Saturday, 9 April 2022

नगरीकरण, नगरीयता एवं नगरवाद में अंतर स्पष्ट कीजिये।

नगरीकरण, नगरीयता एवं नगरवाद में अंतर स्पष्ट कीजिये। 

प्रमुख समाजशास्त्रीय श्रीवास्तव ने नगरीकरण, नगरीयता एवं नगरवाद के अंतर को स्पष्ट करते हुए लिखा है कि नगरीयता नगरवासियों की वह स्थिति है जो कि ग्रामवासियों की स्थिति से निभिन्न है। नगरीयता का सन्दर्भ नगर में रहने वाले लोगों की कार्य स्थिति भोजन की आदतों, तनाव के प्रतिमान और जीवन दृष्टिकोण के प्रतिमानों से है। नगरवाद मनोवृत्तियों की एक व्यवस्था है। यह अन्त व्यक्ति के सम्बन्धों के अंतर्गत औपचारिकतावाद, व्यक्तिवाद और गुमनामी के रूप में परिलक्षित होता है। इसी प्रकार श्रीवास्तव जी ने नगरीय लोगों के जीने के ढंग को नगरीयता एवं उनकी मनोवृत्ति को नगरवाद के रूप में रेखांकित किया है। किन्तु जीवन के ढंग और मनोवृत्ति दो सापेक्ष शब्द हैं मनुष्य की मनोवृत्ति जिस प्रकार की होती है, वह उसी प्रकार का जीवन व्यतीत करता भी है। नगरीकरण की प्रक्रिया को अनेक बार नगरवाद से जोड़कर देखा जाता है। जबकि ये दोनों भिन्न है। 

पॉल मीडोज एवं मिसरूची ने लिखा है कि-"नगरीकरण से उस प्रक्रिया का बोध होता है जिसमें (अ) नगरीय मूल्यों का विस्तारण होता है। (ब) गांवों से नगरों की ओर लोग आते हैं। (स) व्यवहारों के प्रमिान परिवर्तित होते हैं और जिनका तादात्मीकरण नगर में रहने वाले समूहों से तालमेल रखता है। वस्तुतः नगरीकरण वह प्रक्रिया है जो नगरीयता को समृद्ध कर उसे ठगों को उन तक पहुंचाता है जो अवगत नहीं रहते। नगरीय सांस्कृतिक प्रतिमानों को सुदूर तक पहुंचाती है। लोगों के साथ-साथ रहने की असहिष्णुता का प्रादुर्भाव करती है अनुकूलन की दशाएं सृजित करती है। विभिन्न आस्थाओं, संस्थाओं, भाषाओं, प्रजातियों, क्षेत्रों के लागों को विजातीयता भरे समुदायों के साथ रखने की प्रेरणा देती है। नवीनता को अपनाने की प्रवृत्ति बढ़ाती है। विभिन्न आर्थिक समूहों में लोगों की गतिशलीता उत्पन्न करती है। वर्गीय संरचना को प्रोत्साहन देती है। लोगों में आधुनिकता का भाव भरती है। और सतत् क्रियाशील रह औद्योगीकरण की सहगामी होती है तथा अधि-संरचना का विस्तार करती है।

नगरीकरण, नगरीयता एवं नगरवाद में अंतर

1. नगरीकरण एक ऐसी प्रक्रिया है जो किसी स्थान की नगरीय विशेषताओं को धारण करता है जबकि नगरीयता एक जीवन पद्धति (way of life) है। जिसमें व्यक्ति नगरीय जीवन को अपनाता है, जबकि नगरवाद नगरीयता अर्थात् व्यक्ति किन आदतों को अपने व्यवहार में शामिल करता है तथा नगरीयता की विशेषताओं को अपनाता है उसे रेखांकित करता है। 

2. नगरीकरण ग्रामीण क्षेत्रों से नगरीय क्षेत्रों ओर जनसंख्या की गतिशीलता को स्पष्ट करता है। जबकि नगरीयता नगर में रहने वाले लोगों की जीवन-पद्धति को प्रदर्शित करता है तथा नगरवाद नगरीयता एवं नगरीकरण की प्रक्रिया के फलस्वरूप उत्पन्न हुई परिस्थितियों को स्पष्ट करता है। 

3. नगरीकरण द्वारा नगरों के निर्माण में सहायता मिलती है, जबकि नगरीयता व्यक्ति के व्यवहारों का निर्धारण करता है तथा नगरवाद व्यवहारों की विशेषताओं को स्पष्ट करता है। 

4. नगरीकरण जहां एक ओर विकास एवं प्रगति को स्पष्ट करता है। वहीं नगरीयता व्यक्ति के जीवन शैली में परिवर्तन को स्पष्ट करता है तथा नगरवाद उन परिवर्तनों में व्यक्ति के सामन्जस्य स्थापित करने की प्रक्रिया को स्पष्ट करता है। 

5. नगरीकरण प्रवर्जन का परिणाम है, जबकि नगरीयता एवं नगरवाद के माध्यम से व्यक्ति नगरीय व्यवहारों एवं जीवनशैली को अपनाता है जो सदैव परिवर्तनशील रहते हैं। इस प्रकार कहा जा सकता है कि नगरीकरण नगरीयता एवं नगरवाद ये अलग-अलग अवधारणायें हैं। 


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