Tuesday, 30 July 2019

ताजमहल पर निबंध (Long and Short Essay on Taj Mahal in Hindi)

दोस्तों आज हमने ताजमहल पर निबंध लिखा है। ताजमहल पर लिखे गए यह छोटे बड़े निबंध कक्षा 1, 2, 3, 4, 5, 6, 7, 8, 9, 10 और 12 के लिए उपयुक्त है। Here you will find essays and paragraph on Taj Mahal in Hindi for students.

    ताजमहल पर निबंध (Long and Short Essay on Taj Mahal in Hindi)

    ताजमहल को प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने करवाया था। नीचे प्रस्तुत किए निबंधों के माध्यम से हम ताजमहल की स्थापत्य कला, ताजमहल का वर्णन, चांदनी रात में ताजमहल का दृश्य आदि विषयों का अध्ययन करेंगे। छात्र अपनी सुविधा के अनुसार छोटे-बड़े निबंध चुन सकते हैं। 

    ताजमहल पर निबंध (100 शब्द)

    ताजमहल न केवल भारत बल्कि विश्व के प्रमुख स्मारकों में से एक है। यह भारत के उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में यमुना नदी के किनारे स्थित है। इसे देखने विश्व भर से सेलानी प्रतिवर्ष भारत आते हैं। ताजमहल वास्तव में एक मकबरा है जिसमें मुमताज महल तथा मुगल बादशाह शाहजहां की समाधि स्थित है। इसका निर्माण मुगल बादशाह शाहजहां ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल की याद में करवाया। सफेद संगमरमर से बना यह ऐतिहासिक स्मारक शाहजहां के मुमताज महल के प्रति असीम प्रेम का प्रतीक है। ताजमहल देखे बिना किसी भी विदेशी पर्यटक की भारत यात्रा अधूरी मानी जाती है।

    ताजमहल पर निबंध (200 शब्द)

    ताजमहल संपूर्ण विश्व में प्रेम का प्रतीक माना जाता है। इसकी अलौकिक सुंदरता के कारण विश्व के सात आश्चर्य में इसकी गणना की जाती है। ताज महल आगरा स्टेशन से लगभग 2 मील दूरी पर यमुना नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है।
    Long and Short Essay on Taj Mahal in Hindi 
    ताज महल का निर्माणताजमहल का निर्माण कार्य संत 1631 में शुरू हुआ। एक किवदंती के अनुसार शाहजहां ने ताजमहल का नक्शा अपने स्वप्न में देखा था। अपने उसी सपने को साकार करने के लिए उन्होंने ताजमहल का निर्माण कराया। माना जाता है कि इसको बनाने के लिए 20,000 से अधिक कारीगर तथा मजदूरों ने 20 वर्ष से भी अधिक समय तक इसका निर्माण कार्य किया। देश-विदेश से अनेक कारीगरों को भी बुलाया गया। ताजमहल में ईरानी तथा भारतीय स्थापत्य तथा वास्तुकला का बेजोड़ मिश्रण देखने को मिलता है।

    उपसंहार: ताजमहल की सुंदरता का वर्णन शब्दों की शक्ति से बाहर है। ताजमहल को बने 300 वर्ष से भी अधिक हो गए हैं परंतु इसकी शोभा और सुंदरता में कमी नहीं आई है। चांदनी रात में यमुना नदी के शीतल जल में बनने वाला ताजमहल का प्रतिबिंब दर्शकों तथा पर्यटकों को भाव विभोर कर देता है। इसकी विशालता पत्थरों की जुड़ाईपच्चीकारीचित्रकलाकटाई आदि देखकर बड़े से बड़े विद्वान भी आश्चर्यचकित हो जाते हैं।

    ताजमहल पर निबंध (300 शब्द)

