राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा को समझाइए।

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राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा को समझाइए।

  • राजनीतिक संस्कृति का अर्थ एवं परिभाषा बताइये।
  • राजनीतिक संस्कृति का महत्व बताइये।

राजनीतिक संस्कृति का अर्थ एवं परिभाषा

राजनीतिक संस्कृति एक समाजशास्त्रीय शब्द है जिसमें अनेक अवधारणाएँ सम्मिलित हैं। जैसे राजनीतिक विचारवाद, राष्ट्रीय लोकाचार (ethos) और भावना, राष्ट्रीय मनोविज्ञान तथा जनता के आधारभूत नैतिक मूल्य आदि। विशुद्ध आनुभाविक दृष्टि से राजनीतिक संस्कृति का सर्वप्रथम प्रयोग आमण्ड और पॉवेल द्वारा विकासशील देशों के अध्ययन में किया गया। 

आमण्ड और पॉवेल के अनुसार, "राजनीतिक संस्कृति किसी राज-व्यवस्था के सदस्यों में राजनीति के प्रति व्यक्तिगत अभिवृत्तियाँ और दिग्विन्यासों का नमूना है।" 

बॉल के शब्दों में, "राजनीतिक संस्कृति उन अभिवृत्तियों, विश्वासों, भावनाओं और समाज के मूल्यों से मिलकर बनती है, जिनका सम्बन्ध राजनीतिक पद्धति और राजनीतिक प्रश्नों से होता है।" 

हींज युलाऊ के मतानुसार, "राजनीतिक संस्कृति उन रूपों की ओर इशारा करती है जिनका पूर्व अनुमान समूहों के राजनीतिक व्यवहार से तथा एक समूह के सदस्यों के सामान्य विश्वासों, नियामक सिद्धान्तों, उद्देश्यों एवं मूल्यों से लगाया जा सकता है चाहे उस समूह का आकार कुछ भी क्यों न हो।'

राजनीतिक संस्कृति को विभिन्न विद्वानों के द्वारा अलग-अलग नामों से सम्बोधित किया गया है। आमण्ड इसे कार्य के प्रति अभिमुखीकरण' (Orientation to Action), बियर 'राजनीतिक संस्कृति' (Political Culture), ईस्टन पर्यावरण' (Environment) तथा स्पिरो राजनीतिक शैली' (Political Style) कहता है, लेकिन इन सभी में राजनीतिक संस्कृति शब्द ही सर्वाधिक उपयुक्त है। 

1.सिडनी वर्बा ने राजनीतिक संस्कृति के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए इसकी व्यापक परिभाषा दी है। उनके अनुसार, "राजनीतिक संस्कृति में आनुभाविक विश्वासों, अभिव्यक्तात्मक प्रतीकों और मूल्यों की वह व्यवस्था निहित है जो उस परिस्थिति अथवा दशा को परिभाषित करती है जिसमें राजनीतिक क्रिया सम्पन्न होती है।"

2. लुसियन पाई के द्वारा राजीतिक संस्कृति की बहुत अधिक रोचक एवं विस्तृत व्याख्या प्रस्तुत की गयी है। उनके अनुसार राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा बताती है कि किसी समाज की परम्पराएँ उसकी सार्वजनिक संस्थाओं की आत्मा, उनके नागरिकों की आकांक्षाएँ और उनका सामूहिक विवेक तथा उसके नेताओं के तरीके और संक्रिय होने के नियम आदि। केवल ऐतिहासिक अनुभव की ऊटपटांग उपज नहीं है, वरन् ये सब एक अर्थपूर्ण सम्पूर्ण व्यवस्था के अंग हैं और सम्बन्धों का एक बोधगम्य तथा स्पष्ट तानाबाना उपस्थित करते हैं। राजनीतिक संस्कृति व्यक्ति के लिए प्रभावशील राजनीतिक व्यवहार की दिशा में मार्ग निर्देशन करती है और समाज के लिए उन मूल्यों तथा विवेकपूर्ण विचारों को व्यवस्थित रूप रचना प्रदान करती है जो कि संस्थाओं और संगठनों के कार्यकलापों में मेल या संगति बैठाते हैं।

