जोहरा का चरित्र चित्रण - Johra ka Charitra Chitran

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जोहरा का चरित्र चित्रण - Johra ka Charitra Chitran

जोहरा का चरित्र चित्रण - जोहरा एक वेश्या है, जो रमानाथ की चंगुल में फँसाए रखने के लिए पुलिस द्वारा रखी जाती है। पुलिस को आशंका हो गई थी कि कहीं रमानाथ पुलिस की कैद से परेशान होकर भाग न जाए। जोहरा के चरित्र की अवतारणा के पीछे दो उद्देश्य परिलक्षित होते है-एक तो वह उसको सामने लाकर पुलिस के हथकंडों को दिखाना चाहता है और दूसरे वेश्या - जीवन पर प्रकाश डालना चाहता है। वेश्यावृति व्यापार का साधन है, जहाँ लोगों को प्रकाश नहीं, अंधकार मिलता है; वफा नहीं बल्कि बेवफाई मिलती है। वेश्या के जीवन में इसके अतिरिक्त और है भी क्या ? वह इसके अतिरिक्त दे भी क्या सकती है? रमानाथ इसके मोह - जाल में फँसता चला जाता है, लेकिन वह उसे परिणाम से अपरिचित नहीं है। वह जोहरा से कहता है- मैं डरता हूँ, कहीं तुमसे प्रेम न बढ़ जाये, उसका नतीजा इसके सिवा और क्या होगा कि रो-रोकर जिंदगी कायूँ । तुमसे वफा की उम्मीद क्या हो सकती है। जोहरा से रमानाथ का लगाव बढ़ने लगा। उसका निश्चल प्रेम देखकर जोहरा उससे छल न कर सकी । रमानाथ उसके प्रेम को पाकर सोचता है कि कामिनी, जिस पर बड़े-बड़े रईस मुग्ध हैं, मेरे लिए इतना बड़ा त्याग करने को तैयार है । जिस खान में बालू ही मिलता है, उसमें जिसे सोने के डले मिल जायें, क्या वह परम सौभाग्यशाली नहीं है? 

लेखक ने जोहरा को अन्य वेश्याओं के समान धन का लालची एवं निर्मोही चित्रित नहीं किया। वह पहले स्त्री है, तत्पश्चात् वेश्या। उसके पास भी स्त्री हृदय है जो पुरूष से प्रेम करना चाहता है। उसे अपने जीवन में रमानाथ ही एक ऐसा व्यक्ति मिला जो निष्कपट होकर उसे प्रेम दे सका। वह वेश्याओं के घर जाने वाले व्यक्तियों के समान थी। उसे यह समझते देर न लगी कि रमानाथ को मुझे हृदय से अनुराग है, वह सरल एवं सहृदय व्यक्ति है। रमानाथ ने जब जालपा को खोज निकालने की प्रार्थना की तो उसने उसे तुरंत स्वीकार कर लिया। उसके चरित्र में उसे उठाने के लिए उसका यह कार्य पर्याप्त है। वह स्वयं रमानाथ की प्रेमिका होने पर भी उसकी पत्नी की खोज करने का प्रस्ताव अस्वीकार नहीं करती और पूरी तल्लीनता के साथ जालपा के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए जुट जाती है। जोहरा में चतुरता, कुशलता, व्यावहारिकता के सभी गुण विद्यमान हैं। वह जिन उपायों से जालपा का पता लगा लेती है। वह सराहनीय है। वह जालपा के त्यागपूर्ण जीवन से प्रभावित होकर कहती है - जब मैं जालपा से मिली तो उसकी निष्काम सेवा, उसका उज्ज्वल तप देखकर मेरे मन के रहे- सहे संस्कार भी मिट गए। विलासयुक्त जीवन से मुझे घृणा हो गई। मैंने निश्चय कर लिया, इसी आँचल में मैं आश्रय लूँगी। 

वह पुलिस के चंगुल में अवश्य फँसी हुई है। वेश्या - जीवन उसका व्यापार है, लेकिन परिस्थितियाँ उसकी जीवनधारा को मोड़ ले जाती हैं। वह रमानाथ के सरल एवं निःस्वार्थ प्रेम तथा जालपा के त्यागपूर्ण जीवन से इतनी प्रभावित होती हैं कि वेश्या - जीवन को छोड़कर रमानाथ के साथ ग्रामीण जीवन अपना लेती है। उसके चरित्र की महानता यहाँ आकर समाप्त नहीं हो जाती है, बल्कि वह बाढ़ में फँसे एक व्यक्ति की रक्षा करती हुई अपने प्राणों को त्याग देती है। यह उसके चरित्र का सबसे उज्ज्वल अंश है। दूसरों की सहायता और रक्षा करते हुए वह स्वयं को बलिदान कर देती है। वह प्रारंभ में घृणा, किंतु अंत में श्रद्धा की पात्र बन जाती है। उसका जीवन अंधकार और धोखे से भरा पड़ा था, लेकिन परिस्थितियों ने उसे प्रकाश और प्रेम के वातावरण में लाकर खड़ा कर दिया। पतन के कीचड़ में फँसे हुए व्यक्ति का चरित्रवान् बन जाना बहुत कठिन होता है, लेकिन जोहरा ने यही कठिन कार्य करके एक आदर्श उदाहरण प्रस्तुत किया है। 

यहाँ यह ज्ञातव्य है कि आदर्श के मोह में पड़कर प्रेमचन्द ने अपने पात्रों में यत्र-तत्र इतने आकस्मिक एवं असंभावित परिवर्तन किए हैं, जिनकों पाठक की तर्क - बुद्धि यथातथ्य रूप में स्वीकार एवं आत्मसात् नहीं कर पाती। मनोविज्ञान की कसौटी पर कसे जाने पर ये स्थल और भी बेतुके प्रतीत होने लगते हैं। यही बात जोहरा के संबंध में भी सत्य उतरती है। उसके चरित्र का परिवर्तन लेखक ने आदर्शवाद की प्रेरणा से ही किया है। अतः वह यथार्थवादी कम है और आदर्श अधिक।

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