    प्रस्तावना : ताजमहल विश्व के सात आश्चर्य में से एक है। इसे यूनेस्को की विश्व धरोहर की सूची में भी शामिल किया गया है। ताजमहल मुग़ल वास्तुकला का नायाब नमूना है। इसका निर्माण मुग़ल बादशाह शाहजहाँ नेअपनी पत्नी मुमताज़ महल की याद में करवाया था, इसी कारण इसका नाम ताजमहल पड़ा। यह भारत के उत्तर प्रदेश के आगरा शहर में स्थित है।

    वर्णन: ताजमहल पहुंचने के लिए लाल बलुआ पत्थर के प्रवेश द्वार से होकर जाना पड़ता है। इस द्वार पर तथा अन्य सभी मुख्य द्वारों पर कुरान की आयतें लिखी हुई हैं। ताजमहल के चारों कोनों में चार मीनारे स्थित हैं। प्रत्येक मीनार की ऊंचाई 40 मीटर है। इन मीनारों के केंद्र में बना गुंबद ताजमहल का मुख्य आकर्षण है। गुंबद की ऊंचाई 73 मीटर है। मुख्य गुंबद के भीतर मुमताज महल तथा शाहजहां की समाधिया स्थित हैं। यहां एक अजायबघर भी है जिसमें मुगल बादशाहों के अस्त्र-शस्त्र और बर्तन आदि सुरक्षित रखे हैं।

    समाधि का दृश्य: मुमताज महल की समाधि के पास ही शाहजहां की समाधि स्थित है। इसके लिए गुंबद में से नीचे सीढ़ियां जाती हैं। मुमताज की कब्र पर कुरान की आयतें लिखी हुई हैं, परंतु शाहजहां की कब्र पर नहीं। यहां तक जाने के लिए दर्शकों को जूते उतारने पड़ते हैं और प्रकाश के लिए मशाल का आश्रय लेना पड़ता है।

    उपसंहार: अत्यंत रमणीय उद्यान में बने हुए मकबरे की सुंदरता का वर्णन बड़े से बड़े लेखक की लेखनी भी नहीं कर सकती। अनेक शताब्दियों बीत गई कितने ही साम्राज्य का उत्थान और पतन हुआ इस समाधि के निर्माता मुगल वंश का भी पतन हो गयापरंतु प्रेमरूपी यह स्मारक अपने सौंदर्य से काल को भी चकमा देकर आकाश में मस्तक ऊंचा करके संसार को सम्राट की भांति यह संदेश देता है कि “हे प्रिए मैं तुम्हें भुला नहीं हूं।

    ताजमहल पर निबंध (350 शब्द)

    प्रस्तावना: विश्व के सात आश्चर्य में से एक है। यह आगरा स्टेशन से करीब 2 मील जमुना नदी के दाहिने किनारे पर स्थित है। इसका निर्माण प्रसिद्ध मुगल सम्राट शाहजहां ने अपनी प्रिय बेगम मुमताज महल के लिए करवाया था। 20000 कारीगरों द्वारा लगभग 20 वर्षों में इस अपूर्व भवन का निर्माण हो सका। इसको बनाने में जो ध्यान धन व्यय हुआ उसका अनुमान भी लगाना असंभव है।

    ताजमहल का वर्णन: ताजमहल पहुंचने के पूर्व लाल पत्थरों से बने हुए एक विशालकाय द्वार में प्रवेश करना पड़ता हैजहां सफेद पत्थरों पर कुरान की आयतें लिखी हैं। इसके द्वार के पास ही एक प्रदर्शनगृह में सुरक्षित मुगल सम्राटों के चित्र इतने सजीव हैंमनो लगता है कि वह कुछ बोलना चाहते हैं। वहीं पर उनके अस्त्र-शस्त्र तथा बहुमूल्य पात्र भी हैं। भीतर आगे बढ़ने पर एक जल कुंड में खिले हुए कमल तथा बहुरंगी मछलियां ईश्वर की सृष्टि की विविधता का प्रमाण देती हैं। मध्य भाग में 186 वर्ग फीट का संगमरमर का एक चबूतरा हैजिस पर ताज महल स्थित है। चबूतरे के चारों और गगनचुंबी भव्य मीनारें हैंजिन पर चढ़ने के लिए घुमावदार सीढ़ियां हैं। इन चारों मीनारों के मध्य संगमरमर के ऊंचे चबूतरे पर ताज का 275 फीट ऊंचा विशाल गुम्बद है। जिसके चारों ओर छोटे-छोटे अनेक गुंबद हैं। ताज के चारों ओर संगमरमर के दालान हैं। ताज के मध्य भाग में मुमताज महल की तथा उसी के बगल में शाहजहां की समाधि है। समाधि के चारों ओर जालीदार संगमरमर का घेरा है।