लुसियन पाई राजनीतिक संस्कृति को स्पष्ट करते हुए आगे लिखते हैं कि एक राजनीतिक संस्कृति एक राजनीतिक व्यवस्था में सामूहिक इतिहास की भी उपज है और उन व्यक्तियों की जीवन गाथाओं की उपज है जिन्होंने हाल ही में इस व्यवस्था को बनाया है। इस प्रकार राजनीतिक संस्कृति की जड़ें सार्वजनिक घटनाओं और व्यक्तिगत अनुभवों में समान रूप से निहित हैं।

राजनीतिक संस्कृति को भली-भाँति समझने के लिए इसका राजनीतिक शैली' (Political Style) अथवा 'कार्यात्मक नियम संग्रह '(Operational Code) से अंतर कर दिया जाना चाहिए। राजनीतिक शैली अथवा कार्यात्मक नियम संग्रह को केन्द्र बिन्दु मात्र राजनीतिक उच्च वर्ग का व्यवहार होता है लेकिन राजनीतिक संस्कृति इसकी तुलना में बहुत व्यापक है, क्योंकि इसके अन्तर्गत राजनीतिक उच्च वर्ग और सामान्य जनता दोनों के ही राजनीतिक व्यवहार का अध्ययन किया जाता है। दूसरी ओर राजनीतिक संस्कृति जनमत और राष्ट्रीय चरित्र जैसी धारणाओं से अधिक प्रतिबंधित और अधिक स्पष्ट रूप में राजनीतिक हैं। जनमत और राष्ट्रीय-चरित्र बहुत अधिक व्यापक शब्द हैं, जबकि राजनीतिक संस्कृति अपेक्षाकृत सीमित और निश्चित राजनीतिक अर्थ वाला शब्द है।

राजनीतिक संस्कृति का महत्व 

विकासशील राज्यों के उदय से राजनीति विज्ञान के अध्ययन दृष्टिकोण में परिवर्तन आ गये। अब राजनीतिक व्यवस्थाओं को संविधानों, संरचनाओं और संस्थाओं के आधार पर समझना कठिन हो गया क्योंकि सैद्धान्तिक व्यवस्था और व्यवहार में अत्यधिक अन्तर आने लगे थे। पश्चिम की स्थिर राजनीतिक व्यवस्थाओं में भिन्न, नवोदित राज्यों में राजनीतिक व्यवहार और संस्थागत व्यवस्थाओं में सर्वाधिक अन्तर देखने में आने लगे। इसलिए इन अन्तरों को समझने के लिए राजनीतिक व्यवहार की वास्तविक संचालक शक्ति की खोज होने लगी।

इससे यह स्पष्ट हो गया कि राजनीतिक संरचनाओं, प्रक्रियाओं एवं प्रकार्यों को उन अभिवृत्तियों के ही सन्दर्भ में समझा जा सकता है जो इनको संचालित रखने वाले मानव समुदाय में पायी जाती हैं।

दूसरे शब्दों में, राजनीतिक व्यवस्थाओं की गत्यात्मक शक्तियों को समझने के लिए उनसे सम्बन्धित राजनीतिक संस्कृति को समझना आवश्यक हो गया। अब यह माना जाने लगा कि राजनीतिक संस्कृति के माध्यम से ही यह गुत्थी सुलझाई जा सकती है कि विभिन्न व्यवस्थाओं में एक-सी राजनीतिक संस्थाएँ भिन्न-भिन्न प्रकार से सक्रिय क्यों होती हैं ?

हर देश की राजनीति पर्यावरण के विभिन्न पहलुओं से प्रभावित रहती है किन्तु इनमें सांस्कृतिक पहलू का विशेष महत्व और स्थान होता है। सांस्कृतिक पर्यावरण में व्यक्तियों के मल्य, विश्वास और अभिवृत्तियाँ आदि आते हैं और ये ही राजनीति को इस या उस प्रकार का रंग देने के लिए उत्तरदायी होते हैं। अतः राजनीतिक व्यवस्था का आधार मूलतः राजनीतिक संस्कृति में गड़ा हुआ-सा रहता है। इस कारण, तुलनात्मक राजनीतिक विश्लेषणों को यथार्थवादी बनाने के लिए राजनीतिक संस्कृति की अवधारणा के आधार पर तुलनाएँ करना आवश्यक माना जाने लगा। 

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