Saturday, 27 July 2019

Radio Par Nibandh in Hindi - रेडियो पर निबंध

Radio par nibandh in hindi : दोस्तों आज हमने रेडियो पर निबंध लिखा है। यह निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 और 12 के लिए उपयुक्त है। Here you will find essays and paragraph on Radio and its importance in Hindi for students.

Radio Par Nibandh in Hindi - रेडियो पर निबंध

रेडियो संचार का एक प्रमुख साधन है। रेडियो पर इस निबंध के माध्यम से हम जानेंगे कि रेडियो का आविष्कार किसने किया, रेडियो से हमें क्या लाभ हैं, रेडियो का आधुनिक जीवन में क्या महत्व है तथा रेडियो काम कैसे करता है। छात्र अपनी सुविधानुसार छोटे बड़े निबंध चुन सकते हैं।

Radio Par Nibandh in Hindi for Class 1 & 2

रेडियो विज्ञान का एक अद्भुत और नायाब चमत्कार है, जिसने संचार के क्षेत्र में क्रांतिकारी परिवर्तन किया है। सन 1895 में इटली के महान वैज्ञानिक मारकोनी ने रेडियो का आविष्कार किया। उन्हें अपनी इस खोज के लिए सन 1909 में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित किया गया। वर्तमान युग में रेडियो संचार के प्रमुख साधन के रूप में उभरा है। आज हम अपने कमरे में बैठे-बैठे रेडियो द्वारा न्यूयॉर्क में स्थित संयुक्त राष्ट्र संघ की बहस सुन सकते हैं तो कभी दिल्ली और लंदन के गाने सुन सकते हैं। स्विच घुमाया नहीं कि इंग्लैंड का समाचार आ जाता है। क्षण भर में ही किसी दूरस्थ कवि सम्मेलन का आनंद घर बैठे ही लिया जा सकता है। कहने का तात्पर्य यह है कि एक ही स्थान पर बैठे बैठे दुनिया के अनेक स्थानों का समाचार सुना जा सकता है। संचार की संपूर्ण गतिविधि हमारे हाथों के एक इशारे पर तुरंत हमारे सम्मुख आ जाती है। यद्यपि टेलीविजन के आविष्कार के बाद रेडियो के प्रयोग में कमी आई है। परंतु टेलीविजन के आविष्कार का मार्ग रेडियो ने ही प्रशस्त किया है। अंतरिक्ष सैटेलाइट तथा दूसरे ग्रह पर भेजे गए उपग्रहों का संचालन आज भी रेडियो तरंगों के माध्यम से ही किया जाता है। इसलिए यद्यपि मनोरंजन के क्षेत्र में टेलीविजन रेडियो के प्रयोग में कमी आई है परंतु अन्य क्षेत्रों में यह आज भी अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है और निभाता रहेगा।

Radio Par Nibandh in Hindi For Class 3 & 4

रेडियो मनोरंजन का सर्वाधिक लोकप्रिय साधन है। आज आपको घर-घर गली-गली, सड़कों, बाजारों, होटलों विश्राम ग्रह तथा बसों और कारों में रेडियो की आवाज सुनाई दे जायेगी। यह एक ऐसा सुविधाजनक यंत्र है जिसके माध्यम से हम किसी भी स्थान पर बैठे-बैठे या चलते-फिरते अपना मनोरंजन कर सकते हैं। छोटे-छोटे ट्रांजिस्टर के रूप में इसका विकास हो जाने पर तो यह और भी उपयोगी और सुविधाजनक बन गया है। रेडियो का आविष्कार हुए अभी बहुत अधिक वर्ष नहीं हुए। सन 1895 में इटली के प्रसिद्ध वेज्ञानिक मारकोनी ने इस का आविष्कार किया था। सबसे पहले इंग्लैंड (1921) में रेडियो का ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन स्थापित किया गया।रेडियो पर प्रसारित होने वाले कार्यक्रमों का संचालन विभिन्न ब्रॉडकास्टिंग स्टेशनों द्वारा किया जाता है। यह ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन बड़े-बड़े शहरों में स्थित होते हैं। हमारे रेडियो में एक सुई लगी रहती है, जिसे घुमाने से हमारा रेडियो निश्चित फ्रीक्वेंसी की तरंगों को पकड़ने लगता है। इससे हम उन स्टेशनों के प्रोग्राम सुन सकते हैं। रेडियो मनोरंजन का भी उत्तम साधन है। रेडियो के कार्यक्रमों में सुगम शास्त्रीय संगीत, आधुनिक गाने, ग़ज़ल, कव्वाली, लोकगीत, बच्चों के कार्यक्रम तथा अन्य ज्ञानवर्धक जैसे समाचार, मौसम की भविष्वाणी, शेयर मार्केट की जानकारी के कार्यक्रम प्रसारित होते हैं। जिनसे श्रोता अपनी रुचि के अनुसार अपना भरपूर मनोरंजन कर सकते हैं। यह रेडियो तरंगें बड़ी तीव्र  गति से चलती हैं। इनकी रफ़्तार प्रकाश की चाल के बराबर होती है। अंतरिक्ष का चक्कर लगाती सेटेलाइट भी रेडियो के द्वारा ही पृथ्वी पर जानकारी भेजती हैं। अतः स्पष्ट है कि रेडियो एक महत्वपूर्ण संचार का साधन है। इसका भविष्य बड़ा उज्जवल है।