    उपसंहार: ताजमहल को बने 300 वर्ष से अधिक हो गए हैंकिंतु देखने में यह प्रतीत होता है मानो अभी-अभी बनकर पूरा हुआ हो। शरद पूर्णिमा को तो ताजमहल की शोभा में सचमुच चार चांद लग जाते हैं। इस अनूठी रचना से मुगल सम्राट शाहजहां ने केवल दो प्रेमियों को अमरत्व प्रदान नहीं किया बल्कि कला के प्रति अपने अद्भुत प्रेम प्रदर्शन के साथ ही भारतीय कला का उत्कृष्ट नमूना भी संसार के समक्ष रखा है। जब तक ताजमहल रहेगातब तक कला की उच्चता का ताज भी भारत के सिर पर रहेगा और कला के सभी अभिमानी देशों में भारत सिरमौर बना रहेगा।

    ताजमहल पर निबंध (500 शब्द)

    प्रस्तावना: ताजमहल संसार के सात आश्चर्य में से एक है। मुगल सम्राट शाहजहां ने यह प्रेम-स्मारक अपनी प्रियतमा मुमताज महल के नश्वर शरीर को एक दिव्य आश्रय देने के लिए बनवाया था। मुमताज महल के नाम पर ही इसका नाम ताजमहल पड़ा। यह एक प्रेमी के हृदय की निर्मल प्रस्तर मूर्ति है। वास्तव में यह स्वप्नलोक की सी प्रतीत होती है। एक किवदंती भी है कि शाहजहां ने इसका नक्शा पहले पहल स्वप्न में देखा था।

    वर्णन : यह विशाल प्रेम-स्मारक यमुना के तट पर शांत और निस्तब्ध वातावरण में स्थित है। यद्यपि इसका धवल साथ कई मील की दूरी से दिखाई पड़ता है तथापि इसका पूर्ण सौंदर्य निकट जाने से ही प्रतीत होता है पर्वतों और युद्ध की वार्ता की भांति यह दूर से ही रम में नहीं है वरन जितना ही इसके निकट जाओ उतना ही सुंदर प्रतीत होता है ताजमहल तक पहुंचने के लिए हमको लाल पत्थर के एक विशाल द्वार से होकर जाना पड़ता है। जिस पर कुरान शरीफ की आयतें श्वेत पत्थर के अक्षरों से निश्चित अनुपात में लिखी हुई है। ऊपर-नीचे सभी अक्षर एक आकार के दिखाई पड़ते हैं।

    प्रवेश द्वार से निकलकर हम चारों लगे सुंदर पेड़ों को पार करते हुए इस विशाल महल की संगमरमर निर्मित चौकी तक पहुंच जाते हैं। जब जीने में होकर चौकी के ऊपर पहुंचते हैं तो हमको वहां एक सुडौल इमारत तथा उसके चारों कोनों की चारमीनारो के दर्शन होते हैं। वहां पहुंचते ही हमको विशालता और सौंदर्य के पुण्यदर्शन मिलते हैं। इसके प्रत्येक दरवाजे पर कुरान की आयतें काले पत्थर के अक्षरों पर अंकित है।

