Saturday, 7 May 2022

मेला पर निबंध - Essay on Mela in Hindi - एक मेले का वर्णन हिंदी निबंध

मेला पर निबंध - Essay on Mela in Hindi - एक मेले का वर्णन हिंदी निबंध 

Essay on Mela in Hindi : मित्रों, यहाँ हमने मेला पर निबंध लिखा है जिसमें आपको Few Lines on Mela in Hindi, "किसी मेले का आँखों देखा वर्णन हिंदी निबंध", "एक मेले का वर्णन हिंदी निबंध" लिखना सिखाया गया है। These Different Hindi Essays on Mela are Suitable for students of all classes.

मेला पर निबंध - Essay on Mela in Hindi - एक मेले का वर्णन हिंदी निबंध

Few Lines on Mela in Hindi - मेला पर निबंध 15 लाइन

(1) मेला का अर्थ उत्सव मनाने के लिए किया गया आयोजन है। 

(2) मेले कई प्रकार के होते हैं जैसे धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यापारिक मेला आदि।

(3) भारत में समय-समय पर देश के अलग-अलग क्षेत्रों में मेला लगते रहता है।

(4) जब भीड़ सामूहिक रूप से एकत्र होकर जश्न मनाती है तो उसे मेला कहते हैं। 

(5) मेले में सभी जाति, धर्म और संप्रदाय के लोग समान रूप से शामिल होते हैं।

(6) मेले में मिठाई, बर्तन, खिलौने और खाने-पीने की दुकाने लगाई जाती है।

(7) बच्चे हमेशा से मेला देखने के लिए बेहद उत्साहित रहते हैं।

(8) मेले एक तरह से भारतीय विविधता में एकता को भी दर्शाते है।

(9) दशहरा, जन्माष्टमी और दुर्गा पूजा भारत के सर्वाधिक लोकप्रिय मेले हैं। 

(10) सामान्यतः मेले एक दिवसीय होते हैं परन्तु कई मेले बहुदिवसीय भी होते हैं।

(11) मेला छोटे से लेकर बड़े तक अभी को आकर्षित करता है।

(12) मेले में नृत्य, संगीत तथा मनोरंजक कार्यक्रमों का प्रदर्शन होता हैं। 

(13) मेले में बच्चों के लिए कई प्रकार झूले, खिलौने और गेम्स का बंदोबस्त होता है।

(14) कुछ मेलों में सर्कस और जादूगर के कार्यक्रम का भी प्रदर्शन किया जाता है। 

(15) स्थानीय व्यवसाय को प्रोत्साहित करने के लिए भी मेले का आयोजन किया जाता है। 

किसी मेले का आँखों देखा वर्णन हिंदी निबंध - Kisi Ankhon Dekhe Mele ka Varnan

किसी मेले का आँखों देखा वर्णन हिंदी निबंध - भारत मेलों और त्यौहारों का देश है। यहां पर हर रोज कोई न कोई मेला लगा ही रहता है। भारतीय लोगों में मेलों को लेकर बहुत उत्साह रहता है वह मेले से 2 दिन पूर्व ही इसकी तैयारियां करने लग जाते है। मेलों को लेकर सबसे ज्यादा उत्साह है बच्चों में होता है क्योंकि उनको वहां उनके मनपसंद खिलौने एवं आइसक्रीम झूले झूलने को मिलते है। मुझे भी मेले में जाना बहुत पसंद है। हमारे शहर में प्रतिवर्ष दुर्गा पूजा के अवसर पर मेले का आयोजन किया जाता है।  

इस मेले का आयोजन इतना भव्य होता है कि आस-पास के गांव वाले भी इस मेले को देखने आते है। इस दिन हमारे शहर में बहुत चहल-पहल रहती है। हम मेले वाले दिन सुबह उठकर अपना दैनिक कार्य करके मेले में जाने के लिए तैयार होते है। मैं भी अपने दोस्तों के साथ संध्या चार बजे मेला देखने गया। वहाँ बहुत भीड़ थी। अंदर तरह-तरह की दुकानें थीं। मिठाई, चाट, छोले, भेलपुरी तथा खाने-पीने की तरह-तरह की दुकानों में भी अच्छी-खासी भीड़ थी। तरह-तरह के आकर्षक खिलौने बेचने वाले भी थे। गुब्बारेवाला बड़े-बड़े रंग-बिरंगे गुब्बारे फुलाकर बच्चों को आकर्षित कर रहा था। कुछ दुकानदार घर-गृहस्थी का सामान बेच रहे थे। बांसुरी वाला, बाजेवाला, फेरी वाला और चने वाला अपने-अपने ढंग से ग्राहकों को लुभा रहे था ।

