Friday, 20 July 2018

पंचलाइट कहानी का सारांश

पंचलाइट कहानी का सारांश

panchlight kahani ka saransh
गांव में रहने वाली विभिन्न जातियां अपनी अलग-अलग टोली बनाकर रहती हैं। उन्ही में से महतो टोली के पंचों ने पिछले 15 महीने से दंड जुर्माने के जमा पैसों से रामनवमी के मेले में इस बार पेट्रोमेक्स खरीदा। पेट्रोमैक्स खरीदने के बाद बचे हुए 10 रुपयों से पूजा की सामग्री खरीदी गई। पेट्रोमेक्स यानी पंचलाइट को देखने के लिए टोली के सभी बालक, औरतें एवं मर्द इकट्ठा हो गए और सरदार ने अपनी पत्नी को आदेश दिया कि वह इसके पूजा-पाठ का प्रबंध करें। पंचलाइट कहानी का उद्देश्य यहाँ देखें।

पंचलाइट को जलाने की समस्या : महतो टोली के सभी जन ‘पंचलाइट’ के आने से अत्यधिक उत्साहित हैं, लेकिन उनके सामने एक बड़ी समस्या यह आ गई कि पंचलाइट जलाएगा कौन? क्योंकि किसी भी व्यक्ति को उसे जलाना नहीं आता। महतो टोली के किसी भी घर में अभी तक ढिबरी नहीं जलाई गई थी, क्योंकि सभी पंचलाइट की रोशनी को ही सभी ओर फैला हुआ देखना चाहते थे। पंचलाइट के ना जलने से पंचों के चेहरे उतर गए। राजपूत टोली के लोग उनका मजाक बनाने लगे। जिसे सबने धर्यपूर्वक सहन किया। इसके बावजूद पंचों ने तय किया कि दूसरी टोली के व्यक्ति की मदद से पंचलाइट नहीं जलाया जाएगा, चाहे वह बिना जले ही पढ़ा रहे। 

टोली द्वारा दी गई सजा भुगत रहे गोधन की खोज : गुलरी काकी की बेटी मुनरी गोधन से प्रेम करती थी और उसे पता था कि गोधन को पंचलाइट चलाना आता है, लेकिन पंचायत ने गोधन का हुक्का-पानी बंद कर रखा था। मुनरी ने अपनी सहेली कनेली को और कनेली ने यह सूचना सरदार तक पहुंचा दी कि गोधन को पंचलाइट जलाना आता है। सभी पंचों ने सोच विचार कर अंत में निर्णय लिया कि गोधन को बुलाकर उसी से पंचलैट जलवाया जाए। 

गोधन द्वारा पंच लाइट जलाना : सरदार द्वारा भेजे गए छड़ीदार के कहने से गोधन के नहीं आने पर उसे मनाने गुलरी काकी गयीं। तब गोधन ने आकर पंचलाइट में तेल भरा और जलाने के लिए ‘स्पिरिट’ मांगा। स्पिरिट के अभाव में उसने नारियल के तेल से ही पंचलाइट जला दिया। पंचलैट के जलते ही टोली के सभी सदस्यों में खुशी की लहर दौड़ गई। कीर्तनिया लोगों ने एक स्वर में महावीर स्वामी की जय ध्वनि की और कीर्तन शुरू हो गया। 

पंचों द्वारा गोधन को माफ करना : गोधन ने जिस होशियारी से पंचलैट को जला दिया, उससे सभी प्रभावित हुए। गोधन के प्रति सभी लोगों के दिल का मैल दूर हो गया। गोधन ने सभी का दिल जीत लिया। मुनरी ने बड़ी हसरत भरी निगाहों से गोधन को देखा। 
सरदार ने गोधन को बड़े प्यार से अपने पास बुला कर कहा कि, “तुमने जाति की इज्जत रखी है। तुम्हारे सात खून माफ। खूब गाओ सलीमा का गाना।” अंत में गुलरी काकी ने गोधन को रात के खाने पर आमंत्रित किया। गोधन ने एक बार फिर से मुनरी की ओर देखा और नजर मिलते ही लज्जा से मुनरी की पलकें झुक गई।


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