    इस विशाल भवन का पूर्ण सौंदर्य शरद पूर्णिमा के दूधिया प्रकाश में दिखाई देता है। किंतु सूर्य के प्रकाश में भी इसके ऊपर के भाग में जड़े हुए रत्नों की चमक-दमक सभी को आकर्षित करती है। चांदनी रात में तो यह जगमगाता स्मारकनभ मंडल के उज्जवल प्रकाश में नक्षत्रों की प्रतिमूर्ति सा प्रतीत होता हैं। भीतर जाकर जब हम पच्चीकारी के काम के अपूर्व नमूने देखते हैं। ऊपर नीचे सब एक सा काम है। नाना प्रकार की फूल पत्तियां दिखाई पड़ती हैं। भीतर संगमरमर के जड़ाऊ कटघरे के भीतर दो सुंदर कमरे कब्र दृष्टिगोचर होती हैं। उस विशाल भवन में प्रतिध्वनि बड़ी देर तक सुनाई पड़ती है। नीचे एक अंधेरी गुफा में असली कब्रों के दर्शन होते हैं। वहां पूर्ण शांति का साम्राज्य दिखाई पड़ता है।

    कहा जाता है कि इस विशाल भवन के निर्माण के लिए भारतवर्ष, फारस तथा इटली के कुशल से कुशल कारीगरों ने काम किया। 17 वर्ष तक 20000 आदमी प्रतिदिन काम करके इस भवन के निर्माण में सफल हुए थे।

    उपसंहार : ताज महल भारतीय शिल्प कला का अपूर्व नमूना है। 300 वर्ष के उपरांत भी धूप, वर्षा, शीत को सहता हुआ यह प्रेम-स्मारक आज भी नया सा प्रतीत होता है। यद्यपि कोई भी वस्तु काल के प्रभाव से नहीं बचती, परंतु इस स्मारक के संबंध में काल की गति रुकी हुई सी प्रतीत होती है। यह सुंदर भवन मकबरा चिरकाल तक मुगल साम्राज्य के ऐश्वर्य तथा उस समय के कला-कौशल का परिचय देता रहेगा।

    ताजमहल पर निबंध (1600 शब्द)

    प्रस्तावना: ताजमहल की गणना संसार के सात आश्चर्य में की जाती है। विश्व के कोने-कोने से एक विशाल स्मारक को देखने के लिए पर्यटक आते हैं और इस अद्भुत कृति को देखकर अपने नेत्रों को तृप्त करते हैं। शायद ही संसार की किसी अन्य इमारत को इतना गौरव प्राप्त हुआ होगा। मुगल बादशाह शाहजहां के पत्नी प्रेम का उत्कृष्ट उदाहरण आज लगभग साढे 300 वर्षों के उपरांत भी ताजमहल के रूप में ज्यों का त्यों विद्यमान है। प्रेम अमिट होता है परंतु प्रेम के स्थूल रूप की अमिटता की कल्पना ताजमहल से पूर्व किसी ने नहीं की थी।

    यह विशाल और भव्य इमारत आगरा में यमुना नदी के किनारे पर स्थित है। 17 वी शताब्दी के मध्य भाग में मुगल बादशाह शाहजहां ने इसका निर्माण कराया था। शाहजहां और उसकी पत्नी मुमताज महल का प्रेम प्रसिद्ध था। सम्राट की बेगम की परम अभिलाषा थी कि उनकी स्मृति को अमर बना दिया जाए। अपनी महत्वाकांक्षी पत्नी की इच्छा पूर्ति के लिए प्रेमी शाहजहां ने ताजमहल के रूप में ऐसी प्रेम प्रतिमा संसार में खड़ी कर दी, जो उसकी प्रेमिका की याद को अमर तो नहीं लेकिन युगों तक स्थाई अवश्य बनाए रखेगी।

    ताजमहल का निर्माण : कहा जाता है ताजमहल का नक्शा शाहजहां ने स्वप्न में देखा था। अपने स्वप्न को यथार्थ करने के लिए उसने दूर-दूर से कुशल कारीगर बुलाए और सन 1631 में इस संसार प्रसिद्ध इमारत के निर्माण का कार्य प्रारंभ हुआ। देश के विभिन्न भागों से बहुमूल्य पत्थर तथा अन्य सामान मंगवाया गया। 20,000 से अधिक कारीगर और मजदूरों ने 20 वर्ष से अधिक समय तक इसके निर्माण में कार्य किया। फ्रांस और इटली जैसे दूरस्थ देशों से भी कारीगरों के आने के विषय में कहा जाता है। 20 करोड़ से अधिक रुपया इसके निर्माण में व्यय हुआ। कुछ भी हो यह भवन स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है।

