Friday, 1 April 2022

अल्पसंख्यक का क्या अर्थ है ? अल्पसंख्यकों के प्रकार तथा समस्याओं का वर्णन कीजिए।

अल्पसंख्यक का क्या अर्थ है? अल्पसंख्यकों के प्रकार तथा समस्याओं का वर्णन कीजिए। 

    अल्पसंख्यक का अर्थ

    एक समाज या राष्ट्र में विभिन्न दो या अधिक वर्ग के लोग निवास करते हैं, जिनमें एक वर्ग समूह की संख्या आधी से कम होती है, वह अल्पसंख्यक वर्ग के नाम से जाना जाता है। संक्षेप में जा सकता है कि अल्प व्यक्तियों का समूह अल्पसंख्यक कहलाता है। इसे स्पष्ट करते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने केरल शिक्षा विधेयक (1957) पर अपने निर्णय में कहा है कि -

    "अल्पसंख्यक होने या न होने का प्रश्न एक राष्ट्र की सम्पूर्ण जनसंख्या के सन्दर्भ में निर्धारित किया जाना चाहिए।

    उपर्युक्त कथन से यह स्पष्ट होता है कि अल्पसंख्यक वर्ग में वह समूह आता है जिसकी जनसंख्या 50 प्रतिशत से कम हो। इस प्रकार यह स्पष्ट होता है कि भारत में हिन्दुओं के अतिरिक्त अन्य सभी धार्मिक समूहों को धार्मिक अल्पसंख्यक कहा जा सकता है। 

    भारत में अल्पसंख्यक

    सामान्य भाषा में अल्पसंख्यक वे लोग कहलाते हैं जो धर्म व भाषा की दृष्टि से कम संख्या में हैं, या एक अन्य रूप में कहा जा सकता है कि किसी भी समाज की जनसंख्या में जिन लोगों का धर्म के आधार पर कम प्रतिनिधित्व होता है, उन्हें अल्पसंख्यक कहते हैं। भारतीय जनसंख्या में हिन्दू बहुसंख्यक हैं, क्योंकि सन् 1991 की जनगणना रिपोर्ट के अनुसार देश की कुल जनसंख्या का 82.41 प्रतिशत (67.26 करोड़) हिन्दू हैं। 

    अल्पसंख्यक का क्या अर्थ है ? अल्पसंख्यकों के प्रकार तथा समस्याओं का वर्णन कीजिए।

    सन् 2001 की जनसंख्या के धार्मिक आधार पर आँकड़े अभी उपलब्ध नहीं है। शेष 17.59 प्रतिशत लोग अन्य धर्मों को मानने वाले हैं। भारतीय समाज में सर्वाधिक जनसंख्या हिन्दू धर्म की अनुयायी है, इसके बाद दूसरा स्थान इस्लाम, तीसरा स्थान ईसाई, चौथा स्थान सिख, पाँचवाँ स्थान बौद्ध तथा छठा स्थान जैन धर्म के मानने वालों का है। भारत में अल्पसंख्यक सम्प्रदाय का अर्थ वास्तविक रूप में मुस्लिम और ईसाई सम्प्रदाय से ही हैं। अल्पसंख्यकों में मुसलमानों की संख्या सर्वाधिक है। अल्पसंख्यकों में मुसलमानों के बाद ईसाइयों का स्थान है।

    अल्पसंख्यक के प्रकार - Alpsankhyak ke Prakar

    1. धार्मिक अल्पसंख्यक
    2. भाषायी अल्पसंख्यक
    3. जनजातीय अल्पसंख्यक

    1. धार्मिक अल्पसंख्यक - भारत में हिन्दुओं के अतिरिक्त अन्य सभी धार्मिक समूहों को धार्मिक अल्पसंख्यक कहा जा सकता है।

    2. भाषायी अल्पसंख्यक - धार्मिक अल्पसंख्यकों के अतिरिक्त भाषा के आधार पर जिनकी संख्या आधी से कम है वे सब भाषायी अल्पसंख्यक में गिने जाते हैं।

    3. जनजातीय अल्पसंख्यक - सामाजिक आर्थिक व शैक्षणिक दृष्टि से पिछड़े हुए जनजातीय अल्पसंख्यक कहलाते हैं। इनका प्रमुख उददेश्य व संविधान से ऐसी सुविधाएँ प्राप्त करना होता है, जिनके माध्यम से वह अपने धर्म व भाषा को सुरक्षित तथा विकसित कर सकें।

    अल्पसंख्यकों की समस्याएं

    1. भाषा की समस्या
    2. साम्प्रदायिक तनाव की समस्या
    3. आर्थिक समस्याएं
    4. शैक्षिक समस्याएं
    5. असुरक्षा की भावना
    6.निष्ठा के प्रति सन्देह की समस्या
    7. बहुसंख्यकों की अधीनता की समस्या
    8. साम्प्रदायिक पृथकता की समस्या

