Wednesday, 30 March 2022

मुंगेरी लाल आयोग पर टिपण्णी कीजिये।

मुंगेरी लाल आयोग पर टिपण्णी कीजिये। 

मुंगेरी लाल आयोग पर टिपण्णी कीजिये।

मुंगेरी लाल आयोग (Mungerilal Commission in Hindi)

मुंगेरी लाल आयोग की स्थापना बिहार सरकार द्वारा की गई। इसी आयोग की सिफारिशों के आधार पर बिहार सरकार ने 1978 में 128 जातियों को पिछड़ी जातियाँ घोषित किया और उनके लिए सरकारी सेवाओं में आरक्षण की नीति को लागू किया। कर्नाटक सरकार द्वारा 1972 में एल. सी. हवानूर की अध्यक्षता में पिछड़े वर्ग आयोग की स्थापना की गई। इस आयोग ने गहन सर्वेक्षण के पश्चात् जातियों एवं समुदायों की सूची तैयार की और इसके लिए 32 प्रतिशत नौकरियों में आरक्षण की सिफारिश की सरकार ने इस प्रतिशत में वृद्धि करके 32 के स्थान पर 40 कर दिया।

केरल सरकार ने एक आयोग की स्थापना पी. डी. नेटूर की अध्यक्षता में की। इस आयोग द्वारा आर्थिक स्थिति, शैक्षणिक उपलब्धियों, सरकारी-सेवाओं में भागीदारी और सामाजिक पिछड़ेपन की कसौटियाँ स्वीकार करने की सिफारिश की। वर्तमान समय में केरल में 25 प्रतिशत स्थान पिछड़े वर्गों के लिए आरक्षित हैं। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा 58 समदायों और जातियों को पिछड़े वर्ग में घोषित किया गया है और इनके लिए 15 प्रतिशत स्थान आरक्षित भी किए गए हैं।

आन्ध्र प्रदेश सरकार ने जाति के स्थान पर 'परिवार' को पिछड़े समूहों को वर्गीकृत करने का आधार माना किन्तु कुछ समय के पश्चात् कठिनाइयों के कारण इसे त्याग दिया गया। इस सरकार द्वारा 1970 में 92 समुदायों की एक सूची बनायी गई जिसमें इन वर्गों के लिए 25 प्रतिशत स्थान आरक्षित किए गए। इस प्रकार वर्तमान में भारत के विभिन्न राज्यों में आरक्षण की व्यवस्था लागू है। 


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