अभिजात वर्ग कितने प्रकार के होते हैं ?

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अभिजात वर्ग कितने प्रकार के होते हैं ?

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अभिजात वर्ग के प्रकार

अभिजात में कोई एक प्रकार नहीं वरन् अनेक प्रकार हो सकते हैं और व्यवहार में होते हैं। कुछ विद्वानों के द्वारा इस सम्बन्ध में अपने विचार व्यक्त किये हैं।

पैरेटो ने समस्त समाज को अभिजात एवं अभिजनेत्तर में विभाजित किया तथा स्वयं अभिजात के दो प्रकार बतलाये हैं- (i) शासक अभिजात तथा अशासक अभिजात। अशासक अभिजनों में वैज्ञानिक. बद्धिजीवी और अभियन्ता आदि आते हैं।

मेरी कोलाबिन्सका ने फ्रांस में अभिजात वर्ग का अध्ययन करते हुए अभिजात वर्ग के चार प्रकार बतलाये हैं- 

  1. धनी वर्ग, 
  2. सामन्त वर्ग, 
  3. सशस्त्र कुलीन वर्ग और 
  4. धर्मोपदेशक।

सी० राइट मिल्स ने अमरीका में तीन प्रमुख अभिजात वर्ग बतलाये हैं-

  1. निगमों के प्रधान (The Corporation Heads), 
  2. राजनीतिक नेता (Political Leader)
  3. सैनिक प्रमुख (Military Chiefs)

मिल्स का विचार है कि ये तीनों इकाइयाँ एक ही विशिष्ट वर्ग का निर्माण करती हैं.क्योंकि ये तीनों समाज के उच्च वर्ग में से आते हैं।

टी० बी० बॉटोमोर ने अपनी रचना में अनेक अभिजात वर्गों का अस्तित्व स्वीकार किया है, किन्तु वह अभिजात वर्ग के तीन प्रकार बताते हैं। 

  1. बुद्धिजीवी
  2. प्रबन्धक तथा
  3. नौकरशाह। 

अन्तर्राष्ट्रीय ज्ञानकोश (1968) में के अनुसार से अभिजात वर्ग के प्रकार

  1. शासक प्रजाति (Ruling Caste)- इसका आधार प्राणिशास्त्रीय जनन क्रिया तथा धार्मिक रूढ़ियाँ होती हैं। 

  2. कुलीनतन्त्र (Aristocracy)- रक्त, धन या जीवन की विशेष शैली की समानता के आधार पर यह सभी सामाजिक पदों पर एकाधिकार कर लेता है। प्रायः इसकी आय का साधन भू-स्वामित्व होता है। 

  3. शासक वर्ग (Ruling Class)- समान संस्कृति एवं अन्त:क्रिया के आधार पर ये एक सामाजिक स्तर विशेष में भर्ती किये जाते हैं। इनका आधार सम्पत्ति, गुण आदि होता है। 

  4. व्यूहित अभिजात (Strategic Elites)- ये विशेषीकृत एवं विभिन्नीकृत कार्यों को अपनी कुशलता, गुण आदि के आधार पर करते हैं। संख्या में कम होते हुए भी इनकी शक्ति व्यापक होती है। विभिन्नीकृत होते हुए भी इनमें धीरे-धीरे एकता का भाव विकसित हो जाता है।

उपर्युक्त वर्णन के आधार पर कहा जा सकता है कि राजनेता, नौकरशाह, उद्योग-धन्धों के स्वामी तथा प्रबन्धक, बुद्धिजीवी और उच्च सैनिक सत्ता-अभिजात वर्ग के प्रमुख प्रकार हैं। विशेष परिस्थितियों के आधार पर अन्य कुछ वर्ग भी इनमें प्रवेश कर लेते हैं। अभिजात के इन वर्गों में एक विशेष समय पर कौन अधिक प्रभावशाली होगा और कौन अपेक्षाकृत कम प्रभावशाली,यह परिस्थितियों पर निर्भर करता है।

अभिजात वर्ग की इन विभिन्न इकाइयों के सम्बन्ध में मोस्का और कार्ल मैनहीम का विचार है कि केवल बुद्धिजीवी वर्ग ही समाज हित में कार्य करने की क्षमता रखता है, क्योंकि उसी के द्वारा समाज का पूर्ण और निरपेक्ष दृष्टिकोण अपनाया जा सकता है, किन्तु बुद्धिजीवी वर्ग की अपनी कुछ कमियाँ भी हैं। आर्थिक,सांस्कृतिक और राजनीतिक प्रश्नों पर बुद्धिजीवी वर्ग के व्यक्तियों के मत अलग-अलग होते हैं और यह स्थिति उनके प्रभाव को कम कर देती हैं। वस्तुस्थिति यह है कि वे जिस सामाजिक वर्ग से आते हैं, उसी वर्ग की सामाजिक और आर्थिक धारणा को अपना लेते हैं। व्यवहार के अन्तर्गत बुद्धिजीवी वर्ग को विशेषता से सम्बन्धित कार्य दे दिये जाते हैं और वे शासक विशिष्ट वर्ग की स्थिति को प्राप्त नहीं कर पाते।

अभिजात के सन्दर्भ में एक महत्वपूर्ण प्रश्न है कि क्या समाज के शासक एक सामाजिक वर्ग का निर्माण करते हैं ? यह एक ही इकाई होता है या विभाजित इकाई होता है। कार्ल जे० फ्रेडरिक के द्वारा अभिजात को एक वर्ग के रूप में मानने के विचार की तीव्र आलोचना की गयी है। फ्रेडरिक का विचार यह है कि विशिष्ट वर्ग सम्बन्धी सभी धारणाओं (पैरेटो, मोस्का आदि) की एक सामान्य समस्या यह है कि उन्होंने इस मान्यता को अपना लिया है कि शक्ति धारण करने वाले व्यक्ति एक 'ऐक्यपूर्ण समुदाय' (Cohesive group) का निर्माण करते हैं। वस्तुस्थिति यह है कि वे वर्ग एक-दूसरे का विरोध करते और एक-दूसरे को सन्तुलित करते हैं। सी० राइट मिल्स के द्वारा भी इसी धारणा को अपनाया गया है और एन्थोनी सेम्पसन भी लिखते हैं कि "अभिजात कोई एक अवस्थापन नहीं, वरन् अनेक अवस्थापन (establishments) के रूप में होते हैं जिनके बीच बहुत पतला सम्बन्ध होता है। अभिजात की इन विभिन्न इकाइयों के बीच विरोध और सन्तुलन ही प्रजातन्त्र की रक्षा के श्रेष्ठ साधन हैं।

वस्तुस्थिति यह है कि अभिजात में अनेक इकाइयाँ होती हैं और उनमें सत्ता तथा सर्वाधिक प्रभावपूर्ण स्थिति को प्राप्त करने के लिए प्रतियोगिता होती रहती है, लेकिन कुछ बातों के सम्बन्ध में अभिजात वर्ग से सम्बन्धित सभी इकाइयों के हित एक ही प्रकार के होते हैं। उदाहरण के लिए सभी इकाइयाँ विद्यमान व्यवस्था को बनाये रखना और स्थायित्व प्रदान करना चाहती हैं। जिस सीमा तक उनके हित एक ही हैं. उनके द्वारा परस्पर सहयोग किया जाता है और जिस सीमा तक ये परस्पर सहयोग करती हैं केवल उस सीमा तक ही उन्हें ऐक्यपूर्ण समुदाय' कहा जा सकता है।

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