Radio Par Nibandh in Hindi for Class 5, 6, 7

प्रस्तावना : बिजली के आविष्कार के पश्चात मनुष्य ने बिजली से चलने वाले जिसने भी नए आविष्कार किये हैं, रेडियो भी उन्हीं में से एक है। हम अपने कमरे में बैठे हुए रेडियो के द्वारा सारे संसार से अपना संबंध स्थापित कर लेते हैं। अपने घर पर बैठे-बैठे हम एक बटन दबाते हैं और किसी अच्छे संगीतज्ञ का सुमधुर गाना सुनने लगते हैं या पंडित जवाहरलाल, सरदार पटेल आदि का भाषण सुनने लगते हैं। कभी बच्चों की सभा की मनोरंजक बातचीत रेडियो पर सुनते हैं तो कभी स्त्रियों के लिए रोचक और उपयोगी बातें। देश-विदेश की खबरें जानने के लिए हमें अब अखबार पढ़ने की जरूरत भी नहीं रही। हम रेडियो पर दुनिया भर की खबरें सुन सकते हैं।

कैसे काम करता है रेडियो : रेडियो पर भिन्न-भिन्न स्थानों से कार्यक्रम का प्रसारण किया जाता है। इन स्थानों को ब्रॉडकास्ट इन स्टेशन कहते हैं। स्टेशनों पर एक माइक्रोफोन यंत्र लगा रहता है। इस यंत्र की रचना टेलीफोन के बोलने वाले भाग से मिलती जुलती होती है। इसमें बिजली की धारा गुजरती रहती है। गायक या वक्ता माइक्रोफोन के सामने मुंह करके गाता या बोलता है। इससे वायु में ध्वनि की लहरें विद्युत् चुंबकीय तरंगों का रूप धारण कर लेती हैं। यह तरंगे तार में से गुजरती हुई एक और यंत्र में से गुजरती है, जो इन तरंगों की शक्ति को हजार गुना तेज कर देता है। यहां से यह ब्रॉडकास्ट स्टेशन के एरियल  में जाती हैं। यह एरियल बहुत ऊंचे होते हैं। एरियल इन तरंगों को आकाश में फैला देते हैं। एरियल से होती हुई तरंगे सारे भूमंडल में बड़े वेग से फैल जाती हैं। इनकी चाल बहुत तेज होती है। यह एक सेकेंड में साथ बार सारे भूमंडल के चारों ओर चक्कर लगा सकती हैं।

हमारे घर के रेडियो का एरियल उन विद्युत् चुंबकीय तरंगों को पकड़कर फिर से ध्वनि रूप देकर वायु में छोड़ता है। और हम उस गीत या भाषण को सुन पाते हैं। हमारा रेडियो हमारी इच्छा अनुसार हमें कोलकाता, मुंबई, लंदन, जर्मनी, फ्रांस या दुनिया के किसी भी देश का प्रोग्राम सुना सकता है। हर एक ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन की तरंगों की अलग-अलग फ्रीक्वेंसी होती है। हमारे रेडियो में भी एक सुई लगी रहती है जिसे घुमाने से हमारा रेडियो निश्चित फ्रीक्वेंसी की तरंगों को पकड़ने लगता है। इससे हम उन स्टेशनों के प्रोग्राम सुन सकते हैं।

रेडियो के आविष्कार की जरुरत : रेडियो का आविष्कार करने की आवश्यकता भी इस कारण हुई थी कि टेलीफोन के लिए तारों और खम्भों को लगाने में करोड़ों रुपया तथा बहुत अधिक मजदूरी करनी पड़ती थी। फिर समुद्र, नदियों, पहाड़ों तथा अन्य दुर्गम स्थानों पर तो खम्भों को लगाना असंभव या अत्यंत कठिन हो जाता था। भारत के प्रसिद्ध वेज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु (बेतार के तार) और इटली के वैज्ञानिक मारकोनी ने रेडियो का आविष्कार करके सचमुच दुनिया पर बहुत बड़ा उपकार किया है। आजकल जहाजों और हवाई जहाज में रेडियो का प्रबंध होता है। जब किसी जहाज पर कोई आपत्ति आ जाती है तो वह रेडियो द्वारा अपने समाचार भेजता है और आसपास के जहाज उसकी उसकी सहायता के लिए तुरंत पहुंच जाते हैं।

उपसंहार : रेडियो केवल मनोरंजन की सामग्री नहीं है। इससे देश-विदेश के समाचार तथा विद्यार्थियों की शिक्षा के लिए उपयोगी कार्यक्रमों का प्रसार भी दिया जाता है। जब देश का विभाजन हुआ था तो शरणार्थी भाइयों के पत्ते भी उनके संबंधी रेडियो के द्वारा ही पूछा करते थे। सरकारी या राजनीतिक दल कोई सूचना या कोई महत्वपूर्ण घोषणा एक ही क्षण में सम्पूर्ण देश में रेडियो के द्वारा पहुंचा देते हैं। महात्मा गांधी के प्रार्थना प्रवचन भी रेडियो पर 10 से 15 दिन तक लगातार प्रसारित किए जाते रहे। अंतरिक्ष का चक्कर लगाती सेटेलाइट भी रेडियो के द्वारा ही पृथ्वी पर जानकारी भेजती हैं। चंद्रमा के अज्ञात भाग का चित्र भी रेडियो द्वारा ही प्राप्त किया गया और वैज्ञानिक लोग अपनी प्रयोगशाला में बैठे-बैठे चन्द्रमा तक पहुंचने वाले राकेट का संचालन भी रेडियो तरंगो द्वारा ही करते हैं। वर्तमान में भारत द्वारा भेजा गया चंद्रयान भी रेडियो तरंगों द्वारा ही नियंत्रित किया जाता है। सचमुच रेडियो बहुत ही  चमत्कारी और उपयोगी आविष्कार है।

