राजनीतिक अर्थव्यवस्था उपागम को समझाइये।

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राजनीतिक अर्थव्यवस्था उपागम को समझाइये।

  1. राजनीतिक अर्थशास्त्र पर टिप्पणी लिखिये।
  2. तुलनात्मक राजनीति में राजनीतिक अर्थव्यवस्था दृष्टिकोण।
  3. राजनीतिक अर्थव्यवस्था पर निबंध।

राजनीतिक अर्थव्यवस्था उपागम

मूलत:राजनीतिक अर्थव्यवस्था उपागमया राजनीतिक अर्थशास्त्र उस विषय का नाम था जिसे बाद में 'अर्थशास्त्र' (Economics) के रूप में मान्यता मिली। इसके मूल नामकरण का उद्देश्य यह था कि इसे गृह-प्रबन्ध (Household Management) या गृह अर्थव्यवस्था (Domestic Economy) से पृथक करके राज्य-प्रबंध (State Management) या राजनीतिक अर्थव्यवस्था के रूप में पहचाना जा सके। अठारहवीं शताब्दी के अंत तक अनेक लेखकों ने इसके सीमा क्षेत्र को राज्य की सम्पदा (Wealth of the State) से जुड़ी हुई समस्याओं तक सीमित रखा। इन लेखकों में एडम स्मिथ 1723-90 का नाम अग्रण्य है। वस्तुत: एडम स्मिथ को आधुनिक अर्थशास्त्र का जनक माना जाता है।

राजनीतिक अर्थव्यवस्था उपागम के अन्तर्गत तुलनात्मक राजनीति विश्लेषण के प्रतिरूप

  1. उदारवादी विश्लेषण
  2. मार्क्सवादी विश्लेषण।

उदारवादी विश्लेषण - तुलनात्मक राजनीति-विश्लेषण के एक उपागम के नाते उदारवादी राजनीतिक अर्थशास्त्र के अन्तर्गत राजनीति और आर्थिक गतिविधियों के बीच श्रृंखला-सम्बन्ध की तलाश की जाती हैं। इस उपागम ने राजनीति और अर्थशास्त्र के अध्ययन में अतविषयक उपागम को बढ़ावा दिया है। इसमें मनुष्यों के राजनीतिक और आर्थिक व्यवहार में समानता स्वीकार करते हुए दोनो के लिये एक जैसी शब्दावली तथा संकल्पनाओं का प्रयोग किया जाता है। अत: राजनीति की उन परिभाषाआ को विशेष मान्यता दी जाती है जिनमें चयन, निर्णयन, इष्ट वस्तुओं के लिए प्रतिस्पर्धा आदि को प्रमुखता दी जाती है।

मार्क्सवादी विश्लेषण - मार्क्सवादी विचारक राजनीतिक को मानव जीवन की मौलिक (Fundamental) या स्वायत्त (Autonomous) गतिविधि नहीं मानते। उनके विचार से किसी भी देश और किसी भी युग की राजनीति वहाँ की अर्थव्यवस्था के साथ निकट से जुड़ी होती है। राजनीति के सम्बन्ध में मार्क्सवादी विश्लेषण तीन मान्यताओं पर आधारित है

  • समाज के सदस्य अलग-अलग व्यक्तियों के रूप में अपने हित साधन के उद्देश्य से नागरिक समाज का संगठन करते हैं।
  • सामाजिक जीवन की संरचना में आधार और अधिरचना में अन्तर करना जरूरी है।
  • इसके अलावा, मार्क्स और एंगेल्स ने राजनीति को क्रान्तिकारी कार्यक्रम के मार्ग-दर्शक के रूप में भी देखा।

मार्क्सवादी के अनुसार, वर्तमान युग में मुक्त व्यापार या वाणिज्य मनुष्य की स्वतंत्रता को बढ़ावा नहीं देता बल्कि ऐसी वर्ग संरचना को जन्म देता है जिसमें श्रमिक वर्ग पर पूँजीपतियों का प्रभुत्व स्थापित हो जाता है। वस्तुतः मनुष्य की स्वतंत्रता को वापस लाने के लिए इस वर्ग-संरचना को ध्वस्त करना जरूरी है।

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