हरित राजनीतिक सिद्धांत की अवधारणा स्पष्ट कीजिये।

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हरित राजनीतिक सिद्धांत की अवधारणा

हरित राजनीतिक सिद्धांत : हरित राजनीति या पर्यावरणवाद , एक राजनीतिक विचारधारा है। हरित राजनीति का उद्देश्य अहिंसावादी, पर्यावरणवाद पर आधारित पारिस्थितिक रूप से स्थायी समाज को बढ़ावा देना है। हरित राजनीति का सैद्धान्तिक आधार 'सामाजिक न्याय' है। इसके समर्थक पर्यावरणवादी यह तर्क देते हैं कि धरती किसी भी व्यक्ति की निजी संपत्ति (Private Property) नहीं है। यह हमें अपने पूर्वजों से उत्तराधिकार में नहीं मिला बल्कि यह हमारे पास भावी पीढ़ियों की धरोहर है। अतः हम वर्तमान प्राकृतिक संसाधनों को सुरक्षित रखने के दायित्व से बँधे हैं। वर्तमान पीढ़ियों को यह अधिकार नहीं है कि वे अपने उपभोग के लिए धरती या पर्यावरण के सारे संसाधनों को निचोड़कर भावी पीढियों के जीवन को खतरे में डाल दें। अतः पर्यावरण की रक्षा के लिए सजग होना हमारा परम कर्तव्य है। परिस्थितिविज्ञान (Ecology) ने सिद्ध कर दिया है कि आर्थिक विकास की अंधी दौड़ में हमारे पर्यावरण के कारण इतने अम्ल बहाए गए हैं जिन्होंने निर्मल जल-स्रोतों को विषाक्त कर दिया है। दूर-दूर तक फैले हुए कारखानों की चिमनियों और दिन-रात धुआँ उगलती मोटर गाड़ियों ने इतना वायु-प्रदूषण (Air Pollution) पैदा किया है जिससे मनुष्यों, जीव-जंतुओं और पेड़-पौधों के स्वास्थ्य को अपार क्षति हुई हैं। उद्योगों से पैदा होने वाले रासायनिक कूड़े-कचरे (Chemical Waste) और न्यूक्लीयर शक्ति (Nuclear Power) के प्रयोग से पैदा होने वाले रेडियोधर्मी रिसाव (Radio-active Leakage) के कारण धरती रहने योग्य नहीं बची है। इन सब तथ्यों की ओर ध्यान खींचते हुए पर्यावरणवाद 'जीवन की गुणवत्ता' (Quality of Life) को 'आर्थिक संवृद्धि' (Economic Growth) से ऊंचा स्थान देता है, और प्राकृतिक संसाधनों (Natural Resources), प्राकृतिक सौंदर्य (Natural Beauty), वातावरण की स्वच्छता (Atmospheric Cleanliness) तथा नगरों एवं उपनगरों के स्वरूप को कायम रखने पर बल देता है। इन सब उद्देश्यों को वह राजनीतिक कार्यक्रम के मुद्दे बनाता है. और इनके लिए उपयुक्त नीतियाँ और कायदे-कानून बनाने के लिए सरकार पर दबाव डालता है।

निष्कर्ष रूप में हम कह सकते हैं कि पर्यावरणवादी (हरित राजनीतिक), पर्यावरण को बहुत अधिक महत्व देते हैं। वे मानव जीवन के लिए पर्यावरण के महत्व को समझते हैं इसीलिए हरित राजनीतिशास्त्री 'जीवन की गुणवत्ता' को आर्थिक संवृद्धि से अधिक महत्वपूर्ण मानते हैं। 

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