Radio Par Nibandh in Hindi for Class 8, 9, 10

प्रस्तावना : वर्तमान युग विज्ञान का युग है आज विश्व के कोने-कोने में विज्ञान का डंका बज रहा है। चारों और वैज्ञानिक अविष्कारों और अनुसंधान की धूम मची हुई है। रेल, मोटर, वायुयान, तार, टेलीफोन, टेलीविजन, रेडियो आदि आविष्कार जिन्हें देखकर हम आश्चर्य के सागर में गोते लगाते हैं, विज्ञान की ही देन है। कौन जानता था कि एक दिन मनुष्य घर बैठे ही विश्व भर के समाचारों से तत्काल अवगत हो जाएगा। रेडियो ने यह कार्य कर दिखलाया है।

रेडियो क्या है : रेडियो एक यंत्र है जिसके द्वारा बिना तार की सहायता के कितनी ही दूरी की ध्वनि सुनी जा सकती है। यह वायु की तरंगों से ध्वनियों को पकड़कर उन्हें प्रसारित करता है। इसका उपयोग संदेश, व्याख्यान और संगीत सुनने के लिए किया जाता है। लगभग प्रत्येक बड़े नगर में रेडियो संदेश भेजने का स्थान होता है जिसे ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन कहते हैं। वहां से समाचार, व्याख्यान या संगीत कार्यक्रम संचालित किये जाते हैं।

रेडियो का जन्म और विकास : रेडियो का आविष्कार हुए अभी बहुत अधिक वर्ष नहीं हुए। सन 1895 में इटली के प्रसिद्ध वेज्ञानिक मारकोनी ने इस का आविष्कार किया था। सबसे पहले इंग्लैंड में रेडियो का ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन स्थापित किया गया। तब से अब तक इसमें निरंतर सुधार और उन्नति होती आई हैं। अंग्रेजो के कारण भारतवर्ष में धीरे-धीरे इसका प्रचार हो गया। ब्रॉडकास्टिंग स्टेशन पर सरकार का अधिकार है। वहां से देश भर में समाचार भेजे जाते हैं। आज देश के प्रत्येक व्यक्ति के मोबाइल पर रेडियो पाया जाता है।

रेडियो से लाभ : रेडियो से अनेक लाभ हैं जिन्हे निम्न बिंदुओं के द्वारा समझा जा सकता है।

सुदूर देशों के समाचार तथा व्याख्यान सुनने की सुविधा : इस यंत्र की सहायता से मनुष्य अपना सुदूर देशों से भली भाति संबंध स्थापित कर सकता है। सात समुद्र पार देशों के समाचार और व्याख्यान तत्काल सुन लिए जाते हैं। न्यूयॉर्क में भाषण देने वाले मनुष्य को तत्काल आगरा में बैठा हुआ व्यक्ति सुन लेता है। ऐसा प्रतीत होता है कि व्याख्यान देने वाला सामने खड़ा हुआ व्याख्यान दे रहा है और हम उसके मुख से व्याख्यान सुन रहे हैं। रेडियो के अभाव में पहले इस काम में बहुत समय लगता था।

रेडियो शासन प्रबंध में सहायक : रेडियो से सरकार को शासन प्रबंध में बड़ी सहायता मिलती है। इसके द्वारा सरकार अपनी नीति की घोषणा शीघ्रता के साथ देश के कोने-कोने में कर सकती है। और जनता की विचारधारा को अपनी नीति संचालित करने वाले महान पुरुषों के व्याख्यान द्वारा प्रभावित किया जा सकता है। युद्ध के समय रेडियो की उपयोगिता और भी बढ़ जाती है। सैनिकों के ह्रदय में वीरता की भावना जागृत की जाती है और उन्हें शत्रु से लोहा लेने के लिए उत्साहित किया जाता है। युद्ध का प्रचारात्मक कार्य करने के लिए इससे अच्छा और क्या साधन हो सकता है?

