रामा का चरित्र चित्रण: महादेवी वर्मा की 'अतीत के चलचित्र' में रामा एक अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक पात्र है। वह समाज के उपेक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व
अतीत के चलचित्र रामा का चरित्र चित्रण (Rama ka Charitra Chitran)
रामा का चरित्र चित्रण: महादेवी वर्मा की रचना 'अतीत के चलचित्र' में रामा एक अत्यंत मार्मिक और प्रेरणादायक पात्र है। वह समाज के उपेक्षित वर्ग का प्रतिनिधित्व करता है। विमाता के अत्याचार से त्रस्त होकर बुंदेलखंड से भागकर इंदौर आने वाला रामा, बचपन में ही लेखिका की माँ के घर आश्रय पाता है। भले ही उसका अतीत अज्ञात हो, लेकिन उसकी सहृदयता ही लेखिका की माँ को उसे अपने पास रखने के लिए प्रेरित करती है। रामा के चरित्र की विशेषताएँ निम्नलिखित हैं:-
शारीरिक गठन: रामा का शारीरिक रूप आकर्षक नहीं था। वह नाटा, काला और मोटा था। उसकी नाक अनगढ़ और ओंठ फूले हुए थे। लेखिका ने रामा के चेहरे को इस प्रकार चित्रित किया है कि पाठक को उसकी कल्पना आसानी से हो जाती है। हालाँकि रामा की शारीरिक बनावट आदर्श नहीं थी, लेकिन उसकी आँखें स्नेह से परिपूर्ण थीं, जो उसकी सादगी और भावुकता का प्रतीक थीं। उसका हंसने का अंदाज भी कुछ खास था - मुक्त हँसी से भरकर फूले हुए से ओंठ। उसके दांत ऐसे थे मानो काली प्याली में दही रखा हो।
कर्तव्यपरायण: व्यवहार में रामा सहृदय, दयालु, करुणामय और स्नेहशील था। वह लेखिका और उसके भाई-बहनों की देखभाल अत्यंत तत्परता से करता था। सुबह जल्दी उठकर पूजा-पाठ करता, उन्हें जगाता, नहलाता, खिलाता और खेलता। बीमारी के समय रामा सेवा भावना से भर जाता था। लेखिका यह भी बताती हैं कि रामा उनके भाई-बहनों का इतना ख्याल रखता था कि चेचक के दौरान उन्हें अपने भाई का स्मरण तक नहीं आता था।
अनपढ़: रामा अनपढ़ था, लेकिन उसमें आत्म-संयम और आत्म-शुद्धि की भावना कूट-कूट कर भरी थी। वह निष्काम कर्म में विश्वास रखता था और अपना जीवन दूसरों की सेवा में समर्पित कर देता था। शिक्षा प्राप्त न होने के बावजूद रामा के नैतिक मूल्य बहुत ऊँचे थे।
मानवीय गुणों से परिपूर्ण: रामा सच्ची मानवता का प्रतीक है। वह बाहरी रूप के बजाय आंतरिक गुणों को महत्व देता था। धन-दौलत और जाति-पात उसके लिए कोई मायने नहीं रखते थे। लेखिका इस बात पर बल देती हैं कि रामा जैसे लोग ही असली मायने में समाज के आधार होते हैं। उन्होंने रामा से स्नेह, दया, करुणा और सेवा के गुण सीखे। रामा ने उन्हें सिखाया कि सच्ची सुंदरता बाहरी नहीं, बल्कि आंतरिक होती है।
ममता और समर्पण की मूर्ति: लेखिका रामा की अंतः प्रकृति जैसे ममता, दया, करुणा एवं स्नेहहिल भावों से ओत-प्रोत है। रामा ने लेखिका और उसके भाई-बहनों की परवरिश और देखभाल अत्यंत ममता एवं समर्पण के साथ की। लेखिका का मानना है कि आज वे जिस ऊँचाई तक पहुँची है, उसका कुछ श्रेय रामा को भी जाता है।
निष्कर्ष: रामा का चरित्र प्रेरणादायक है। यह हमें सिखाता है कि हमें बाहरी रूप से किसी का मूल्यांकन नहीं करना चाहिए। रामा जैसे लोग, जो सामाजिक रूप से उपेक्षित हैं, उनके पास अक्सर असाधारण मानवीय गुण होते हैं। रामा समाज को आईना दिखाता है कि असली मूल्य बाहरी आडंबरों में नहीं, बल्कि आंतरिक सद्गुणों में निहित होते हैं।
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