Sunday, 21 April 2019

अनुच्‍छेद 370 और जम्‍मू-कश्‍मीर की समस्या इन हिंदी


अनुच्‍छेद 370 और जम्‍मू-कश्‍मीर की समस्या इन हिंदी

अनच्‍छेद - 370 : भारतीय संघ में जम्‍मू-कश्‍मीर का विलय इस आधार पर किया गया है कि संविधान के अनुच्‍छेद 370 के तहत इस प्रदेश की स्‍वायत्तता की रक्षा की जाएगी, यह एकमात्र प्रदेश है जिसका अपना संविधान है, तथा जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य का प्रशासन इस संविधान के उपबंधों के अनुसार चलता रहेगा। भारतीय संविधान द्वारा संघ और राज्‍यों के बीच जो शक्‍ति विभाजन किया गया इसके अंतर्गत अवशेष शक्‍तियां संघीय सरकार को सौंपी गई हैं, परंतु जम्‍मू–कश्‍मीर राज्‍य के संबंध में अवशिष्‍ट शक्‍तियां जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य को प्राप्‍त हैं।
जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य के संबंध में संघ केवल निम्‍नलिखित तीन सेवाओं पर अपना नियंत्रण कर सकती है:
  1. रक्षा
  2. संचार
  3. विदेशी मामले

जम्‍मू-कश्‍मीर को विशेष राज्‍य का दर्जा प्राप्‍त होने के कारण जम्‍मू-कश्‍मीर राज्‍य के नागरिकों को दोहरी नागरिकता प्राप्‍त है। अन्‍य राज्‍यों का कोई व्‍यक्‍ति जम्‍मू-कश्‍मीर में कोई सम्‍पत्ति नहीं खरीद सकता।

अनुच्‍छेद 370 और जम्‍मू-कश्‍मीर समस्‍या के कारण

कश्‍मीर के भारत में विलय के बाद समय-समय पर भारत-पाकिस्‍तान के बीच युद्ध होते रहे और संबंधों में दिन-प्रतिदिन कटुता आती गई। कश्‍मीर समस्‍या से जुड़े कुछ प्रमुख कारण निम्‍नलिखित हैं:

कश्‍मीर के भारत में विलय में विलम्‍ब : महाराजा हरि सिंह ने कश्‍मीर को भारत में विलय करने का निर्णय करने के बाद भी अधिकारिक रूप से विलय करने में अत्‍यंत विलम्‍ब किया। महाराजा हरि सिंह ने 15 अगस्‍त, 1947 की घटना देखने के बाद भी भारत में विलय नहीं किया। बल्‍कि विलय को लटकाकर काफी समय तक विचार करते रहे और अक्‍टूबर 1947 में पाक सेना ने कश्‍मीर घाटी में रक्‍तपात मचाना शूरू किया, तो वे इस मामले को लेकर गंभीर हुए और अंतत: 26 अक्‍टूबर 1947 को विलय पत्र पर हस्‍ताक्षर किए और भारत में कश्‍मीर का विलय हो सका।

पं. जवाहरलाल नेहरू का राजनीतिक हस्‍तक्षेप : यह स्‍थापित सत्‍य है कि पं. नेहरू की राजनीतिक कूटनीति के कारण ही आज कश्‍मीर समस्‍या नासूर बन गई है। हरि सिंह ने कश्‍मीर विलय को लटकाकर जहाँ समस्‍या की नींव रखी वही दूसरी तरफ पं. नेहरू ने सही समय पर सही फैसला न लेकर समस्‍या को और गंभीर बना दिया। इसी के परिणामस्‍वरूप पाकिस्‍तान के अवैध कब्‍जे वाली भूमि पर उसी का नियंत्रण रह गया। आज उसी पाक अधिकृत कश्‍मीर से प्रशिक्षण प्राप्‍त जिहादी तत्‍वों में जम्‍मू-कश्‍मीर में अलगाववाद और हिंसा फैलाने के साथ-साथ पूरे भारत में अलगाववाद पैदा कर रहे हैं।

कश्‍मीर का भारत में विलय और विशेष राज्‍य का दर्जा : अन्‍य सभी देशी रियासतों और रजवाड़ो का भारत में विलय बिना किसी शर्त हुआ था, जबकि जम्‍मू-कश्‍मीर के विषय में ऐसा नहीं हो सका। भारत में जम्‍मू-कश्‍मीर का विलय सशर्त हुआ तथा जम्‍मू-कश्‍मीर को धारा 370 के तहत विशेष राज्‍य दर्ज प्रदान किया गया। साथही यहां पर राज्‍य का अपना संविधान भी है।
पं. नेहरू ने विलय से पूर्व अपने घनिष्‍ठ मित्र शेख अब्‍दुल्‍ला को सियासत का साझीदार बनाया, वही शेख अब्‍दूल्‍ला के दो प्रधान, दो विधान और दो निशान को धारा 370 का प्रारूप पहनाया। वस्‍तुत: सेकुलर व्‍यवस्‍था में धारा 370 के अंतर्गत जम्‍मू-कश्‍मीर में अलगाववाद को संवैधानिक मान्‍यता दे रखी है। कश्‍मीर को विशेष प्रांत का दर्जा देने का बाबा भीमराव अंबेडकर ने घोर विरोध किया था। भारत के कानून मंत्री होने के नाते उन्‍हें यह कतई मंजूर नहीं था कि भारत पर कश्‍मीर के सारे हक तो हो, किंतु कश्‍मीर पर भारत का कोई अधिकार न हो। पं. जवाहरलाल नेहरू ने डा. अंबेडकर की अनदेखी कर शेख अब्‍दुलला का साथ दिया।