रेडियो और मनोरंजन : रेडियो मनोरंजन का भी उत्तम साधन है। दिनभर की थकान और परिश्रम के बाद रेडियो मनोरंजन द्वारा मन को तनावमुक्त व तरोताजा कर देता है। विश्व भर के समाचार, प्रमुख ख़बरें, राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय संगीत एक बटन दबाते ही आपकी सेवा में तत्काल उपस्थित हो जाते हैं। इसके अतिरिक्त घरेलू महिलाएं रेडियो पर कुकिंग कार्यक्रम सुनकर अपने ज्ञान में वृद्धि कर सकती हैं। बच्चों के लिए रेडियो पर कई शैक्षिक कार्यक्रम भी प्रसारित किए जाते हैं जो ज्ञान तो बढाते ही हैं साथ ही मनोरंजक भी होते हैं। इस प्रकार रेडियो मनोरंजन का एक उत्तम साधन है।

शिक्षा प्रचार एवम् सुधार : रेडियो द्वारा शिक्षा प्रसार के क्षेत्र में बड़ी तेजी से काम किया जा रहा है। रेडियो पर अनेक ऐसे कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं जिनमें नवीन-नवीन विषयों पर प्रकाश डाला जाता है। हमारे देश में विद्यालयों की कमी है। प्रत्येक गांव में समाचार पत्र नहीं पहुंचते। अतः ग्रामीण जनता देश-विदेश के समाचार से अनभिज्ञ रहती है। रेडियो द्वारा देश-विदेश के समाचार सुनकर उनकी कूपमंडूकता दूर की जा सकती है। यदि किसी कुप्रथा के विरुद्ध रेडियो स्टेशन पर किसी प्रसिद्ध एवं प्रभावशाली व्यक्ति का भाषण कराया जाए और उसे दूर-दूर तक लोगों तक पहुंचाया जाए तो इसके द्वारा सामाजिक सुधार भी किया जा सकता है। इसके अतिरिक्त रेडियो में विभिन्न कृषि से संबंधित कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। जिसमें कृषि वैज्ञानिक हमारे किसान भाइयों को बताते हैं कि उन्हें किस प्रकार खेती करनी चाहिए तथा किस प्रकार के बीजो का प्रयोग करना चाहिए।

उपसंहार : अतः स्पष्ट है कि रेडियो एक महत्वपूर्ण संचार का साधन है। इसका भविष्य बड़ा उज्जवल है। इसे देश की उन्नति बहुत शीघ्र हो सकती है। देश के कोने कोने में इसके प्रचार की आवश्यकता है। ग्राम सुधार के लिए तो यह एक आदर्श साधन है। यदि कोई वस्तु गांव को उन्नति के पथ पर अग्रसर कर सकती है, यदि कोई वस्तु गांव को निरक्षरता के अभिशाप से मुक्त कर सकती है तो वह रेडियो है।

Radio Par Nibandh in Hindi for Class 10th, 11th, 12th

रेडियो विज्ञान की लोकप्रिय देन : रेडियो विज्ञान की लोकप्रिय देन है। विद्युत चुंबकीय तरंगों का क्रांतिकारी चमत्कार है। मनोरंजन और ज्ञान वर्धन का श्रेष्ठ साधन है। वर्तमान समाज की आवश्यकता पूर्ति का माध्यम है।  आधुनिक काल में रेडियो के आविष्कार का श्रेय इटली निवासी वैज्ञानिक मारकोनी हो जाता है। इन्हीं दिनों इस दिशा में भारत के महान वैज्ञानिक श्री जगदीशचंद्र बोस ने भी काफी प्रयत्न किए थे।

स्वाधीनता के पहले भारत में रेडियो : भारत में मुंबई और कोलकाता के दो निजी स्वामित्व वाले ट्रांसमीटरों की सहायता से रेडियो प्रसारण 1927 में आरंभ हुआ। 1936 में सरकार ने इसे अपने हाथ में लेकर भारतीय प्रसारण सेवा की स्थापना की और इसका नाम बदलकर ऑल इंडिया रेडियो रखा गया। 1957 में इसे आकाशवाणी नाम से भी जाना जाने लगा।

क्या है रेडियो : रेडियो ध्वनि प्रसारण का यंत्र है। एक स्थान की आवाज को दूसरे स्थान तक पहुंचाने का काम यह बिना तार के करता है। बिजली द्वारा आकाशवाणी केंद्र से ध्वनि को विद्युत चुंबकीय तरंगों में बदला जाता है। यह विद्युत चुंबकीय तरंगें सारे आकाश में फैल जाती हैं। आकाश में फैली हुई इन तरंगों को रेडियो एरियल द्वारा तुरंत पकड़ लेता है।

ध्वनि तरंगें तीन रूप में प्रसारित होती हैं-छोटी तरंगे, मध्यम तरंगे और लंबी तरंगे। इसी के अनुसार रेडियो भी तीन प्रकार के होते हैं-स्थानीय यानी लोकल रेडियो, अखिल भारतीय (ऑल इंडिया) और समस्त विश्व से संबंधित ऑल वर्ल्ड रेडियो। स्थानीय रेडियो पर केवल स्थान विशेष के आकाशवाणी केंद्र द्वारा प्रसारित ध्वनि ही सुन सकते हैं। अखिल भारतीय रेडियो द्वारा संपूर्ण भारत के आकाशवाणी केंद्रों की ध्वनि सुन सकते हैं और विश्व रेडियो द्वारा संसार भर के प्रमुख आकाशवाणी केंद्रों की ध्वनि सुनी जा सकती है। रेडियो की मशीन में ऐसी व्यवस्था होती है कि श्रोता अपनी इच्छा अनुसार किसी भी आकाशवाणी केंद्र से प्रसारित होने वाले कार्यक्रम को सुन सकते हैं।

