Thursday, 21 February 2019

राष्‍ट्रीय न्‍यायालय प्रबंधन प्रणाली योजना

राष्‍ट्रीय न्‍यायालय प्रबंधन प्रणाली योजना

भारत की न्‍याय प्रणाली विश्‍व, की सबसे बड़ी न्‍यायायिक प्रणालियों में से एक है। यहां की अदालतों में (31 दिसंबर, 2011 की स्‍थिति के अनुसार) 3 करोड़ से ज्‍यादा मामले हैं और न्‍यायाधीशों की स्‍वीकृत संख्‍या कोई 18,871 है। इस प्रणाली का पिछले तीन दशकों में तेजी से विस्‍तार हुआ है, जिससे इस अवधि के दौरान भारत के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास का पता चलता है। अनुमान है कि न्‍यायाधीशें/अदालतों की संख्‍या में 6 गुना विस्‍तार हुआ है जबकि मुकदमों की संख्‍या 12 गुना बढ़ी है। न्‍यायिक प्रणाली का अगले तीन दशकों में उल्‍लेखनीय विस्‍तार जारी रहना तय है। इन आंकड़ों का न्‍यनतम अनुमान भी लगायें तो भी मुकदमों का कम से कम लगभग15 करोड़ तक बढ़ सकते हैं और उनके लिए कोई 75000 अदालतों/न्‍यायाधीशों की आवश्‍यकता होगी।

न्‍यायिक प्रणाली में ऐसी व्‍यवस्‍था करने की तत्‍काल आवश्‍यकता है जिसमें मुकदमे पांच साल से पुराने न हों। सभी मुकदमों की औसत अवधि कम करने की भी अत्‍यधिक आवश्‍यकता है। इसका तात्‍पर्य है कि प्रत्‍येक अदालत में खर्च होने वाला समय ही नहीं बल्‍कि कुल मिलाकर न्‍यायिक प्रणाली में खर्च होने वाला कुल समय कम करने की आवश्‍यकता है ताकि प्रत्‍येक अदालत में खर्च होने वाला समय औसतन लगभग एक वर्ष से अधिक न हो। उसे व्‍यवस्‍थापूर्ण बनाये रखने और न्‍याय की गुणवत्ता तथा प्रतिक्रियाशीलता बढ़ाने के प्रयास भी जारी रहने चाहिए।

न्‍यायपालिका को पेश आने वाली इन सभी चुनौतियों को कारगर रूप से निपटाने के लिए भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश ने भारत सरकार में विधि और न्‍याय मंत्री से सलाह-मशविरा करने के बाद इस वर्ष मई महीने में राष्‍ट्रीय न्‍यायालय प्रबंधन प्रणाली का गठन किया और उसे कार्यान्‍वित करने के लिए नीति और कार्ययोजना दस्‍तावेज जारी किया। राष्‍ट्रीय प्रबंधन प्रणाली कुल मिलाकर भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश के नियंत्रण में होगी। यह मुख्‍य रूप से नीतिगत मामलों को निपटायेगी। एनसीएमएस में निम्‍न 6 मुख्‍य तत्‍व शामिल होंगे:
  1. राष्‍ट्रीय न्‍यायालय उत्‍कृष्‍टता संरचना (एनएफसीई) जो गुणवत्ता, प्रतिक्रियाशीलता और समयबद्धता के मामले निपटाने वाली भारतीय अदालतों के लिए निष्‍पादन मानकतय करेगी।
  2. गुणवत्ता,प्रतिक्रियाशीलता और समयबद्धता के बारेमें एनएफसीई में स्‍थापित निष्‍पादन मानदंडों पर नजर रखने और उन्‍हें बढ़ाने की प्रणाली।
  3. न्‍यायिक प्रणाली की प्रयोक्‍ता मित्रता बढ़ाने के लिए मुकदता प्रबंधन प्रणाली।
  4. समूचे देश में न्‍यायिक आंकड़ों के अभिलेखन और रख-रखाव के लिए सामान्‍य राष्‍ट्रीय मंच उपलब्‍ध कराने के लिए राष्‍ट्रीय न्‍यायिक सांख्यिकी प्रणाली (एनएसजेएस)। एनएसजेएस को मुकदमों और अदालतों के बारे में सही आंकड़े उपलब्‍ध कराने चाहिए। इससे अदालतों में न्‍याय प्रणाली के मुख्‍य कारकों जैसे गुणवत्ता, समयबद्धता और कुशलता आदि के सुव्‍यस्‍थित विशलेषण प्राप्‍त हो सकेंगे। इससे पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  5. न्‍यायालय विकास आयोजन प्रणाली- इससे भारतीय न्‍यायपालिका के भावी विकास के लिए सुव्‍यवस्‍थित पंचवर्षीय योजनाओं की रूपरेखा प्राप्‍त होगी। आयोजन प्रणाली में सभी अदालतों के लिए व्‍यक्‍तिगत न्‍यायालय विकास योजनाएं शामिल हैं।
  6. मानव संसाधन विकास रणनीति- इससे अधीनस्‍थ न्‍यायालयों के न्‍यायाधीशों के चयन और प्रशिक्षण के मानक तक होंगे।

