Thursday, 16 June 2022

कलम और कॉपी के बीच में संवाद - Copy aur Kalam ka Samvad Lekhan

कलम और कॉपी के बीच में संवाद लेखन : In This article, We are providing कॉपी और कलम के बीच में संवाद लेखन and Copy aur Kalam ka Samvad Lekhan for Students and teachers.

    कलम और कॉपी के बीच में संवाद लेखन

    कलम (कॉपी से ) : मैं तुमसे बहुत खुश रहती हूँ Iतुम्हें प्रणाम करती हूँ लेकिन क्या कहूँ तुम इतने बड़े होकर मुझसे छोटे ही हो जाते हो I

    कॉपी (गुस्से से ) : तुम मुझे प्रणाम कर रही हो या गुस्सा दिला रही हो Iपहले मैं हूँ फिर तू है ,मैं नहीं तू चलेगी कैसे I

    कलम : पहले मैं हूँ फिर तू है ज़रा समझ के देख I

    कॉपी : वो कैसे ?

    कलम : वो ऐसे कि मैं सृष्टि में ब्रह्मा के हाथों सबसे पहले आई हूँ Iतब तुम नहीं थे तुम्हारी उत्पत्ति नहीं हुई थी Iलिखने का काम भोजपत्र पर होता था I फिर उसको कई ऋषिगण पढ़ -पढ़ कर याद कर लेते थे Iफिर उनके मुख से सुनकर उनके छात्र याद कर लेते थे Iउन्हें स्रुतिधर कहा जाता था I

    कॉपी : कुछ इतिहास क्या पढ़ लिया अपनी गुण बखानने लगी I मैं तो सर्वव्यापी हूँ बच्चे से लेकर वृद्धों तक मुझे सम्मान के साथ रखते हैं ,लिखते हैं.पढ़ते हैं I

    कलम : अरे !ज़रा दिनकर जी की रचना तो ज़रा सुन लो :

    "पैदा करती कलम विचारों के जलते अंगारे ,

    और प्रज्ज्वलित प्राण ,देश क्या कभी मिटेगा मारे ।

    लहू गर्म रखने को कलम होती चिंगारी ,

    तुमने इतने ओछे बल पर ले ली विपदा सारी।।


    Copy aur Kalam ka Samvad Lekhan

    कलम : कॉपी! क्या मेरा तुम पर घिसे जाना तुम्हें अच्छा लगता है।

    कॉपी : बहन! जब तुम्हारे द्वारा छात्रों या अन्य लोग मुझ पर सुंदर-सुंदर शब्द लिखते हैं तो मैं काफ़ी खुश होती हूँ।

    कलम : सच ! बहुत अच्छी बात है।

    कॉपी : लेकिन अगर किसी का अक्षर खराब होता है या स्याही मुझ पर फैलाता तो मुझे बुरा लगता है।

    कलम : मैं ऐसा बिलकुल नहीं चाहती लेकिन कई बार मुझे सावधानी से चलाया नहीं जाता तो ऐसा होता है।

    कॉपी : मुझे तो तुम पर गर्व है क्योंकि तुम्हारे बिना मेरा होना ही अधूरा है। तुम्हारे बिना मेरी कोई उपयोगिता नहीं है। मैं तुम्हारा आभारी हूँ।

    कलम : ऐसा मत बोलो, तुम्हारे बिना मेरी भी कोई उपयोगिता नहीं है।


    कलम का कॉपी से संवाद

    कलम : मैं इतनी छोटी हूं तू इतनी बड़ी हो फिर भी मैं तुम्हें रंग देती हूं।

    कॉपी : तुम्हारे रंगने से ही मेरी शोभा बढ़ती है । मैं लोगों के लिए अधिक उपयोगी हो जाती हूं। मैं तुम्हारी आभारी हूं।

    कलम : बहन तुम मुझे बहुत मान दे रही हो । सच पूछो तो हम दोनों एक दूसरे के बिना अधूरे हैं।

    कॉपी : बस मुझे तुमसे एक ही शिकायत है।

    कलम : वह क्या है?  मुझे बताओ बहन मैं उसे दूर करने की पूरी कोशिश करुंगी।।

    कॉपी : कभी-कभी तुम बहुत गंदा लेख लिखती हो जिससे मेरा आकर्षण खत्म हो जाता है।

    कलम : अच्छा बहन में आगे से ध्यान रखूंगी और नियमित सुलेख द्वारा अपना लेख सुधारने का प्रयास करूंगी।


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