    ताजमहल का वर्णन : ताजमहल की सुंदरता का वर्णन शब्दों की शक्ति से बाहर है। अनेकों लेखकों और कवियों ने इसकी प्रशंसा के गीत गाए हैं। परंतु यह कहना कि वह अपने प्रयास में सफल हुए हैं, नितांत भूल होगी। मुख्य भवन के बाहर लाल पत्थर का एक विशाल प्रवेश द्वार है, जिससे होकर ताजमहल के प्रांगण में प्रवेश किया जाता है। प्रवेश द्वार की दीवारों में श्वेत पत्थर के अक्षरों में कुरान की आयतें इस अनुपात में अंकित हैं कि देखने वाले को वह समान आकार की लगती हैं। प्रवेशद्वार में ही एक छोटा सा अजायबघर है, जिसमें मुगल बादशाहों के समय की बहुत सी वस्तुएं यथा स्थान बड़ी व्यवस्था के साथ रखी हुई हैं। इस प्रवेश द्वार से ताजमहल तक पहुंचने के लिए पत्थर का एक चौड़ा मार्ग है, जिसके मध्य में फव्वारों की पंक्ति से निकलती एक जलधारा है। मार्ग के दोनों ओर एक ही आकार के आकार वाले सुंदर वृक्ष क्रम से लगे हुए हैं, जो शोक पूर्ण मुद्रा में भवन के मौन प्रहरी से प्रतीत होते हैं। इस वृक्ष पंक्ति से हटकर इधर-उधर के उद्यानों की हरी-भरी घास अत्यंत ही आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करती है। मार्ग में आगे चलकर एक बड़ा सा रमणीक जलकुंड है, जिसमें कमल के विकसित पुष्पों और रंगीन मछलियों की क्रियाएं क्रीडा हृदय को प्रफुल्लित कर देती हैं। जल कुंड के चारों ओर संगमरमर की बेंच पड़ी हुई हैं। इन पर बैठकर दर्शक वृंद जलकुंड और आसपास के उद्यानों की शोभा निहारते हैं। यहां से ताजमहल का विशाल चबूतरा और मुख्य इमारत भी स्पष्ट दिखाई पड़ती है। जिस चबूतरे पर ताज महल स्थित है वह 18 फुट ऊंचा है और इसका क्षेत्रफल 300 वर्ग फुट से भी अधिक है। चबूतरे के चारों ओर कोनों पर संगमरमर से बनी हुई गगनचुंबी चारमीनार हैं। यह चारों मीनारें समान आकार की है तथा प्रत्येक की 40 मीटर ऊंचाई है। मीनारों के भीतर सीढ़ियां बनी हुई हैं जिन पर हो कर दर्शक लोग मीनारों के ऊपर जा सकते हैं। ऊपर से नीचे का दृश्य बड़ा ही विचित्र लगता है। मीनारों के ऊपर बैठे हुए दर्शकों को नीचे चबूतरे पर चलते हुए व्यक्ति खिलौने जैसे लगते हैं। बहुत थोड़े लोग ही इन मीनारों पर चढ़कर नीचे की ओर दृष्टिपात करने का साहस कर पाते हैं।

    चबूतरे के मध्य भाग में ताजमहल का मुख्य भवन है। इस भवन का गुंबद लगभग 73 मीटर तक आकाश की ओर उठा हुआ है। संसार में इतना ऊंचा गुंबद अन्य कहीं कठिनाई से ही देखने को मिलेगा। इसके चारों ओर छोटे-छोटे चार गुंबद और हैं, जिनके अनुपात में मध्य गुंबद की विशालता और अधिक बढ़ जाती है। समूची इमारत सफेद संगमरमर से बनी हुई है। जिसकी दीवारों पर काले पत्थर के अक्षरों में अंकित कुरान की आयतें बड़ी ही सुंदर प्रतीत होती हैं। विभिन्न रंगों के पत्थरों से बने हुए भांति-भांति के बेल-बूटे आज भी प्राचीन भारत की उत्कृष्ट पच्चीकारी कला का एक आदर्श उपस्थित कर रहे हैं।