इन प्रणालियों की प्रशासनिक और तकनीकी मुख्‍यधारा का उच्‍चतम न्‍यायालय द्वारा रख-रखाव किया जायेग और प्रतिनिधियों सहित एक समिति द्वारा नजर रखी जायेगी।
इनमें से प्रत्‍येक क्षेत्र में विशिष्‍ट प्रस्‍ताव तैयार किये जायेंगे जिन पर उच्‍च न्‍यायालयों द्वारा विचार किया जायेगा और उन्‍हें कार्यान्‍वित किया जायेगा।

राष्‍ट्रीय न्‍यायालय प्रबंधन प्रणाली समिति (एनसीएमएससी)
उपरोक्‍त वर्णित न्‍यायालय प्रबंधन प्रणाली संबंधी विशेष प्रस्‍ताव की 18-सदस्‍यीय राष्‍ट्रीय न्‍यायालय प्रबंधन समिति द्वारा विकसित किये जायेंगे। इसमें भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश के निर्देशें के अनुसार सदस्‍य इस प्रकार होंगे:

अध्‍यक्ष
भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीतएक विधिवेत्ता होगा। उसे एनसीएमएससी की अध्‍यक्षता करने के लिए मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा तय मानदेय और अन्‍य सुविधाएं मिलेगी।
इसके अनुसार राष्‍ट्रीय न्‍यायिक अकादमी के पूर्व निदेशक और विधिवेत्ता प्रो. (डा.) जी. मोहन गोपाल को मुख्‍य न्‍यायाधीश ने एनएीएमएससी की अध्‍यक्षता करने के लिए मनोनीत किया है।
सदस्‍य
  1. भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत 4 कार्यरत न्‍यायाधीश (भारत में प्रत्‍येक क्षेत्र से एक)
  2. उच्‍चतम न्‍यायालय का महासचिव (पदेन)।
  3. भारत सरकार में न्‍याय विभाग के संयुक्‍त सचिव और मिशन निदेशक (पदेन)।
  4. मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत 3 उच्‍च न्‍यायालयों के महा पंजीयक।
  5. राष्‍ट्रीय न्‍यायिक अकादमी के निदेशक।
  6. भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत वकालत करने वालेदो अधिवक्‍ता।
  7. भारत के मुख्‍य सांख्‍यिकीविद् द्वारा मनोनीत विशेषज्ञ सांख्‍यकीविद्।
  8. भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत निर्णय प्रणाली प्रबंधन का विशेषज्ञ।
  9. भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत न्‍यायालय प्रबंधन से संबद्ध कम्‍प्‍यूटर प्रौद्योगिकी का विशेषज्ञ।
  10. भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत न्‍याय तक पहुंच में सुधार के लिए काम करने वाले एक गैर-सरकारी संगठनका एक प्रतिनिध।

भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय में सूचना और सांख्‍य‍िकी विभागका अपर पंजीयक (पदेन)- सदस्‍य सचिव।
इसके अनुसार भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश ने निम्‍न व्‍यक्‍तियों को एनसीएमएससी के सदस्‍य के रूप में मनोनीत किया है:
  1. श्री न्‍यायमूर्ति डी. मुरूगेसन
  2. श्री न्‍यायमूर्ति ए.एम. खानविल्‍कर।
  3. श्री न्‍यायमूर्ति अमिताव रॉय।
  4. श्री न्‍यायमूर्ति बी.डी. अहमद।
  5. गुजरात उच्‍च न्‍यायालय का महापंजीयक
  6. कलकत्ता उच्‍च न्‍यायालय का महापंजीयक और
  7. कर्नाटक उच्‍च न्‍यायालय का महांपजीयक

समिति के लिए आवश्‍यक अन्‍य कर्मचारी और सुविधाएं भी उपलब्‍ध कराई जायेंगी।
सलाहकार समिति
एनसीएमएस समिति के लिए एक सलाहकार समिति भी गठित की जायेगी जिसमें भारत के मुख्‍य न्‍यायालय के दो न्‍यायाधीश और भारत के मुख्‍य न्‍यायाधीश द्वारा मनोनीत उच्‍च न्‍यायालयों के मुख्‍य न्‍यायाधीश/न्‍यायाधीश शामिल होंगे। एनसीएमएस समिति का अध्‍यक्ष सलाहकार समिति का सदस्‍य होगा। भारत सरकार के न्‍याय विभाग के सचिव सलाहकार समिति का पदेन सदस्‍य होगा और उच्‍चतम न्‍यायालय का महासचिव सलाहकार समिति का संयोजक होगा।
इस व्‍यवस्‍था के अनुसार निम्‍न न्‍यायाधीशों को सलाहकार समिति का सदस्‍य मनोनीत किया गया था:
  1. श्री न्‍यायमूर्ति अल्‍तमस कबीर, भारत के तत्‍कालीन मुख्‍य न्‍यायाधीश।
  2. श्री न्‍यायमूर्ति पी. सदाशिवम, उच्‍च्‍तम न्‍यायालय के न्‍यायाधीश और
  3. श्री न्‍यायमूर्ति पी.सी. तातिया, झारखंड उच्‍च न्‍यायालय के मुख्‍य न्‍यायाधीश।

एनसीएमएस के काम-काज से संबंधित सभी खर्चें, जिनमें कर्मचारियों के वेतन और भत्ते आदि शामिल हैं, भारत के उच्‍चतम न्‍यायालय के स्‍वीकृत बजट से पूरे किये जायेगे।

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