महजब के आधार पर देश का विभाजन : भारत-पाकिस्‍तान का विभाजन धर्म के आधार पर हुआ था। कश्‍मीर की 80% जनता मुस्लिम थी और तत्‍का‍लीन राजा हिंदु था। धर्म के आधार पर व जनमत के आधार पर पाकिस्‍तान को पूर्णता: विश्‍वास था। कश्‍मीर का विलय पाकिस्‍तान को पूर्णत: विश्‍वास था। कश्‍मीर का विलय पाकिस्‍तान में ही होगा, किंतु जब राजा हरि सिंह ने कश्‍मीर का विलय भारत में किया, तो पाक की सियासी जमातों के इरादों पर पानी फिर गया। इसी कारण पाकिस्‍तान ने कई बार भारत पर विफल आक्रमण किया। जिसके कारण पाकिस्‍तान वर्तमान समय में एक विफल राष्‍ट्र के कगार तक जा पहुंचने के बावजूद, उसने सिर्फ यही सिद्ध किया है कि वह अपने राष्‍ट्र को बर्बाद की तरफ ले जा रहा है।

जम्मू कश्मीर समस्या की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि 
ब्रिटिशकाल में जम्‍मू व कश्‍मीर एक देशी रियासत थी, आजादी के समय यहाँ एक हिंदु शासक थे, जिनका नाम हरि सिंह था। आजादी के पूर्व ही वहाँ देशी राजा के विरुद्ध शेख अब्‍दुल्‍ला के नेतृत्‍व में लोकतंत्र की स्‍थापना हेतु आंदोलन चलाया गया था। मौजूदा भारत में कश्‍मीर को शामिल करने में महाराजा हरि सिंह का अभूतपूर्व योगदान रहा है। कश्‍मीर एक विस्‍तृत रियासत थी, जिसकी अधिकांश जनता मुस्लिम थी और राजा हिंदू था, कश्‍मीर रियासत के अलग-अलग हिस्‍सों गिलगिद, लद्दाख, जम्‍मू आदि के लोगों की महत्‍वाकांक्षाओं को ध्‍यान में रखते हुए महाराजा हरि सिंह को निर्णय लेना था। इसी कारण महाराज हरि सिंह 15 अगस्‍त 1947 को कोई निर्णय नहीं ले पाए, लिहाजा उन्‍होंने दोनों मुल्‍कों को समझौते का प्रस्‍ताव भेजा, पाकिस्‍तान भेजा, पाकिस्‍तान की सरकार ने इस प्रस्‍ताव को तत्‍काल मान लिया, दूसरी तरफ भारत ने इस प्रस्‍ताव को आपसी विचार-विमर्श द्वारा सुलझाने की बात कही। वहीं महाराजा हरि सिंह अंत तक भारत में ही विलय के पक्षधर बने रहे। 

इसके बाद पाकिस्‍तान को कश्‍मीर हाथ से खिसकता नजर आने लगा। इसी कारण से अक्‍टूबर 1947 में पाक सेना द्वारा समर्थित कबालियों ने कश्‍मीर घाटी पर कब्‍जा करने के लिए वहाँ आक्रमण कर दिया। इस आक्रमण का सामना करने के लिए महाराजा हरि सिंह ने भारत से मदद मांगी, लेकिन भारत ने इस आधार पर मदद मदद देना स्‍वीकार किया कि पहले जम्‍मूव कश्‍मीर भारतीय संघ में शामिल हो गया, तत्‍पश्‍चात भारतीय सेना ने पाकिस्‍तान के कबालियों को कश्‍मीर घाटी से खदेड़ दिया। फलत: महाराजा हरि सिंह ने कश्‍मीर रियासत का भारत में विलय अतिशीघ्र करने का निर्णय लिय। 26 अक्‍टूबर 1947 का कश्‍मीर रियासत का भारत में विलय करने के लिए महाराजाने विलय पत्र पर हस्‍ताक्षर कर दिए और 27 अक्‍टूबर 1947 को लार्ड माउन्‍टबेटन ने इसे मंजूरी दे दी। इसके साथ ही वैधानिक रूप में भारत की सीमाओं का विस्‍तार गिलगिट-बाटलिस्‍तान तक हो गया, किंतु वर्तमान में राज्‍य का बड़ा हिस्‍सा पाकिस्‍तान के कब्‍जे में है और दूसरा चीन के गैर-कानूनी नियंत्रण में है।