    समाधिओं का वर्णन : बड़े गुंबद के नीचे शाहजहां और मुमताज महल की समाधिया स्थित है। जिन तक जाने के लिए ऊपर के चबूतरे से नीचे को सीढ़ियां बनी हुई है। ऊपर की समाधिया असली समाधियों की नकल हैं। शाहजहां की समाधि मुमताज महल की समाधि से कुछ ऊंची है। इन समाधियों के चारों ओर प्रदक्षिणा मार्ग है, जिसके द्वारा दर्शक उनकी परिक्रमा करते हैं। इस स्थान पर इतना अंधकार है कि वहां बिना मोमबत्ती अथवा लालटेन के कुछ दिखाई नहीं देता। असली समाधियों के तहखाने का दृश्य बड़ा ही सुंदर है। वहां सुगंधित अगरबत्तीयों और लोबान के सुगंधित धुएं से मन को प्रसन्नता मिलती है। मोमबत्ती के प्रकाश में समाधियों की पच्चीकारी जगमगाने लगती है। तहखाने में उपस्थित मुसलमान प्रहरी अपनी वेशभूषा एवं गतिविधि से अब भी मुगल बादशाहों के वैभव की याद दिलाते हैं।

    मनुष्य चाहे जिस धर्म का हो समाधियों के निकट जाकर उन्हें प्रणाम किया बिना नहीं रह पाता। वहां का वातावरण ही कुछ ऐसा है कि अनायास मन में श्रद्धा और भक्ति के भावों का संचार कर देता है और दर्शक अपनी सांप्रदायिकता को बुलाकर समाधियों के प्रति नतमस्तक हुए बिना नहीं रह पाता। समाधियों के ऊपर आकर गुंबद के नीचे चारों ओर एक विस्तृत और मनमोहक प्रदक्षिणा मार्ग है। इस प्रदक्षिणा मार्ग में भी पत्थर की खुदाई और पच्चीकारी के अद्भुत दृश्य देखने को मिलते हैं। दीवारों, कोनो, जालियों एवं मेहराबों इत्यादि का सादृश्य तथा अनुपात दर्शक को आश्चर्यचकित कर देता है।

    अन्य दृश्य : ताजमहल के उत्तर में इसके चबूतरे को स्पर्श करती हुई यमुना नदी प्रवाहित होती है। चबूतरे पर खड़े होकर यमुना नदी के जल प्रवाह का दृश्य बड़ा ही मनोहर प्रतीत होता है। यमुना से परे दूर-दूर तक फैले हुए खेत भी बहुत अच्छे लगते हैं। मुख्य भवन के तीन ओर पूर्व पश्चिम और दक्षिण में परंतु ताज के घेरे के भीतर रमणीय उद्यान है। जिनमें अनेक प्रकार के सुंदर वृक्ष लगे हुए हैं और समूची भूमि में हरी-हरी घास की चादर फैली हुई है। गुलाब के रंग-बिरंगे पुष्पों से उद्यान की शोभा और भी अधिक बढ़ जाती है। दर्शकों को उद्यानों की सैर करने और मखमली घास पर बैठकर गपशप करने में विशेष आनंद आता है। स्थान-स्थान पर नल और फव्वारे लगे हुए हैं, जिनका शीतल जल पीकर मन तृप्त हो जाता है।

