बचन सिंह का चरित्र चित्रण - Bachan Singh ka Charitra Chitran

Admin
0

बचन सिंह का चरित्र चित्रण - Bachan Singh ka Charitra Chitran

बचन सिंह का चरित्र चित्रण - बचन सिंह इस कहानी में प्रतिनायक के रूप में सामने आता है वह अस्पताल में कम्पाउण्डर के पद पर कार्यरत है। वह मरीज़ों की देखभाल करता है एवं अपना कर्त्तव्य पूरी निष्ठा से निभाता है। वह जगपती की पत्नी चन्दा की तरफ आकर्षित हो जाता है और उसके पति की धन से सहायता करके उसके साथ अनैतिक संबंध बनाता है। उसके व्यक्तित्व की निम्नलिखित विशेषताएं हैं-

अवसरवादी: बचन सिंह हाथ आए मौके को जाने नहीं देता है। वह प्रत्येक अवसर का भरपूर फायदा उठाता है। अस्पताल में चंदा से आकर्षित होकर उस अवसर पर वह दवाईयाँ उपलब्ध करवाता है और चंदा का ध्यान अपनी ओर दिलाता है। चंदा के हृदय में उसके लिए स्थान बना रहे इसलिए वह उसके कड़े भी उसे वापिस कर देता है। चंदा को पति के लिए चिंतित देख दवाईयाँ लाकर देने का आश्वासन इस प्रकार देता है- "दिल छोटा मत करना... जांघ का घाव तो दस रोज़ में भर जाएगा। कूल्हे का घाव कुछ दिन ज़रूर लेगा। अच्छी से अच्छी दवाई दूंगा । दवाईयाँ तो ऐसी हैं कि मुर्दे को चंगा कर दें, पर हमारे अस्पताल में नहीं आतीं, फिर भी... रहीं दवाईयाँ सो कहीं न कहीं से इन्तज़ाम करके ला दूंगा।” दूसरी बार जगपती को काम के लिए चिंतित देखकर वह पैसों से उसकी मदद कर टाल खोल देता है उसके इस एहसान से वह चंदा के करीब आने का मौका प्राप्त कर लेता है।

नारी सौंदर्य के प्रति आसक्त: बचन सिंह ऐसे व्यक्तित्व के रूप में कहानी में सामने आता है जो दूसरे की पत्नी पर नज़र रखता है और समय आने पर उनकी सहायता भी करता है । चन्दा को पति के स्वास्थ्य के लिए बेचैन देखकर उसे आश्वासन देता है। चन्दा जब बचन सिंह को दवाईयों के बदले कड़ा देने आती है तो जिस तरह बचन सिंह चंदा को देखता है उससे स्पष्ट हो जाता है कि वह चन्दा पर बुरी नज़र रखता है जैसे कि प्रस्तुत शब्दों से प्रत्यक्ष पता चलता है- “बचन सिंह ने उसकी सारी काया को एक बार देखते हुए अपनी आंखें उसके सिर पर जमा दीं, जिसके ऊपर पड़े कपड़े के पार नरम चिकनाई से भरे लम्बे-लम्बे बाल थे, जिनकी भाप सी महक फैलती जा रही थी । "

धैर्य बंधाने वाला: बचन सिंह एक कम्पाउंडर होने के साथ-साथ मनुष्य भी है वह मरीजों को हिम्मत देता है और उनके साथ आए सगे-संबंधियों को भी दिलासा देता रहता है जैसे कि वह चन्दा को धैर्य बंधाते हुए कहता है, "दिल छोटा मत करना... जांघ का घाव तो दस रोज़ में भर जाएगा। कूल्हे का घाव कुछ दिन ज़रूर लेगा ।"

जब चन्दा जगपती को दर्द से कराहता देख उद्वेलित हो उठती है तो बचन सिंह उसे दिलासा देते हुए कहता है कि, “च.. च... रोगी की हिम्मत टूट जाती है ऐसे।"

प्रशंसक: बचन सिंह के व्यक्तित्व में ऐसी विशेषता मिलती है जिससे वह सभी के दिल को जीत लेता है और समयनुसार दूसरों को उनके कामों से प्रशंसनीय बना देता है जैसे कि वह चन्दा द्वारा बनाए खाने की तारीफ करते हुए कहता है कि, “क्या तरकारी बनी है! मसाला ऐसा पड़ा है कि उसकी भी बहार है और तरकारी का सवाद भी न मरा। होटलों में या तो मसाला ही मसाला रहेगा या सिरफ तरकारी ही तरकारी । वाह ! वाह ! क्या बात है अन्दाज़ की।"

कर्त्तव्य परायण: बचन सिंह अपना धर्म पूरी निष्ठा से निभाता है वह सरकारी अस्पताल में कम्पाउंडर है और उस अस्पताल का डाक्टर जो कि ड्यूटी पर नहीं आता है। बचन सिंह ही डाक्टर बन कर सभी मरीजों की मरहम पट्टी करता है। कहानी के प्रस्तुत शब्दों से स्पष्ट हो जाता है, "कम्पाउण्डर ही मरीज़ों की देखभाल रखते। बड़ा डाक्टर तो नाम के लिए था या कस्बे के बड़े आदमियों के लिए।"

अंत में कहा जा सकता है कि बचन सिंह ऐसा व्यक्तित्व है जो धन के बलबूते पर दूसरों से अपना उल्लू सीधा करता है वह कम जान पहचान पर भी दूसरों के साथ निकटता बढ़ाता है।

Post a Comment

0Comments
Post a Comment (0)

#buttons=(Accept !) #days=(20)

Our website uses cookies to enhance your experience. Learn More
Accept !