1947 में कश्‍मीर रियासत का भारत में विलय करने के उपरांत यह भारत का हिस्‍सा था। महाराजा हरि सिंह ने अपनी पूरी रियासत का विलय भारत में ही किया था। अत: गिलगिट-बाल्स्तिान सहित समूचा कश्‍मीर वैधानिक रूप से भारत का ही अंग है, लेकिन पाकिस्‍तान अवैध नियंत्रण वाली हमारी भूमि को अपनी भूमि को अपनी भूमि घोषित करने की नापाक कोशिश कर रहा है। इस गैर-कानूनी प्रयास के खिलाफ भारत सरकार द्वारा अब तक कोई बुलंद आवाज न उठाना इस बात का संकेत देता है कि हमारी सरकार अपनी सीमाओं व भूमि को लेकर सचेत और संवेदनशील नहीं है। इसी असचेतता व संवेदनहीनता का परिणाम है कि इन क्षेत्रों में चरमपंथी गुटों का वर्चस्‍व बढ़ता जा रहा है।
जम्‍मू-कश्‍मीर ( अनु. 370 ) विशेष राज्‍य
  1. 26 अक्‍टूबर 1947 को कबिलाई के सहयोग से पाकिस्‍तान द्वारा जम्‍मू-कश्‍मीर पर आक्रमण किया गया।
  2. जम्‍मू-कश्‍मीर के राजा हरि सिंह ने भारत में विलय के साथ रक्षा की माँग की।
  3. विलय पत्र में विदेश, रक्षा तथा संचार भारत को दिया गया, शेष सभी अधिकार राज्‍य के अधीन रखे गए।
  4. जम्‍मू-कश्‍मीर के लिए विशेष व्‍यवस्‍था के साथ अनु. 370 जोड़ा गया जो कि विशेष राज्‍य का दर्जा प्राप्‍त करता है।
  5. जम्‍मू-कश्‍मीर को भारतीय संविधान संविधान के अनु. 2 में सम्मिलित किया गया है।
  6. अजु. 370 की व्‍यवस्‍था में अस्‍थाई संब्रमणकालीन विशेष उपबन्‍ध किया गया।
  7. 1951 में जम्‍मू–कश्‍मीर संविधान सभा गठन किया गया।
  8. 1951 में शेख अब्‍दुल्‍ला व पं. नेहरू के बीच समझौता हुआ। जिसको दिल्‍ली समझौता के नाम से भी जाना जाता है। जिसमें जम्‍मू-कश्‍मीर की स्‍वायत्ताता पर हस्‍ताक्षर किया गया। जिसका अर्थ विदेश, रक्षा व संचार को छोड़कर शेष सभी अधिकार जम्‍मू-कश्‍मीर के पास रहेगे।
  9. 1953 में शेख अब्‍दुल्‍ला को देश चिरोधी गतिविधियों के कारण जेल जाना पड़ा।
  10. 1953 में शेख अब्‍दुल्‍ला की जगह बक्‍शी गुलाम मोहम्‍मद सत्तासीन हुए।
  11. जम्‍मू-कश्‍मीर संविधान सभा ने फरवरी 1954 में औपचारिक रूप से भारत में जम्‍मू-कश्‍मीर को विलय कर दिया।
  12. 1954 में जम्‍मू-कश्‍मीर संविधान सभा द्वारा भारत में विलय की मंजूरी जिससे केंद्रीय कानून लागू हो गया।
  13. जम्‍मू-कश्‍मीर का अपना संविधान 26 जनवरी 1957 को लागू किया गया।
  14. 1965 में सदर-ए-रियासत का नाम बदलकर राज्‍यपाल रख दिया गया जो अब राष्‍ट्रपति द्वारा नियुक्‍ति होगा (हम व्‍यवस्‍था जम्‍मू-कश्‍मीर संविधान के 6वाँ संविधान संशोधन द्वारा किया गया है।)
  15. राज्‍य की संवैधानिक तंत्र की विफलता में पहले 6 माह राज्‍यपाल शासन (धारा 92), इसके बाद राष्‍ट्रपति शासन (अनु. 356) लागू होता है।
  16. राज्‍य की विधान सभा में दो महिला विधायकों की व्‍यवस्‍था जो राज्‍यपाल द्वारा मनोनीत होगी।
  17. राज्‍य की राजभाषा उर्दू है।
  18. राज्‍य की विधान सभा का कार्यकाल 6 वर्ष होने के कारण मुख्‍यमंत्री का कार्यकाल 6 वर्ष का हो जाता है।
  19. अनु. 355 के तहत राज्‍य में सशस्‍त्र बल की तैनाती की जा सकती है।
  20. नियंत्रण रेखा पहले युद्ध विराम रेखा थी, जो 1 जनवरी 1949 को प्रभावी हुई और शिमला समझौता (1972) के बाद वह नियंत्रण रेखा में बदल गई।


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