    1. भाषा की समस्या - भारत की जनसंख्या में मुस्लिम जनसंख्या का कुल प्रतिशत यद्यपि 13.4% है फिर भी केवल 5.13% जनसंख्या ही उर्दू भाषा को अपनी मातृभाषा मानती है। इसका कारण यह है कि अधिकांश मुसलमान तमिल, तेलुगू, कन्नड, बंगाली, मलयालम, कश्मीरी आदि भाषाओं से सम्बन्धित है जिन राज्यों में मुस्लिम आबादी अधिक है वहाँ समय-समय पर उर्दू को दूसरी राजभाषा का दर्जा देने की माँग की जाती रही है। यद्यपि अभी तक केवल उत्तर प्रदेश में ही यह माँग स्वीकार की गई है। उर्दू को प्रोत्साहन देने के लिये मुस्लिम मदरसे स्थापित किये गये हैं लेकिन इनमें दी जाने वाली शिक्षा को सन्देह की दृष्टि से देखने के कारण एक नया विवाद पैदा हो गया। कुछ लोगों का आरोप है कि इन मदरसों में आतंकवाद से सम्बन्धित शिक्षा दी जाती है, के कारण तनाव की स्थिति उत्पन्न हो जाती है।

    2. साम्प्रदायिक तनाव की समस्या - हमारे देश में स्वतन्त्रता से पहले और स्वतन्त्रता के बाद भी उन क्षेत्रों में सबसे अधिक साम्प्रदायिक दंगे हुए जहाँ मुस्लिम जनसंख्या का प्रतिशत अधिक है। इस समस्या का सम्बन्ध अपनी शक्ति का प्रदर्शन तथा यह दिखाना होता है कि उनकी संस्कृति बहुसंख्यकों से अधिक श्रेष्ठ है। यह समस्या अपनी एक अलग पहचान बनाये रखने के उन्माद और असुरक्षा की ग्रन्थि सम्बन्धित है। इन सबके मूल में कट्टरपंथी है।

    3. आर्थिक समस्याएं - किसी न किसी रूप में यह समस्या शैक्षिक पिछड़ेपन से ही सम्बन्धित है। सरकारी सेवाओं में मुस्लिमों को पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं है। उद्योग एवं व्यापार जैसे निजी उपक्रमों में भी उनकी पर्याप्त सहभागिता नहीं है।

    4. शैक्षिक समस्याएं - मुसलमानों में प्रमुख समस्या अशिक्षा की है। अन्य दूसरे धार्मिक समुदायों की तुलना में मुसलमानों में शिक्षा का प्रतिशत बहुत कम है।

    5. असुरक्षा की भावना - मुस्लिम अल्पसंख्यकों की सबसे बड़ी समस्या असुरक्षा की भावना है। वे अनेक क्षेत्रों में अपने को बहुसंख्यक हिन्दुओं से असुरक्षित महसूस करते हैं।

    6.निष्ठा के प्रति सन्देह की समस्या - मुस्लिम अल्पसंख्यकों की एक प्रमुख समस्या निष्ठा के प्रति सन्देह की है। इसका कारण अनेक आतंकवादी संगठनों का मुस्लिम होना है।

    7. बहुसंख्यकों की अधीनता की समस्या - अल्पसंख्यक समुदाय प्रायः बहुसंख्यकों के अधीन होता है। इस वर्ग को प्रायः बहसंख्यकों से हीन समझा जाता है। बहुसंख्यक समुदाय प्रायः अल्पसंख्यकों को अपनी संस्कृति एवं इच्छाओं के अनुसार बनने की कोशिश करता है।

    8. साम्प्रदायिक पृथकता की समस्या - अन्य सम्प्रदायों से पथक होना भी अल्पसंख्यकों की एक प्रमुख समस्या है।

    एक अल्पसंख्यक समूह के रूप में मुसलमानों की तरह ईसाईयों ने विभिन्न सेवाओं में आरक्षण की माँग की। यद्यपि अधिकांश ईसाई शिक्षित एवं मध्यमवर्गीय है यद्यपि उन्होंने अपने राजनैतिक एवं आर्थिक संरक्षण की माँग की। लोकतान्त्रिक ढाँचे में इनकी संख्या कम होने के कारण राजनैतिक दलों द्वारा ईसाई समुदाय की ओर ध्यान नहीं दिया गया फिर भी इनकी मांगों को देखते हए लोकसभा में 2 सीटों पर राष्ट्रपति द्वारा एंग्लो इण्डियन समुदाय के लोगों को मनोनीत करने का अधिकार दिया गया है!

    लगभग 25 वर्ष पूर्व सिक्खों में एक ऐसा वर्ग बनने लगा जो हिन्दुओं से अपने को बिल्कुल पृथक एवं भिन्न मानते हुए अपने लिए एक पृथक खालिस्तान राज्य की मांग कर रहा है।


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