स्वतंत्र भारत में रेडियो का विस्तार : 1947 में स्वाधीनता के समय देश में आकाशवाणी के 6 केंद्र थे। 31 मार्च 1998 तक आकाशवाणी नेटवर्क के 197 केंद्र हो गए। इस समय आकाशवाणी के 305 ट्रांसमीटर काम कर रहे हैं। इनमें 145 मीडियम वेव, 55 शार्टवेव और 105 एफएम ट्रांसमीटर हैं। इस नेटवर्क द्वारा देश के 90% क्षेत्रों में कुल 97.3% जनसंख्या तक आकाशवाणी प्रसारण पहुंचते हैं।

रेडियो समाचार प्रसारण का मुख्य साधन है। इससे प्रतिदिन देश-विदेश प्रसारण सेवा में प्रतिदिन 314 समाचार बुलेटिन प्रसारित होते हैं। इनमें से 88 बुलिटिन दिल्ली से घरेलू सेवा में, 42 क्षेत्रीय समाचार सेवा में, 137 समाचार बुलेटिन प्रसारित होते हैं। 15 अगस्त 1993 में अंग्रेजी के समाचार पुल के समान ही हिंदी के समाचार पुल ने भी काम करना शुरू कर दिया। 25 फरवरी 1998 से एफएम चैनल पर प्रमुख समाचार प्रसारित कर रहा है। अब यह समाचार दिन-रात पढ़े जा रहे हैं। 25 फरवरी 1998 से ही आकाशवाणी से फोन पर समाचार देने की सुविधा शुरू की जा चुकी है। आकाशवाणी अब इंटरनेट पर भी आ गई है।

विदेश सेवा प्रभाग द्वारा 25 भाषाओं (16 विदेशी तथा 9 भारतीय भाषाओं) में लगभग 70 घंटों के कार्यक्रम प्रतिदिन प्रसारित किए जाते हैं। यह प्रसारण जनरल ओवरसीज सर्विसेस (समुद्र पार सेवा) के अंतर्गत प्रसारित होते हैं। इनके द्वारा विश्व घटनाओं पर भारत का दृष्टिकोण भी प्रस्तुत किया जाता है।

18 नवंबर 1988 से आकाशवाणी का राष्ट्रीय चैनल आरंभ हुआ। फिलहाल यह रात्रि सेवा के रूप में कार्य कर रहा है। यह चैनल सूचना व मनोरंजन का संतुलित प्रसारण करता है। रात भर राष्ट्रीय चैनल से हर घंटे बारी-बारी से हिंदी व अंग्रेजी में समाचारों का प्रसारण किया जाता है।

1 नवंबर 1967 से आकाशवाणी ने विविध भारती तथा विज्ञापन प्रसारण सेवा का आरंभ किया। विविध भारती का मूल उद्देश्य है-मनोरंजन इसमें वर्तमान समय में प्रतिदिन 14 घंटे से अधिक मनोरंजन कार्यक्रमों का प्रसारण किया जाता है।

आकाशवाणी के 80 से भी अधिक केंद्रों में विभिन्न भाषाओं में रूपक प्रसारित किए जाते हैं। मूल नाटकों के साथ ही लोकप्रिय और उत्कृष्ट उपन्यास, लघु कथाएं और मंच नाटक भी प्रसारित किए जाते हैं। अनेक केंद्र बेरोजगारी, निरक्षरता, पर्यावरण प्रदूषण, नारी समस्या जैसी सामाजिक सामाजिक आर्थिक विषयों को नाटक के माध्यम से प्रसारित करते हैं।

कृषि और ग्रह कार्यक्रम के अंतर्गत यूनिसेफ और राज्य सरकारों के सहयोग से प्रसव से लेकर मां बच्चे की देखभाल, बच्चों के अधिकार, बच्चे-बच्ची में भेद नहीं तथा बच्चों के शोषण आदि मुद्दों पर जोर दिया जाता है ,कृषि कार्यक्रम संचार विधि के रूप में फार्म स्कूल ऑफ एयर कार्यक्रम कई आकाशवाणी केंद्र चलाते हैं। जिसमें खेती बाड़ी की संपूर्ण जानकारी के अतिरिक्त ग्राम पंचायतों, ग्राम सेवकों, जवाहर रोजगार योजना, इंदिरा गांधी आवासीय योजना जैसे विभिन्न आर्थिक उपायों पर भी जोर दिया जाता है।

परिवार कल्याण कार्यक्रम के अंतर्गत 8500 से अधिक कार्यक्रम देश की सभी भाषाओं तथा बोलियों में प्रति महीने प्रसारित किए जाते हैं। इस कार्यक्रम के अंतर्गत तपेदिक, एड्स, डेंगू, यौन रोग, पानी से फैलने वाले रोगों , मलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम, बाल सुरक्षा तथा सुरक्षित मातृत्व, नसबंदी और बंध्याकरण जैसे राष्ट्रीय महत्व के कार्यक्रम प्रसारित होते हैं।

राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय और विश्व में आयोजित खेल प्रतियोगिताओं का आंखों देखा हाल रेडियो में प्रस्तुत किया जाता है। यह युवकों की प्रतिभा विकसित करने के अनेक अन्य कार्यक्रम भी प्रसारित करता है।

