Saturday, 28 September 2019

सूरज का सातवाँ घोड़ा के पात्रों का चरित्र चित्रण

सूरज का सातवाँ घोड़ा के पात्रों का चरित्र चित्रण

'सूरज का सातवाँ घोड़ा' के सभी पात्र वर्गगत चरित्र हैं। इन पात्रों के माध्यम से लेखक ने मध्यमवर्गीय समाज की स्थितियों और समस्याओं को उभारा है। चरित्र-चित्रण के लिए लेखक ने प्रत्यक्ष और परोक्ष दोनों ही शैलियों का प्रयोग किया है। उपन्यास के आरंभ ‘उपोदाघात' में ही माणिक मुल्ला का परिचय दिया गया है। अन्य पात्रों का परिचय, उनका, देह-गठन, वस्त्राभूषण, पारिवारिक वातावरण, शिक्षा-दीक्षा-सभी का स्पष्ट वर्णन है। परंतु उनकी मानसिकता, उनकी सोच, उनकी आकांक्षाएँ और विवशताएँ उनकी गतिविधियों, क्रिया-कलापों, संवादों और कहानियों में घटित घटनाओं से स्पष्ट हुई हैं। Read also : Suraj ka Satvan Ghoda Summary in Hindi

    माणिक मुल्ला का चरित्र चित्रण 

    माणिक मुल्ला सूरज का सातवाँ घोड़ा का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण पात्र हैं। उपन्यास में उनकी भूमिका दो प्रकार की है-एक तो उनकी स्थिति नैरेटर' अथवा कथावाचक की है। सभी कहानियाँ ‘माणिक मुल्ला की जुबानी' हैं। दूसरी, सभी कहानियों में उनकी स्थिति किसी न किसी रूप में रही हैं। परंतु चाहे वे कथावाचक के रूप में हों या किसी पात्र के रूप में, उनकी छवि सुशिक्षित-समझदार व्यक्ति के रूप में उभरी है। विभिन्न पात्रों की कहानी सुनाते समय उनकी दृष्टि मात्र घटनाओं पर ही नहीं रहती, बल्कि उससे जुड़ी समूची स्थितियों और भावभंगिमाओं पर रहती है। घटनाओं के अंत में दिये गये उनके निष्कर्ष अति सरलीकृत और अपरिपक्व से लग सकते हैं परंतु जैसा कि लेखक ने 'निवेदन' में स्पष्ट कर दिया है - उनके माध्यम से अबुद्धिजीवियों और सिद्धांतवादियों पर व्यंग्य किया गया है। जमुना के बेमेल विवाह का मूक दर्शक बना रहना, लिली से प्रेम करते हुए और यह जानते हुए भी कि लिली भी उससे प्रेम करती है आदर्श बखानकर उसके जीवन से हट जाना, सत्ती के स्वाभिमान और सौंदर्य के प्रति आकृष्ट होते हुए भी, उससे सहानुभूति रखते हुए भी उसका साथ न देना और उसकी मृत्यु का समाचार सुन कर अपराध बोध का नाटक करना-ये सारे प्रसंग माणिक मुल्लाओं का प्रकाशन करते हैं। परंतु इसके माध्यम से मध्यवर्गीय व्यक्तियों के चरित्र का दोगलापन-बड़ी-बड़ी बातें करना पर उन्हें कार्यान्वित करने के नाम पर पीछे हट जाना-दर्शाना ही लेखक का लक्ष्य रहा है।

