Saturday, 15 January 2022

राज्यपाल की संवैधानिक स्थिति पर प्रकाश डालिए।

राज्यपाल की संवैधानिक स्थिति पर प्रकाश डालिए।

राज्यपाल की संवैधानिक स्थिति

भारत में केन्द्र के समान ही राज्य स्तर पर भी संसदीय शासन की स्थापना की गयी है। इस प्रणाली में शासन की वास्तविक शक्तियाँ मंत्रिपरिषद में निहित होती हैं तथा राज्य का प्रधान राज्यपाल मात्र औपचारिक प्रधान होता है, किन्तु इसका आशय यह नहीं है कि राज्यपाल का पद एक गौण पद है।

राज्य में संवैधानिक तंत्र की विफलता पर, अध्यादेश जारी करते समय, कोई विधेयक राष्ट्रपति के लिए आरक्षित करते समय इत्यादि स्थितियों में राज्यपाल अपने स्वविवेक का प्रयोग कर अपनी दृढ़ता को प्रदर्शित करता है और इस प्रकार राज्य शासन को सुगम एवं कार्यकुशल बनाता है। एम. वी. पायली का कहना ठीक है कि, “राज्यपाल मंत्रिमंडल का सूझ-बूझ वाला परामर्शदाता है जो राज्य की अशान्त राजनीति में शान्त वातावरण पैदा कर सकता है।"

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