Sunday, 5 December 2021

उत्तराखंड की प्रमुख झीलों के नाम - List of Lakes in Uttrakhand in Hindi

Uttarakhand ki Pramukh Jheel in Hindi: इस आर्टिकल में आपको उत्तराखंड की प्रमुख झीलों के नाम, तथा वे झीलों किस जिले में स्थित है, की सूची उपलब्ध कराई जा रही है। List of Lakes in Uttrakhand in Hindi

उत्तराखंड की प्रमुख झीलों के नाम - List of Lakes in Uttrakhand in Hindi

उत्तराखंड की प्रमुख झीलों की सूची

 झील / Lakeशहर / City

भीमताल झील (Bhimtal Lake)

काठगोदाम (Kathgodam)

नैनीताल झील (Nainital Lake)

नैनीताल Nainital district

रुपकुण्ड झील (Roopkund Lake)

चमोली (Chamoli)

देवरिया ताल (Deoria Tal)

देवप्रयाग (Devprayag)

केदार ताल (Kedar Tal)

गढ़वाल (Garhwal)

सूर्यधर झील (Suryadhar lake)

डोईवाला (Doiwala)

मालाताल झील (Malatal Lake)

उत्तराखंड (Uttarakhand)

डोडीताल (Dodital)

उत्तरकाशी (Uttarkashi)

सात ताल (Sattal Lake)

नैनीताल (Nainital district)

नचिकेता ताल (Nachiketa Tal)

उत्तरकाशी (Uttarkashi)

नैनीताल झील (Nainital Lake)

नैनीताल झील उत्तराखंड के नैनी जिले में है। स्‍कंद पुराण में इसे त्रिऋषि सरोवर भी कहा गया है।  इस झील के उत्‍तरी किनारे को मल्‍लीताल और दक्षिणी किनारे को तल्‍लीताल कहते हैं। रात के समय जब चारों ओर बल्बों की जगमगाती रोशनी होती है तो इसकी सुंदरता और अधिक बढ़ जाती है। नैनीताल झील एक पौराणिक झील है। एक मान्यता के अनुसार जब अत्री, पुलस्त्य और पुलह ऋषि को नैनीताल में कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने एक गड्ढा खोदा और मानसरोवर झील से पानी लाकर उसमें भरा। इसीलिए यहाँ डुबकी लगाने से उतना ही पुण्य मिलता है जितना मानसरोवर नदी में नहाने से मिलता है। 

भीमताल झील (Bhimtal Lake)

भीमताल एक त्रिभुजाकर झील है। यह झील उत्तरांचल में काठगोदाम से 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। भीमताल की लम्बाई 1674 मीटर, चौड़ाई 447 मीटर तथा गहराई लगभग 15 से 50 मीटर तक है।  नैनीताल से भी यह बड़ा ताल है। नैनीताल से भीमताल की दूरी २२.५ कि. मी. है। नैनीताल की तरह इसके भी दो कोने हैं जिन्हें तल्ली ताल और मल्ली ताल कहते हैं। यह भी दोनों कोनों सड़कों से जुड़ा हुआ है।

रुपकुण्ड झील (Roopkund Lake)

रूपकुंड जिसे कंकाल झील भी कहा जाता है, भारत उत्तराखंड राज्य के चमोली जिले में स्थित है। यह झील हिमालय पर लगभग 5029 मीटर (16499 फीट) की ऊंचाई पर स्थित है। जो अपने किनारे पर पाए गये पांच सौ से अधिक मानव कंकालों के कारण प्रसिद्ध है। यह स्थान निर्जन है और  इन कंकालों को 1942 में नंदा देवी शिकार आरक्षण रेंजर एच. के. माधवल, ने पुनः खोज निकाला। यात्री के लिए रूपकुंड जाने के कई रास्ते हैं। आम तौर पर, ट्रेकर और रोमांच प्रेमी सड़क मार्ग से लोहाजंग या वाँण से रूपकुंड की यात्रा करते हैं। वहां से, वे वांण में एक पहाड़ी पर चढ़ते है और रणका धार पहुंचते हैं। वहां कुछ समतल क्षेत्र है जहां ट्रेकर रात को शिविर लगा सकते हैं।

केदार ताल (Kedar Tal)

केदार ताल, उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले में स्थित एक प्राकृतिक झील है जो समुद्र तल से 15000 फीट की ऊँचाई पर है। केदारताल से केदारगंगा निकलती है जो भागीरथी की एक सहायक नदी है। इसके पास ही प्रसिद्ध माउंट थलयसागर, माउंट भृगुपंथ, मांडा पर्वत, माउंट जोगिन, माउंट गंगोत्री स्थित हैं जो अपनी चोटियों के प्रतिबिंब से ताल की शोभा में चार चांद लगाते हैं। कहीं शांत और कहीं कलकल करती यह नदी विशाल पत्थरों और चट्टानों के बीच से अपना रास्ता बनाती है। अपने आप को पूर्ण रूपेण गंगा कहलाने के लिए गंगोत्री के समीप यह भागीरथी में मिल जाती है।

देवरिया ताल (Deoria Tal)

देवरिया ताल रूद्रप्रयाग से 49 किमी की दूरी पर स्थित एक सुंदर पर्यटन झील है। यह झील समुद्र तल से 2438 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस झील में देवता स्नान करते थे अतः पुराणों में इसका उल्लेख ‘इंद्र सरोवर’ के नाम से किया गया है। देवरिया ताल से महाभारत काल की एक बड़ी ही रोचक कथा जुडी है जिसके अनुसार जब पांडव  वनवास पर थे तब उन्हें एक बार बहुत प्यास लगी थी तब पांडव पानी पीने के लिए एक सरोवर के पास जाते हैं जहां उनसे पानी पीने से पूर्व यक्ष द्वारा कुछ प्रश्न पूछे जाते है परन्तु वे सही उत्तर न देने के कारण मुर्छित हो जाते हैं। तत्पश्चात युधिष्ठिर अपने भाइयो की खोज निकलते हैं , जहाँ उन्हें सभी भाई मुर्छित अवस्था में मिलते हैं। तभी युधिष्ठिर की भेंट यक्षराज से होती है। युधिष्ठिर यक्ष द्वारा पूछे जाने वाले सभी प्रश्नों का सही-सही जवाब देते हैं जिससे प्रसन्न होकर यक्ष उनके सभी भाइयों को जीवित कर देते हैं।

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