप से उन्होंने इन सरकारों को दो प्रकार की बताया है। प्रथम, सर्वव्यापक या सार्वजनिक या राष्ट्रीय सरकार तथा दूसरी, आंशिक, स्थानीय या व्यक्तिगत (private) सरकार।

इन विचारकों के अनुसार, तुलनात्मक राजनीति का सम्बन्ध इस प्रकार की एक ही देश में स्थित विभिन्न सरकारों-सर्वव्यापक व आंशिक-की आपस में तुलना से है। इस धारणा के विचारक मानते हैं कि यद्यपि एक ही देश में सर्वव्यापक या राष्ट्रीय सरकार तो एक ही होती है परन्तु आंशिक सरकारें अनेकों होती हैं और इसलिये इनसे सम्बन्धित राजनीतिक प्रक्रियाओं व संस्थाओं की तुलना करके निश्चित निष्कर्ष निकालना सम्भव है। जैसे अगर एकात्मक राज्य है तो उसमें एक राष्ट्रीय सरकार होगी और कई स्थानीय सरकारें या निगम (corporation) होंगे। अगर राज्य व्यवस्था संघात्मक है, तो राष्ट्रीय प्रान्तीय व स्थानीय सरकारें होंगी। इस धारणा के समर्थक यह मानते हैं कि एक ही राज्य में विभिन्न स्तरों की विविध सरकारों की तुलना लम्बात्मक तुलना' कहलाता है और तुलनात्मक राजनीति इन्हीं का पारस्परिक तुलना करने से सम्बद्ध शास्त्र है। इस प्रकार की मान्यता रखने वालों ने इसलिये ही तुलनात्मक राजनीति की परिभाषा इस आधार पर की है और कहा है कि "तुलनात्मक राजनीति एक ही देश की विभिन्न सरकारों की लंबवत / उर्ध्वर्धर  तुलना है।" (comparative politics deals the, vertical comparison of various governments within the same country).

तुलनात्मक राजनीति की उपरोक्त परिभाषा नहीं की जा सकती। इस परिभाषा का आधार ही तर्कसंगत नहीं लगता। क्योंकि राष्ट्रीय सरकार एवं आंशिक सरकारों के बीच दृष्टिगोचर होने वाली समानता सतही ही है। वैसे भी इन समानताओं की गहराई में जाँच की जाए तो इसमें असमानताएँ ही अधिक दिखाई देंगी और ऊपर से केवल मात्रा का अन्तर दिखाई देने वाला वास्तव में प्रकार का अन्तर भी प्रतीत होगा। 

क्षैतीज तुलनात्मक राजनीति

इस श्रेणी में एक समान की विभिन्न राजनीतिक व्यवस्थाओं के बीच तुलना की जाती है जैसे द्विदलीय/बहुदलीय/एक दलीय दलीय व्यवस्था, संघात्मक एवं एकात्मक व्यवस्था, अध्यक्षीय एवं संसदीय व्यवस्था आदि। इसमें विभिन्न व्यवस्थाओं के बीच तुलनात्मक विश्लेषण कर सामान्यीकरण करने का प्रयास किय जाता है। विभ्न्नि राष्टृों से संबंध्ति राजनीतिक व्यवहारों की तुलना की जाती है। जीन ब्लॉण्डेल ने ठीक ही कहा है, ‘‘हमारे पास तुलनात्मक सरकारों के अघ्ययन का केवल एक ही दृष्टिकोण शेष बचता है और वह है - समकालीन विश्व की राजनीतिक व्यवस्थाओं से संबद्ध् सरकारो का राष्टृीय सीमाओं के आरपार अघ्ययन करना।’8


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