रेडियो मनोरंजन का साधन : रेडियो मनोरंजन का भी सशक्त और प्रमुख साधन है। शास्त्रीय और सुगम संगीत के बहुत अधिक कार्यक्रम प्रसारित किए जाते हैं। सिनेमा गीत श्रवण में जनता मंत्रमुग्ध हो इन गाने के संगीत स्वर लहरी तथा बोलों में खो जाती है। इतना ही नहीं सैनिकों के लिए यह कार्यक्रम जयमाला के अंतर्गत प्रतिदिन उनके अनुरोध पर गीत सुनाता है।

रेडियो ज्ञानवर्धन में सहायक : रेडियो ज्ञान वर्धन का प्रमुख साधन है। समाचारों द्वारा रेडियो हमें विश्व की नवीनतम घटनाओं से परिचित कराता है। विश्व की प्रमुख घटनाओं तथा संसद की कार्यवाही की समीक्षा हमारे ज्ञान को बढ़ाती है। बच्चों के कार्यक्रम में बच्चों के लिए तथा महिलाओं के कार्यक्रम में महिलाओं के लिए पाक विज्ञान, कढ़ाई, बुनाई, घर की देखरेख, शिशु पालन आदि की रोचक तथा ज्ञानवर्धक कार्यक्रम प्रसारित होते हैं। समय-समय पर विशेषज्ञों द्वारा राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक, धार्मिक, साहित्यिक एवं जीवन और जगत की समस्याओं पर विद्वता पूर्ण भाषण हमारे ज्ञान को विस्तृत करते हैं। शासन की सूचनाओं की जानकारी देते हैं और शासकीय कर्तव्यों के प्रति जागरूक रखते हैं। नवीन पुस्तकों की समीक्षा प्रसारित कर हमारी साहित्यिक रुचि में अभिवृद्धि करते हैं। स्वास्थ्य संबंधी चर्चा बीमारियों से बचाव के उपायों में ज्ञान वृद्धि करती है।

उपसंहार : व्यापार वर्धन के लिए रेडियो वर्तमान जगत का एक सशक्त साधन है। विविध भारती से व्यापारिक विज्ञापन और प्रायोजित कार्यक्रम व्यापार की श्री वृद्धि करते हैं। वस्तु विशेष के प्रति आकर्षण उत्पन्न कर नए-नए ग्राहक पैदा करते हैं। निष्कर्ष के रूप में आकाशवाणी जन-जन की आशाओं का केंद्र है। शिक्षा संस्कृति के प्रसार का सशक्त माध्यम है। स्वस्थ मनोरंजन और विशिष्ट ज्ञानार्जन का प्रमुख साधन है। बौद्धिक विकास और मानसिक परिष्कार का वैज्ञानिक यंत्र है और है व्यापार वर्धन की कुंजी।

रेडियो पर निबंध (Essay on importance of radio in hindi)

मनुष्य ने रेल मोटर जहाज वायु यान आदि बनाकर स्थल जल तथा आकाश पर विजय प्राप्त कर ली है। विज्ञान के यह आविष्कार जहां मनुष्य समाज के लिए अति लाभकारी हुए हैं, वहां युद्ध के समय उतने ही विनाशकारी भी सिद्ध हुए हैं। वास्तव में विज्ञान के आविष्कार जहां एक और मनुष्य के लिए वरदान सिद्ध हुए हैं वहीं दूसरी ओर समय-समय पर अभिशाप के रूप में भी सिद्ध हुए हैं। परंतु रेडियो का आविष्कार अन्य वैज्ञानिक आविष्कारों से कुछ अलग है। यह चमत्कार में अन्य आविष्कारों से कहीं आगे का है। वही संसार पर उपकार करने की योग्यता भी इसमें बहुत अधिक है। मनुष्य ने प्रायः सभी वैज्ञानिक आविष्कारों का दुरुपयोग किया है। किंतु रेडियो द्वारा युद्ध समय में भी इससे बहुत हानि ना होकर लाभ ही हुआ है। रेडियो का आविष्कार वस्तुतः विज्ञान पर चार चांद लगाने वाला है।

रेडियो का आविष्कार : रेडियो का आविष्कार किसने किया, इस संबंध में हमें पहले कुछ महत्वपूर्ण तथ्य जानने होंगे। जेम्स क्लर्क मैक्सवेल पहला व्यक्ति था जिसने बिजली की तरंगों का सिद्धांत सर्वप्रथम संसार के सामने प्रतिपादित किया। सन 1887 में हर्ट्ज़ ने इन विद्युत तरंगों का परीक्षण करने के पश्चात यह विवेचना कि जिस प्रकार रोशनी तथा गर्मी की तरंगें हैं, उसी प्रकार बिजली की भी तरंगे होती हैं। उन दोनों के बाद फ्लेमिंग ने अपना अन्वेषण किया। 1894 में जगदीश चंद्र बसु ने बिना तार के भेजी गई विद्युत तरंगों से पिस्तौल चला दिया। और 1895 में मारकोनी ने बिना तार के विद्युत संदेश भेजा। इस प्रकार रेडियो किसी एक व्यक्ति की खोज ना होकर एक सम्मिलित प्रयास का नतीजा था, परंतु मारकोनी को ही आधुनिक रेडियो का आविष्कारक माना गया।