    शरद पूर्णिमा की रात्रि में ताजमहल की शोभा : यूं तो सभी समय ताज महल की शोभा दर्शनीय है और प्रतिदिन ही यहां सैकड़ों यात्री आते जाते रहते हैं परंतु शरद पूर्णिमा की रात्रि को इसकी छटा अवर्णनीय हो जाती है। उस रात्रि को पूर्णचंद्र की शुभ्र ज्योत्सना में ताज देदीप्यमान हो उठता है। दूर से देखने में तो ऐसा प्रतीत होता है कि मानो इसे सांचे में ढाल कर खड़ा कर दिया गया हो। ताजमहल की दीवारों के बहुत से बहुमूल्य पत्थर चंद्र किरणों की आभा से हीरे के समान जगमगाते हुए आकाश के तारों की बराबरी करने लगते हैं। सहस्त्र नर-नारियों के समूह शरद पूर्णिमा की रात्रि को ताज की अवर्णनीय शोभा से अपने नेत्रों को तृप्त करने वहां पहुंचते हैं। मध्यरात्रि में जबकि चंद्रमा अपने यौवन पर होता है, ताजमहल के संगमरमर के शीतल चबूतरे पर चहलकदमी करते हुए दर्शक अपने हृदय में अपूर्व उल्लास और शांति का अनुभव करते हैं। स्त्री और पुरुष, बालक और वयस्क, धनी और निर्धन सभी तन्मय होकर ताज की शोभा एकटक निहारते हैं। जमुना के शांत एवं निर्मल जल में ताजमहल का प्रतिबिंब अनूठे सौंदर्य की उत्पत्ति करता है, जिसे देखकर मुख पर आश्चर्य मिश्रित अलौकिक आनंद की झलक देखी जा सकती है। दशकों के झुंड अपनी-अपनी टोली बनाकर विभिन्न प्रकार से ताज के नीचे अपना मनोरंजन करते हैं। कवि कविता करने में और चित्रकार चित्र बनाने में तल्लीन हो जाते हैं। कुछ साहसी नवयुवक कभी-कभी जमुना के निर्मल जल में नौका विहार करने निकल पड़ते हैं। कुछ गगनचुंबी इमारतों पर जाकर अपना आसन लगा लेते हैं। ताश, कविता पाठ, अंताक्षरी, गायन आदि के विभिन्न साधनों द्वारा दर्शक गण अर्धरात्रि ताजमहल के विस्तृत प्रांगण में क्रीड़ायें और मनोरंजन करते रहते हैं। वास्तव में शरद पूर्णिमा की रात्रि जैसी चहल-पहल ताजमहल में फिर कभी नहीं होती।

    उपसंहार : भारतवर्ष को ताजमहल के ऊपर गर्व है। भारतीय निर्माण कला और पच्चीकारी के इस उत्कृष्ट नमूने को देखकर विदेशी यात्री भी दांतों तले उंगली दबा जाते हैं। और आश्चर्य की बात तो यह है कि लगभग साढे 300 वर्ष के लंबे समय में भी इसकी सुंदरता में कोई अंतर नहीं आया है। वर्षा, ग्रीष्म, शीत, ओले, वायु के झोंके आदि प्रकृति की किन्ही भी विनाशकारी शक्तियों का इस पर प्रभाव नहीं पड़ा। इन सब को सहन करता हुआ ताजमहल आज भी निश्चिंत भाव से अपने प्राचीन गौरव को लिए हुए खड़ा हुआ है। इसकी खुदाई, चित्रकारी, पच्चीकारी, कटाई और बनावट को देखकर मुगलकालीन वास्तुकला की श्रेष्ठता का परिचय मिलता है। शाहजहां के प्रेमी हृदय और उच्च कल्पना की प्रतिमूर्ति है ।

    एक फ्रांसीसी महिला ने ताजमहल को देखकर अपने पति से कहा कि यदि वह उसकी कब्र पर ऐसी ही समाधि बनवा सके, तो वह उसी समय प्राण त्यागने को तैयार है। वास्तव में विश्व के वक्ष स्थल पर कदाचित ही किसी प्रेयसी को अपने प्रेमी से ऐसा दिव्य अलौकिक एवं स्थाई स्मृति चिन्ह उपहार में मिला होगा।

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