ऊँट के मुँह में जीरा मुहावरे का अर्थ और वाक्य प्रयोग

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ऊँट के मुँह में जीरा मुहावरे का अर्थ

ऊँट के मुँह में जीरा मुहावरे का अर्थ होता है – आवश्यकता से कम देना, आवश्यकता की तुलना में बहुत कम सामान उपलब्ध कराना, आवश्यकता से बहुत कम मिलना; आवश्यकता से कम प्राप्त होना; अधिक खाने वाले को कम चीज़ देना।

ऊँट के मुँह में जीरा मुहावरे का वाक्य में प्रयोग

वाक्य प्रयोग- इस पहलवान को नाश्ते में एक समोसा दे रहे हो! यह तो ऊँट के मुँह में जीरे के समान है। 

वाक्य प्रयोग- अरे, इसका भला दो रोटियों से क्या होगा? यह तो इसके लिए ऊँट के मुँह में जीरा है। 

वाक्य प्रयोग- मुझे कम-से-कम दस हज़ार रुपए चाहिए; उसने केवल पाँच सौ दिए हैं। यह तो ऊँट के मुँह में जीरा देना हुआ। 

वाक्य प्रयोग- भीम को सबके बराबर भोजन मिलना ऊँट के मुँह में जीरा के समान था। 

वाक्य प्रयोग- वर्तमान समय में पर्यावरण प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न प्रयास किए जा रहे हैं। किन्तु इस गम्भीर समस्या के समक्ष वर्तमान में किए जा रहे प्रयास ऊँट के मुँह में जीरा साबित हो रहे हैं।

वाक्य प्रयोग- पहलवान को एक रसगुल्ला खिलाना तो ऊँट के मुँह में जीरा के बराबर है। 

ऊँट के मुँह में जीरा एक प्रसिद्ध लोकोक्ति या हिन्दी मुहावरा है जिसका का अर्थ है – आवश्यकता से कम देना, आवश्यकता की तुलना में बहुत कम सामान उपलब्ध कराना, आवश्यकता से बहुत कम मिलना; आवश्यकता से कम प्राप्त होना; अधिक खाने वाले को कम चीज़ देना। मान लीजिये किसी व्यक्ति को अधिक रुपयों की आवश्यकता है और आप उसे कुछ सौ रूपए देते हैं तो यहाँ ऊंट के मुंह में जीरा कहावत का प्रयोग करेंगे। 

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