मेले में खेलों के स्टाल लगे हुआ थे। हम सभी को बारी-बारी से देखकर आगे बड रहे थे। वहाँ पर कई प्रकार के झूले लगे थे। हमने वहाँ झूलों का आनंद लिया। एक कोने में जादूगर जादू दिखाकर सबका मनोरंजन कर रहा था। हमने जादू भी देखा, जादूगर ने अपने थैले में कबूतर भरा और भीतर से खरगोश निकाला। मेले में खाने-पीने की कई दुकानें थी, हमने चाट और गोलगप्पे समोसे, कचोरी, और मीठे में जलेबी खाई। यह मेला मेरे लिए यादगार रहा। 

एक मेले का वर्णन हिंदी निबंध - Ek Mele Ka Varnan Hindi Nibandh

एक मेले का वर्णन हिंदी निबंधमेला एक प्रकार का सामाजिक उत्सव होता है जो सभी को आनंदित करता है। आज मै उस मेले का वर्णन करूँगा जिसकी यादें आज भी मेरे मस्तिष्क पटल पर अंकित है। हमारे शहर में प्रतिवर्ष जन्माष्टमी के अवसर पर एक भव्य मेले का आयोजन किया जाता है। यह मेला परेड मैदान में लगता है। इस मेले को देखने के लिए सभी शहरवासियों के अलावा दूर-दराज के गाँवों से भी लोग आते हैं।

मै भी जन्माष्टमी का यह मेला देखने के लिए बड़ा उत्सुक था। शाम 7 बजे मैं तैयार होकर अपने माता-पिता के साथ मेला देखने चला गया। चारों और भीड़ थी, मुख्य मार्ग पर तो तिल रखने की जगह भी नहीं थी। सभी भगवन श्री कृष्ण की भव्य झांकियों को देखने में व्यस्त थे। मेले में आयी भीड़ की ख़ुशी का वर्णन शब्दों में नहीं किया जा सकता। मेले में मिठाई, खिलौने, भेलपुरी, चाट-पकौड़ी तथा खाने-पीने की दुकानें सजी थी, जिन्हे देखकर मेरे मुँह में भी पानी आ गया। परन्तु मैंने पहले मेला देखने और बाद में पेट-पूजा करने का निर्णय किया। खिलौनों की दुकानें भी बच्चो को खूब आकर्षित कर रही थीं। सभी खिलौने एक से बढ़ कर एक, बच्चों का मन मोह लेने वाले थे। गुब्बारे वाला बड़े-बड़े रंग-बिरंगे गुब्बारे से आकृतियां बनाकर बच्चों को लुभा रहा था। कुछ दुकानदार लाइटर, स्टोव जैसे घर-गृहस्थी का सामान बेच रहे थे।

मैदान के बीचो-बीच एक बड़ा सा मंच था जोकि मेले का मुख्य आकर्षण था। इस मंच पर श्रीकृष्ण की जीवन लीला का मंचन किया जा रहा था। सभी लोग इस अद्भुत लीला को देखकर भावविभोर हो रहे थे। सचमुच ये मेला मेरे लिए यादगार रहा। मेरे परिवार ने उस मंचन का भरपूर आनंद उठाया। आज भी जब मैं उस दृश्य को याद करता हूँ तो मेरे रौंगटे खड़े हो जाते हैं। यही वो पल भी था जब मेरे कृष्ण भक्ति का जन्म हुआ और मैंने आजीवन सदाचारी रहने का निश्चय किया। 

मेले में बच्चों और बड़ों के लिए छोटे-बड़े झूलों का भी प्रबंध किया गया था। लीला देखने के बाद हमने भी झूला झूलने का निश्चय किया। झूलों के आगे लम्बी-लम्बी-कतार लगी हुयी थी। कुछ झूलों के आगे लिखा था -"कृपया कमजोर दिल वाले इसे न झूलें।" मेरे परिवार में इस झूले से दूर रहना ही उचित समझा। हमारे परिवार ने एक सामान्य झूले की टिकट खरीदी। कुछ ही पलों में हम आसमान से बातें कर रहे थे। यह डर और रोमांच का मिलाजुला अनुभव था। अब बारी थी पेटपूजा की। मेले में कुछ खाया नहीं तो मजा अधूरा रह जाता है। इसलिए हमारा परिवार एक डोसा वाले की दुकान पर गए। वहां हमने मसाला डोसा खाया और मीठे में स्वादिष्ट गुलाब जामुन का आनंद लिया।

अंत में हमारे परिवार ने मेले से विदा ली। सभी बहुत खुश और उत्साहित थे। हमने मेले में जो कुछ देखा, जो सामान खरीदा उसकी बातें कर रहे थे। परन्तु मेरा मन व्याकुल था। जब भी मै अपनी ऑंखें बंद करता, श्री कृष्ण का चेहरा उभरकर मेरे सामने आ जाता। मैं  समझ नहीं पा रहा था की ये क्या था पर कुछ भी हो ये एक सुखद अनुभव था। मेला पीछे छूट गया पर मेले की यादें मेरे मन-मस्तिष्क में अभी तक अंकित हैं। 


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