Wednesday, 16 February 2022

व्यवहारवादी दृष्टिकोण से आपका क्या अभिप्राय है? तुलनात्मक राजनीति में व्यवहारवाद की क्या उपयोगिता है ?

व्यवहारवादी दृष्टिकोण से आपका क्या अभिप्राय है? तुलनात्मक राजनीति में व्यवहारवाद की क्या उपयोगिता है ?

व्यवहारवाद दृष्टिकोण का अर्थ

व्यवहारवाद राजनीति विज्ञान में राजनैतिक तथ्यों के अध्ययन तथा विश्लेषण की आधुनिक पद्धति या दृष्टिकोण है। व्यवहारवादी उपागम को समकालीन अथवा आधुनिक उपागम भी कहा जाता है। राजनीति विज्ञान में इसके अभ्युदय का श्रेय अमेरिकी विद्वानों को है, जिन्होंने इसे द्वितीय विश्व युद्ध के बाद विकसित किया था। 20वीं शताब्दी के मध्यकाल में विशेष रूप से द्वितीय विश्व युद्ध के उपरान्त परम्परागत राजनीतिक सिद्धान्त के प्रति आक्रोश उत्पन्न हुआ, जिसके परिणामस्वरूप नवीन विचारधारा की आवश्यकता महसूस हुई। इसका प्रारम्भ संयुक्त राज्य अमेरिका में चार्ल्स मेरियम, आर्थर बेन्टले, हेरोल्ड, लासवैल जैसे विद्वानों ने किया। इस नवीन विचारधारा को अनेक नामों, जैसे-समकालीन, राजनीतिक सिद्धान्त, व्यवहार, अनुभववाद, मूल्यविहिन, वैज्ञानिक अध्ययन अथवा आधुनिक राजनीति विज्ञान से पुकारा जाता है।

व्यवहारवादी दृष्टिकोण की विशेषताएँ

डेविड ईस्टन ने अपने लेख में व्यवहारवाद की निम्नलिखित विशेषताओं अथवा आधारशिलाओं का वर्णन किया है

(1) नियमितताएँ - मानव के राजनीतिक व्यवहार के अध्ययन में हमें नियमितताएँ तथा अनियमितताएँ दोनों ही देखने को मिलती हैं। एक ही समस्या के प्रति समाज के व्यक्तियों के दृष्टिकोण यद्यपि भिन्न-भिन्न होते हैं, परन्तु इन विचारों में कुछ ऐसे समान बिन्दु मिल जाते हैं। जिनको एकत्रित करके शोधकर्ता नए सिद्धान्तों का निर्माण कर सकता है। इन समानताओं को समान्यीकरण व सिद्धान्तों के माध्यम से प्रकट किया जा सकता है।

(2) सत्यापन - राजनीतिक व्यवहार के सामान्य परिणामों तथा सिद्धान्तों का सत्यापन सम्भव होता है। सत्यापन के उपरान्त संगृहीत तथ्यों से प्रकट किया जा सकता है।

(3) शुद्ध तकनीक - व्यवहार के अध्ययन में एकत्र सामग्री को पर्यवेक्षण, परीक्षण और शद्ध तकनीक से समझा जाता है।

(4) परिमाणीकरण - सामग्री का प्रयोजन के प्रकाश में मापन तथा परिमाणीकरण किया जा सकता

(5) मूल्य निरपेक्षता - व्यवहारवाद में निजी मूल्यों को पृथक् तथा स्पष्ट रखा जाता है तथा अध्ययनकर्ता को तथ्यों का संग्रह करने में इस बात का विशेष ध्यान रखना चाहिए कि उसके मूल्यों तथा मान्यताओं का प्रभाव उत्तरदाता पर नहीं पड़े। 

(6) क्रमबद्धीकरण - इसमें अध्ययन क्रमबद्ध होता है।

व्यवहारवाद की तुलनात्मक राजनीति में उपयोगिता

व्यवहारवादी उपागम एक वैज्ञानिक पद्धति तथा दृष्टिकोण है। साथ ही एक नया दृष्टिकोण, नई भाषा, नई पद्धति, नई दिशा व नया लक्ष्य है, जो राजनीति विज्ञान को विशुद्ध विज्ञान बनाना चाहता है। व्यवहारवाद में राजनीति विज्ञान को विश्लेषण की नई पद्धति दी है तथा समस्त सामाजिक विज्ञानों को एक प्रांगण में ला दिया है। व्यवहारवादियों ने राजनीतिक विश्व के विषय में व्यवस्थित एवं क्रमबद्ध ज्ञान के भण्डार में व्यापक प्रगति की है। निकट भविष्य में यदि यह प्रगति चलती रही तो अवश्य ही व्यवहारवाद"मनुष्य के विज्ञान"को जन्म देगा। संक्षेप में,व्यवहारवाद की उपयोगिता को निम्न प्रकार से स्पष्ट किया जा सकता

  1. इसने राजनीति विज्ञान के क्षेत्र का विस्तार किया। 
  2. इसने वैज्ञानिक अथवा अनुभाविक पद्धति पर बल दिया। 
  3. इसने सिद्धान्त निर्माण पर बल दिया। 
  4. इसने अन्तर-शास्त्रीय उपागम तथा तुलनात्मक अध्ययन पर बल दिया है।
  5. इन अध्ययन पद्धति ने संस्थाओं के स्थान पर संस्थाओं में भाग लेने वाले मानवों की गतिविधियों को अध्ययन का केन्द्र बिन्दु बनाया है तथा दार्शनिक अध्ययन पद्धति के स्थान पर विश्लेषण अध्ययन पद्धति को अपनाने पर बल दिया है।
  6. यह राजनीतिक विज्ञान के कार्य-क्षेत्र को विस्तृत एवं व्यापक बनाने का प्रयास करता है। व्यवहारवाद की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए डाहल का कथन है-"व्यवहारवाद राजनीतिक अध्ययनों को आधुनिक मनोविज्ञान, समाजशास्त्र, मानवशास्त्र और अर्थशास्त्र के सिद्धान्तों, उपलब्धियों और दृष्टिकोणों के निकट सम्पर्क में लाने में सफल हुआ है।"


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