स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत (Operant ConditioningTheory of Skinner in Hindi)

स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत (Operant ConditioningTheory of Skinner in Hindi) स्किनर (1938) द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतसक्रिय अनुबंधन या

स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत (Operant ConditioningTheory of Skinner in Hindi)

स्किनर (1938) द्वारा प्रतिपादित सिद्धांतसक्रिय अनुबंधन या क्रिया प्रसूत अनुबंधन कहा जाता है। सक्रिय अनुबंधन की अवधारणा यह है कि प्राणी को वांछित उद्दीपक या परिणाम प्राप्त करने या कष्टदायक उद्दीपक से बचने के लिए प्रत्याशित, उचित या सही अनुक्रिया (व्यवहार) पहले स्वयं प्रदर्शित करनी होती है। अर्थात उद्दीपक या परिस्थिति के निमित्त प्राणी द्वारा किया जाने वाला व्यवहार ही परिणाम का स्वरूप निर्धारित करता है। इसी कारण इसेसक्रिय अनुबंधन कहते हैं (Hulse et al. 1975 ) । इसी आधार पर इसे क्रियाप्रसूत अधिगम (Operant learning) भी कहा जाता है (Hilgard and Bower, 1981) ৷ 

स्किनर ने चूहों पर प्रयोग किया। प्रयोग करने के लिए उन्होंने एक विशेष बक्से के आकार का एक यंत्र बनाया जिसे उन्होंनेक्रियाप्रसूत अनुबंधन कक्ष की संज्ञा दी, लेकिन बाद में इसको स्किनर बाक्स (Skinner Box) कहा गया।

स्किनर का क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत

स्किनर के लीवरबाक्स में लीवर को दबाने पर प्रकाश या किसी विशेष आवाज होने के साथ- साथ भोजन- तश्तरी में थोड़ा-सा भोजन आ जाता है। प्रयोग के अवलोकनों को लिपिबद्ध करने के लिए लीवरका सम्बन्ध एक ऐसी लेखन व्यवस्था (Recoding System) में रहता है जो प्रयोगकेबीच में समय के साथ-साथ लीवर दबाने की आवृत्ति की संचयी ग्राफ (Cumulative Graph) के रूप में अंकित करती रहती है।

प्रयोग हेतु स्किनर ने एक भूखे चूहे को स्किनर बाक्स में बंद कर दिया। प्रारम्भ में चूहाबाक्स में इधर-उधर घूमता रहा तथा उछल-कूद करता रहा। इसी बीच में लीवर दब गया, घण्टी की आवाज हूई और खाना तश्तरी में आ गया। चूहा तुरन्त भोजन को नहीं देख पाता है लेकिन बाद में देखकर खा लेता है। इसी तरह कई प्रयासों के उपरान्त वह लीवर दबाकर भोजन गिराना सीख जाता है। इस प्रयोग में चूहा लीवर दबाने के लिए स्वतन्त्र होता है वह जितनी बार लीवर दबाएगा घण्टी की आवज होगी और भोजन तश्तरी में गिर जाएगा। स्किनर भोजन प्राप्त करने के बाद से समय अन्तराल में लीवर दबाने के चूहे के व्यवहार का विश्लेषण करके निष्कर्ष निकाला कि भोजन रूपी पुनर्वलन (Reinforcement) चूहे को लीवर दबाने के लिए प्रेरित करता है एवं पुनर्बलन के फलस्वरूप चूहा लीवर दबाकर भोजन प्राप्त करना सीख जाता है। अर्थात क्रिया प्रसूत (Operant Response) के बाद पुनर्बलित उद्दीपक (Reinforcement Stimulus ) दिया जाता है तो प्राणी उसे बार-बार दोहराता है और इस प्रकार से मिले पुनर्बलन से सीखने में स्थायित्व आ जाता है।

सक्रिय अनुबंधन में पुनर्बलन (Reinforcement in Operant Conditioning)

नैमित्तिक अनुबंधन, सक्रिय अनुबंधन या संक्रियात्मक अनुबंधन में पुनर्बलन की विशेष भूमिका होती है। जैसे-उचित या सही व्यवहार (अनुक्रिया) किएजाने पर धनात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement) की आपूर्ति की जाती है या अनुचित व्यवहार किए जाने पर नकारात्मक पुनर्बलन(दण्ड) का उपयोग किया जाता है ताकि उसकी पुनरावृत्ति न हो सके। प्रबलनों को चार वर्गों में विभक्त कर सकते हैं-

1. धनात्मक पुनर्बलन (Positive Reinforcement ) - कोई भी सुखद वस्तु या उद्दीपक जो उचित व्यवहार होने पर प्रयोज्य को प्राप्त होता है। जैसे-अच्छे अंक प्राप्त करना । यह सम्बन्धित व्यवहार के प्रदर्शन की संभावना में वृद्धि करता है।

2. नकारात्मक पुनर्बलन (Negative Reinforcement) - किसी उचित व्यवहार प्रदर्शित होने पर कष्टप्रद वस्तु की आपूर्ति रोक देना। इससे उचित व्यवहार के घटित होने की संभावना बढ़ती है। जैसे- शरारत कर रहे किसी बच्चे को तब जाने देना जब वह नोक-झोंक बन्द कर दे।