रेडियो का सार्वजनिक महत्व : रेडियो ने लोकहित संपादन में जो महत्वपूर्ण कार्य किया है, वह सर्वविदित है। मनोरंजन का साधन तो रेडियो था ही परंतु विश्व की एकता स्थापित करने में इसका बड़ा हाथ है। मीलों दूर बैठा व्यक्ति एक सेकंड में दूसरे व्यक्ति को अपनी आवाज पहुंचा कर उससे संबंध स्थापित कर सकता है। और परस्पर समाचारों का आदान प्रदान कर सकता है। डाक तथा समाचार पत्रों द्वारा यह समाचार जहां अनेक दिनों के बाद एक दूसरे तक पहुंचाए जा सकते हैं। वहीं रेडियो द्वारा एक क्षण में ही यह काम किया जा सकता है। इससे परस्पर सानिध्य का बढ़ना स्वाभाविक है।

रेडियो युद्ध शांति में सहायक : युद्ध की अवस्था में भी कई देशों ने रेडियो का आश्रय लेकर परस्पर संधि एवं शांति के प्रस्तावों को कार्यान्वित किया। जिन्हें वे एक दूसरे के पास जाकर प्रस्तुत करना जातीय अभिमान के विरुद्ध समझते। इससे युद्ध की समाप्ति में और विश्व शांति की स्थापना में स्पष्ट रूप से सहायता प्राप्त हुई है। मनुष्य समाज को इस उपकार के लिए रेडियो के प्रति ऋणी होना चाहिए।

समाचार तथा सन्देश भेजने में रेडियो का महत्व : समाचारों का एक स्थान से दूसरे स्थान पर प्रकाश की गति से पहुंचना अपने आप में ही एक महान सार्वजनिक उपकार का कार्य है। इससे दूर स्थित प्रिय जनों के कुशल वृतांत पता लगते रहते हैं और संसार के किसी भी भाग में होने वाले प्राकृतिक प्रकोप, भूकंप, अग्निकांड, अतिवृष्टि आदि घटनाओं का पता चल जाता है। इंग्लैंड या ऑस्ट्रेलिया में होते हुए क्रिकेट के मैचों का हाल हम उसी समय घर बैठे पा सकते हैं। दिल्ली में स्वाधीनता दिवस पर मनाई जाए जाने वाली खुशियों का ब्योरेवार समाचार तथा नेताओं के भाषण हम देश के किसी कोने में बैठे सुन सकते हैं।

रेडियो का शासन में महत्व : रेडियो का राष्ट्र के शासन के लिए विशेष महत्व है। इसके द्वारा शासन सर्वसाधारण जनता तक शीघ्र ही पहुंच सकता है और उसे सामान्य अथवा विशेष अवस्थाओं में नागरिकता के कर्तव्य पालन के लिए प्रेरित कर सकता है। भारतवर्ष में खाद्य समस्या के विकट होने के साथ कितनी बार देश के प्रधानमंत्री श्री जवाहरलाल नेहरू को जनता के सम्मुख रेडियो द्वारा भाषण देना पड़ा। और उसे अपने कर्तव्यों के पालन करने पर बल देना पड़ा। उसी के परिणाम स्वरूप जनता ने आत्म संयम से देश को कई बार अकाल जैसी परिस्थितियों से उभारा।

रेडियो देश की रक्षा में सहायक : देश पर अचानक शत्रु के आक्रमण हो जाने पर सैनिक तथा असैनिक जनता को राष्ट्र प्रेम की भावनाओं से ओतप्रोत करना और राष्ट्र रक्षा के लिए अपना सब कुछ बलिदान करने के लिए प्रेरित करना भी वीडियो द्वारा आसान हो जाता है। पार्लियामेंट अथवा उससे बाहर व्याख्यानो से अथवा समाचार पत्रों से देश के एक छोर से दूसरे छोर तक उत्साह की तरंग को वैसा प्रवाहित नहीं किया जा सकता जैसा रेडियो द्वारा प्रसारित भाषणों संवादों रूप को आदि द्वारा किया जा सकता है।

रेडियो का शिक्षा में महत्व : रेडियो का सबसे बड़ा महत्व शिक्षा संबंधी ही है। इसके द्वारा शिक्षा को न केवल आकर्षक अपितु अति उपयोगी भी बनाया जा सकता है। प्रायः सभी सभ्य राष्ट्रों में रेडियो का प्रयोग शिक्षा के प्रचार-प्रसार के लिए किया जा रहा है। भारत में भी इसे जातीय पुनर्निर्माण एवं एकता का शक्तिशाली साधन बनाया जा सकता है। इस संबंध में निम्नलिखित निर्देश ध्यान देने योग्य हैं:-

रेडियो प्रारंभिक शिक्षा में सहायक : प्रारंभिक शिक्षा में बच्चों को भूगोल का ज्ञान यात्रा वृतांतों को सुनाने से सरलता से कराया जा सकता है। इतिहास उन्हें कहानी अथवा नाटक के रूप में सिखाया जा सकता है। कविता तथा अन्य साहित्य का बोध संगीत तथा भाषणों द्वारा कराया जा सकता है। कक्षा में अध्यापक से पढ़ाई हुए पाठों की तरफ बालक बालिकाओं की इतनी रुचि नहीं हो सकती जितनी रेडियो में प्रसारित किए गए उपर्युक्त प्रोग्रामों की तरफ हो सकती है। शिशु अवस्था की मनोवैज्ञानिक परिणाम का अध्ययन इस तथ्य को स्पष्ट करता है कि इस अवस्था में बच्चों की शिक्षा पुस्तकों और लेखों द्वारा इतनी सुगमता तथा सुचारिता से नहीं हो सकती जितनी प्रत्यक्ष अनुभूतियों, यात्राओं चित्रपटो को देखने तथा रेडियो को सुनने से हो सकती है।

