Wednesday, 11 April 2018

डाकिया पर निबन्ध। Dakiya Par Nibandh

डाकिया पर निबन्ध। Dakiya Par Nibandh

Dakiya Par Nibandh
डाकिया एक सरकारी कर्मचारी होता है जिसे पत्रवाहक भी कहते हैं। प्रमुख रूप से डाकिये का कार्य पत्र, पार्सल व मनीआर्डर वितरित करना होता है। हमारे देश में अनेक डाकघर हैं और प्रत्येक डाकघर में अनेक डाकिये कार्यरत हैं। एक डाकघर का क्षेत्र विभिन्न इलाकों में बंटा होता है। प्रत्येक इलाके में एक डाकिया नियुक्त किया जाता है। जिसका कार्य उस क्षेत्र के प्रत्र वितरित करना होता है। वह इस कार्य के लिए एक दर से दुसरे दर तक जाता है। यह सब पत्र उसे उस डाकघर से प्राप्त होते हैं जिसे वह जुड़ा होता है। 

डाकघर में पत्र, पार्सल व मनीआर्डर विभिन्न स्थानों से ट्रेन व बसों द्वारा लाये जाते हैं। वहां लाकर उनकी क्षेत्रानुसार छंटाई की जाती है। तत्पश्चात प्रत्येक डाकिये को उसके क्षेत्रानुसार डाक वितरित की जाती है जिसे वह अपने थैले में भरकर घर-घर बांटने निकल पड़ता है। बड़े-बड़े शहरों में डाकखाने की बस डाकियों को उनके इलाके में बारी-बारी छोड़ देती है। परन्तु छोटे शहरों, कस्बों तथा गाँवों में डाकिये अपनी साइकिल या फिर पैदल ही डाक बांटते हैं। 

डाकिये की वर्दी खाकी रंग की होती है। वह अपने कार्य को बड़ी चुस्ती से पूरा करता है। वह अपने सर पर लाल पट्टी या टोपी भी पहनता है। डाकिये अपने कार्य के लिए सवेरे ही निकल पड़ता है तथा देर रात घर वापस आता है। प्रायः डाकिया दिन में दो बार डाक बांटता है। रविवार को डाकघर बंद रहता है इसलिए इस दिन डाकिये की छुट्टी होती है। गाँव के डाकिये का काम तो बहुत ही कठिन होता है। सर्दी हो या गर्मी या फिर हो बरसात, वह गाँव के कच्चे रास्ते से होता हुआ डाक वितरित करता है। कई बार तो उसे एक गाँव से दूसरे गाँव तक जाना पड़ता है। रास्ते में कई बार असामाजिक तत्वों से भी सामना हो जाता है जिससे हमेशा जोखिम बना रहता है।

इसके बावजूद डाकिये के काम को देखते हुए उसका वेतन बहुत कम होता है। वर्तमान युग में उसके काम का बहुत अधिक महत्व है। सारे व्यापारिक लेनदेन तथा सरकारी पत्राचार का भार इसी के कन्धों पर होता है। अतः सरकार को चाहिए की उसके कार्य को देखते हुए उसके वेतन में उचित वृद्धि करनी चाहिए। ताकि वह अपने कर्त्तव्य का पालन निष्ठापूर्वक कर सके तथा समय पर डाक पहुंचाए।


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