    तन्ना का चरित्र चित्रण

    प्रस्तुत उपन्यास में तन्ना का चरित्र भी अत्यंत महत्त्वपूर्ण है। महेसर दलाल का बेटा तन्ना बचपन में ही माँ को खो बैठा है। माता के स्नेह के अभाव और पिता के उग्र एवं चिड़चिड़े स्वभाव ने तन्ना को संकोची, भीरू और अंतर्मुखी बना दिया है। वह न तो किसी से खुल कर बात करता दिखाई देता है न ही अपना पक्ष रखता है। वह कभी घर की गुलाई-सफाई में लगा दिखाई देता है कभी भोजन बनाने के लिए लकड़ी चीरने में, कभी सड़क पर लगे सरकारी लैंप की रोशनी में पढ़ते हुए। जमुना से प्रेम करता है परंतु उसे पाने का कोई प्रयास नहीं करता। पिता की गालियाँ और झिड़कियाँ खाता है परंतु उनके गलत कामों का कभी कोई विरोध नहीं करता। लिली से विवाह होता है, परंतु उस संबंध को बनाये रखने का भी कोई अतिरिक्त प्रयास नहीं दिखाई देता। 'बुआ' के अन्यायों और बहन के तानों को चुपचाप सुनता जाता है। कोल्हू के बैल की भाँति पारिवारिक दायित्वों को निबाहते जाना ही मानों उसकी नियति बन चुकी है। बहिर्मुखी माणिक मुल्ला मध्यवर्गीय व्यक्तित्व का एक प्रकार है और अंतर्मुखी-संकोची तन्ना दूसरा।

    महेसर दलाल का चरित्र चित्रण

    तन्ना के पिता महेसर दलाल का चरित्र एक उग्र, क्रोधी, लालची और विलासी व्यक्ति के रूप में सामने आता है बात-बात पर नाराज होना, गालियाँ देना, जवान लड़के को मारना-पीटना उनकी दिनचर्चा का अंग है। विवह-योग्य जवान बच्चों के पिता होते हुए भी एक स्त्री को घर में रखते हैं। झूठ बोलकर तन्ना का विवाह लिली से कराते हैं क्योंकि उसकी माँ विशाल धन-संपत्ति की स्वामिनी है, और अपनी बहू की माँ के साथ रंगरेलियाँ मनाने में उन्हें कोई कोच नहीं होता। दलाली का काम करते हैं सो उस व्यवसाय की प्रवृतियाँ भी उनके व्यक्तिव का अंग बन गयी हैं। इसीलिए बेटी की उम्र की सत्ती को चमन ठाकुर को लालच देकर कुछ रुपयों के बदले खरीद लेते हैं।

    जमुना और लिली का चरित्र चित्रण

    जमुना और लिली दोनों इस उपन्यास की नायिकाएँ हैं। जमुना की शिक्षा कुछ समय बाद छूट गयी परंतु लिली को उच्च शिक्षा प्राप्त करने का अवसर मिला। जमुना तन्ना से प्रेम करती है परंतु उसे वृद्ध जमींदार से विवाह करने को विवश होना पड़ता है। लिली माणिक से प्रेम करती है पर उसे तन्ना से विवाह करना पड़ता है। इन दोनों की ही नियति एक जैसी है। दोनों को ही अपना प्राप्य नहीं मिलता। दोनों का ही वैवाहिक जीवन दुःखपूर्ण रहा है। जमुना को वैधव्य झेलना पड़ता है और लिली को तन्ना का घर छोड़ना पड़ता है। ये दोनों चरित्र समानांतर रेखाओं की तरह हैं जो पृथक्-पृथक् होने पर भी एक जैसी नियति की ओर आगे बढ़ रहे हैं।

    सत्ती का चरित्र चित्रण

    प्रस्तुत उपन्यास में सत्ती का चरित्र बहुत सशक्त है। वह बहुत सुंदर है परंतु बहुत स्वाभिमानिनी भी। मुँहबोले चाचा चमन ठाकुर का पालन करती है। साबुन बनाती है, साबुन बेचती है परंतु न तो किसी की कोई गलत बात उसे बर्दाश्त है न हिसाव में कोई गड़बड़ी। उसकी कर्मठता और ईमानदारी ने उसके व्यक्तित्व को सहज-सौंदर्य प्रदान किया है। जमुना और लिली की भाँति वह छुई-मुई नहीं। कमर में सदा एक चाकू बँधा रहता है। उसके सौंदर्य के प्रति सब आकृष्ट होते हैं किन्तु उसकी खुद्दारी से डरते भी हैं परंतु हमारी सामाजिक व्यवस्था में सत्ती जैसी कर्मठ, ईमानदार, स्वाभिमानी स्त्री को भी चमन ठाकुर की लालची और महेसर दलाल की विलासी प्रवृतियों का शिकार होना पड़ता है।

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