रेडियो प्रौढ़ शिक्षा में सहायक : रेडियो द्वारा प्रौढ़ शिक्षा का विस्तार भी सुविधा से किया जा सकता है। जिन पुरुष तथा स्त्रियों को स्कूल में जाने का अवसर प्राप्त नहीं हो सका उनका शिक्षित होना भी देश के उत्थान के लिए अति आवश्यक है। पढ़ना-लिखना गिनना मात्र प्रौढ़ को सिखा देना पर्याप्त नहीं है। इससे अधिक व्यावहारिक शिक्षा तो स्वास्थ्य, सफाई, साधारण ज्ञान आदि के बोध कराने में है। रेडियो की सहायता से अशिक्षित लोगों में भी सफाई के नियमों को तथा देश-विदेश में होने वाली घटनाओं के महत्व को समाविष्ट किया जा सकता है। विशेषतया ग्राम वासियों का जीवन स्तर रेडियो शिक्षण द्वारा सफलतापूर्वक उन्नत किया जा सकता है। उनकी शिक्षा के प्रति अलगाव को रेडियो द्वारा काम जा सकता है और नागरिकता के प्रारंभिक तत्व उनके ह्रदय में स्थापित किए जा सकते हैं। कृषि संबंधी साधारण ज्ञान जैसे समय पर बीजों को बोना, अच्छी खाद डालना, ट्रैक्टर का प्रयोग करना, टिड्डी आदि से फसल की रक्षा करना यह सब प्रौढ़ किसानों को रेडियो की सहायता से सिखाया जा सकता है। ऐसी प्रौढ़ शिक्षा देश के आर्थिक पुनर्निर्माण में अत्यंत सहायक सिद्ध हो सकती है। केवल रात्रि पाठशाला में जाकर पढ़ना-लिखना सीख लेना देश की शिक्षा की समस्या को हल नहीं कर सकता।

रेडियो जरुरी सामान्य ज्ञान बढ़ाने में सहायक : रेडियो के शिक्षा संबंधी महत्व का एक अन्य रूप भी है। देश-विदेश में विभिन्न विषयों पर विज्ञान के आविष्कारों के विशेषज्ञ विद्वान संसार का रेडियो द्वारा महान उपकार कर सकते हैं। पुस्तकों द्वारा उन सब नवीन तत्वों का शीघ्र प्रसार हो पाना कठिन होता है। परंतु रेडियो के एक भाषण से समस्त विश्व को नवीन तथ्यों से परिचित किया जा सकता है। उदाहरण के लिए मनुष्य के रोगों का नाश के नवीन औषधियों, इंजेक्शन, ऑपरेशन आदि की जानकारी दी जा सकती है। इन सबका सर्व साधारण ज्ञान रेडियो द्वारा विश्व के कोने-कोने तक पहुंचाया जा सकता है। प्रयोगशालाओं में तल्लीन रहने वाले वैज्ञानिकों को इससे अधिक संतुष्टि नहीं हो सकती कि उनके आविष्कारों से मनुष्य जाति की प्रगति और उन्नति में सहायता मिल रही है। भारत वर्ष में रेडियो विभाग द्वारा ऐसे विशेषज्ञों के समय-समय पर दिए गए व्याख्यान देश को अग्रसर बनाने वाले होंगे।

उपसंहार : रेडियो विज्ञान की उत्कृष्ट देन है। इसकी उपकार क्षमता अनंत है। मनुष्य जाति के उत्थान में, विश्व शांति की स्थापना में तथा एक विश्व राष्ट्र की कल्पना को कार्यान्वित करने में रेडियो एक शक्तिशाली साधन बन सकता है। इस माध्यम के द्वारा देश परस्पर समीप आ सकते हैं। राष्ट्र एक दूसरे के विचारों को तथा विचार विभिन्नता के कारणों को जान सकते हैं। भारत वर्ष में इस साधन की विशेष उपयोगिता है। 55 % अशिक्षा को दूर करने की जागरूकता को लाने एवं दरिद्रता के अभिशाप का निवारण करने में रेडियो महान कार्य कर सकता है। अतः रेडियो विभाग का हमारे देश में संगठित होना अत्यंत आवश्यक है। शासन द्वारा निर्धन व्यक्तियों को रेडियो सेट का उपहार रूप में दिया जाना इस संबंध में एक उचित कदम होगा। तभी रेडियो को राष्ट्र उत्थान अथवा जातीय पुनर्निर्माण का सहायक शक्तिशाली उपकरण बनाना संभव हो सकता है। 

SHARE THIS

Author:

I am writing to express my concern over the Hindi Language. I have iven my views and thoughts about Hindi Language. Hindivyakran.com contains a large number of hindi litracy articles.

0 comments: