Tuesday, 4 January 2022

भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया बताइये तथा राष्ट्रपति के पद रिक्तता की स्थिति में उसके कार्यों को कैसे सम्पादित किया जाता है?

भारत के राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया बताइये  तथा राष्ट्रपति के पद रिक्तता की स्थिति में उसके कार्यों को कैसे सम्पादित किया जाता है?

सम्बन्धित लघु उत्तरीय प्रश्न

  1. भारतीय राष्ट्रपति की निर्वाचन प्रक्रिया को समझाइये।
  2. राष्ट्रपति को पदच्युत करने अथवा महाभियोग की प्रक्रिया पर प्रकाश डालिए।
  3. राष्ट्रपति के पद रिक्तता की स्थिति में उसके कार्यों का संचालन कैसे किया जाता है ?

राष्ट्रपति का निर्वाचन

भारत के राष्ट्रपति का निर्वाचन अनुच्छेद 55 के अनुसार एकल संक्रमणीय समानुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणाली द्वारा होता है। राष्ट्रपति का चयन एक निर्वाचक मंडल द्वारा किया जाता है, जिसमें संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्य एवं राज्यों की विधान सभाओं एवं साथ ही राष्ट्रीय राजधानी, दिल्ली क्षेत्र तथा संघ शासित क्षेत्र, पुदुचेरी के निर्वाचित सदस्य सम्मिलित होते हैं। राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों - लोकसभा, राज्यसभा तथा राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों - विधानसभा, विधान परिषद में से किसी का भी सदस्य नहीं होना चाहिए। यदि निर्वाचन के पूर्व वह किसी भी सदन का सदस्य है तो, निर्वाचन की तिथि से उसकी सदस्यता समाप्त मानी जायेगी।

राष्ट्रपति को पदच्युत करने की प्रक्रिया (अथवा) राष्ट्रपति पर महाभियोग की प्रक्रिया

  1. जब संविधान के अतिक्रमण के लिए राष्ट्रपति पर महाभियोग चलाना हो, तब संसद का कोई सदन आरोप लगाएगा।
  2. ऐसा कोई आरोप तब तक नहीं लगाया जाएगा जब तक कि—
    1. ऐसा आरोप लगाने की प्रस्थापना किसी ऐसे संकल्प में अंतर्विष्ट नहीं है, जो कम से कम चौदह दिन की ऐसी लिखित सूचना के दिए जाने के पश्चात् प्रस्तावित किया गया है जिस पर उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम एक—चौथाई सदस्यों ने हस्ताक्षर करके उस संकल्प को प्रस्तावित करने का अपना आशय प्रकट किया है; और
    2. उस सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो—तिहाई बहुमत द्वारा ऐसा संकल्प पारित नहीं किया गया है।
    3. जब आरोप संसद के किसी सदन द्वारा इस प्रकार लगाया गया है तब दूसरा सदन उस आरोप की जांच करेगा या कराएगा और ऐसी जांच में उपस्थित होने का तथा अपना प्रतिनिधित्व कराने का राष्ट्रपति को अधिकार होगा।
    4. यदि जांच के परिणामस्वरूप यह घोषित करने वाला संकल्प कि राष्ट्रपति के विरुद्ध लगाया गया आरोप सिद्ध हो गया है, आरोप की जांच करने या कराने वाले सदन की कुल सदस्य संख्या के कम से कम दो—तिहाई बहुमत द्वारा पारित कर दिया जाता है तो ऐसे संकल्प का प्रभाव उसके इस प्रकार पारित किए जाने की तारीख से राष्ट्रपति को उसके पद से हटाना होगा।

राष्टपति के पद रिक्तता की स्थिति में उसके कार्यों का संचालन

संविधान के अंतर्गत यद व्यवस्था की गई है कि राष्ट्रपति अपने पद पर निश्चित अवधि की समाप्ति के उपरान्त भी उस समय तक पदासीन रहता है जब तक कि उसका उत्तराधिकारी राष्ट्रपति पद ग्रहण नहीं कर लेता। राष्टपति की त्यागपत्र देने पर महाभियोग की स्वीकृति के कारण राष्ट्रपति का पद रिक्त होने पर यथासम्भव 6 मार अन्दर नये राष्ट्रपति का निर्वाचन हो जाना चाहिए। जब तक नये राष्ट्रपति का निर्वाचन नहीं हो तक भारत का उपराष्ट्रपति उसके पद पर कार्यवाहक राष्ट्रपति के रूप में कार्य करेगा, संविधान के अनुच्छेद (70) में कहा गया है कि यदि कभी ऐसी स्थिति उत्पन्न हो जाये जब भारत'का, उपराष्ट्रपति अपने कार्यों को संपन्न करने में असमर्थ हो तो भारतीय संसद को उनके कार्यों के व्यवस्था करनी होगी। सन् 1969 में ऐसी ही स्थिति उत्पन्न हो गई थी, जबकि तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. जाकिर हुसैन का निधन हो गया तथा उप राष्ट्रपति वी. वी. गिरि राष्ट्रपति पद का चुनाव लडने हेतु उपराष्ट्रपति पद से त्याग पत्र दे देना चाहते थे। ऐसी स्थिति में संसद के द्वारा अत्यधिक शीघ्रतापूर्वक 1969 में ही अनुच्छेद (70) के अंतर्गत 'प्रेसीडेन्टस डिस्चार्ज आफ फंक्शन बिल' (President Discharge of Functions Bill) घोषित किया गया। इस अधिनियम के अंतर्गत यह व्यवस्था की गई कि राष्ट्रपति तथा उपराष्ट्रपति दोनों ही पद रिक्त होने की स्थिति में सर्वोच्च न्यायालय का मुख्य न्यायाधीश पर उसकी अनुपस्थिति में सर्वोच्च न्यायालय का उपलब्ध वरिष्ठतम् न्यायाधीश राष्ट्रपति के कर्त्तव्यों को सम्पादित करेगा।


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