3. धनात्मक दण्ड (Positive Punishment) - किसी अनुचित व्यवहार के घटित होने पर किसी कष्टप्रद वस्तु या उद्दीपक को प्रस्तुत करना । जैसे-परीक्षा में कम अंक प्राप्त करने पर छात्रा की प्रशंसा न करना या निन्दा करना। इससे अनुचित व्यवहार की पुनरावृत्ति की संभावना घटती है।

4. नकारात्मक दण्ड (Negative Punishment) - किसी अनुचित व्यवहार के घटित होने पर सुखद वस्तु की आपूर्ति रोक देना । इससे अनुचित व्यवहार की संभावना घटती है। जैसे- उदण्ड व्यवहार कर रहे बालक को टीवी देखने से रोक देना।

पुनर्बलन अनुसूची (Schedule of Reinforcement)

पुनर्बलन की आपूर्ति कई रूपों में की जा सकती है।

1. स्थिर अनुपात सूची (Fixed Ratio Schedule) - निश्चित संख्या में अनुक्रिया करने पर पुरस्कार देना।

2. परिवर्तनीय अनुपात अनुसूची (Variable Ratio Schedule) - भिन्न-भिन्न संख्या अनुक्रियाएँ करने पर पुरस्कार देना।

3. स्थिर अन्तराल अनुसूची (Fixed Interval Schedule) - एक निश्चित अन्तराल पर पुरस्कार की आपूर्ति करना।

4. परिवर्तनीय अंतराल अनुसूची (Variable Interval Schedule) - भिन्न-भिन्न अन्तरालों पर पुनर्बलन या पुरस्कार की आपूर्ति करना।प्राचीन एवं नैमित्तिक अनुबंधन की प्रक्रियाओं में कुछ विशेष प्रकार की घटनाएँ प्राप्त होती हैं। इन्हें अनुबंधन के गोचर कहा जाता हैं ।

क्रिया प्रसूत अनुबंधन का शिक्षा में प्रयोग (Educational Implications of Operant Conditioning)

  1. इस अधिगम में अभ्यास द्वारा क्रिया पर विशेष बल दिया जाता है। यह आवश्यक है कि शिक्षक बालक को उचित कार्य के लिए समय-समय पर पुनर्बलन देते रहें ।
  2. इस सिद्धांत के माध्यम से शिक्षक बालक के सीखे जाने वाले व्यवहार को स्वरूप प्रदान करता है।
  3. बालकों में शब्द भण्डार को बढ़ाने के लिए क्रियाप्रसूत अधिगम सिद्धांत का प्रयोग किया जाता है।
  4. काम की समाप्ति पर या सफलता मिलने पर प्रसन्नता होती है जिससे संतोष प्राप्त होता है और जो क्रिया को बल देता है।
  5. क्रिया प्रसूत सिद्धांत मन्द बुद्धि वाले तथा मानसिक रोगियों को आवश्यक व्यवहार के सीखने में सहायता देता है।
  6. क्रिया प्रसूत अधिगम में सीखी जाने वाली क्रिया को कई छोटे-छोटे सोपानों में बाँट लिया जाता है। शिक्षा में इस विधि का प्रयोग करके सीखने की गति तथा सफलता वृद्धि की जा सकती है।
  7. सीखने के अन्तर्गत अभिक्रमित सम्बन्धी विधि प्रकाश में आई है जिसको कि क्रिया-प्रसूत अनुबन्ध द्वारा गति दी जा सकती है।
  8. स्किनर के अनुसार यदि व्यक्ति को कार्य के परिणामों की जानकारी होती है तो उसके सीखने में इसका काफी प्रभाव पड़ता है उसका व्यवहार प्रभावित होता है। घर के कार्य में संशाधन का भी छात्र के सीखने की गति तथा गुण पर प्रभाव पड़ता है। 
  9. स्किनर का यह सिद्धांत अभिप्रेरणा पर बल देता है। अतः शिक्षक का कार्य है कि वह बालकों को, विषय-वस्तु के उद्देश्य को स्पष्ट करके, उद्देश्य पूर्ति के लिए प्रोत्साहित करता रहे। बालक सदैव क्रियाशील रहें इसके लिए उन्हें प्रेरणा प्रदान करनी चाहिए।
  10. शिक्षक को बालक को सिखाने के लिए अभ्यास एवं पुनरावृत्ति जैसी विधियों पर विशेष बल देना चाहिए।

क्रिया प्रसूत अनुबंधन का सिद्धांत की आलोचना

1. मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि पशुओं पर किए गए प्रयोगों के आधार पर उसकी समानता सामाजिक अधिगम परिस्थितियों से कैसे की जा सकती है।

2. क्रिया-प्रसूत (Operant) और उत्तेजक या उद्दीपन प्रसूत ( Respondent) में भ्रम रहता है जिससे क्रिया-प्रसूत अनुबंधन और उद्दीपन प्रसूत अनुबंधन में साफ अंतर नहीं किया जा सकता है।

3. स्किनर क्रिया-कलाप और अधिगम (Performance and Learning) में कोई अन्तर नहीं करते हैं जबकि कई मनोवैज्ञानिक इस निष्कर्ष पर पहुँचे हैं कि पुनर्बलीकरण सीखने की अपेक्षा अक्ष्यत: क्रिया-कलाप को प्रभावित करता है।

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