Thursday, 25 April 2019

लुई पाश्चर की जीवनी। Louis Pasteur Biography In Hindi

लुई पाश्चर की जीवनी। Louis Pasteur Biography In Hindi

नाम : लुई पाश्चर
जन्‍म : 27 दिसंबर, 1822
मृत्‍यु : 28 सितंबर, 1895
खोज : रैबीज, एन्‍थ्रैक्‍स चेचक का उपचार खोजा

लुईस पॉश्‍चर संसारके सबसे महान वैज्ञानिकों में से एक थे। उन्‍होंने कई बीमारियों, जैसे रैबीज, हाइड्रोफोबिया और चेचक का उपचार खोजा। उन्होंने दूध को पास्चुरीज़ करने और दुग्‍ध उत्‍पादों को रोगाणुओं से मुक्‍त रखने की पद्धति खोजी।

Louis Pasteur Biography In Hindi
प्रारम्भिक जीवन : लुईस पॉश्‍चर का जन्‍म 1822 में फ्रांस में हुआ। 16 साल की उम्र में उन्‍होंने निर्णय लिया कि कोई महान कार्य उनकी प्रतीक्षा कर रहा है। स्‍कूली पढ़ाई खत्‍म करने के बाद उन्‍होंने कॉलेज ऑफ बेसैनकॉन में दाखिला ले लिया और वहां से बैचलर ऑफ सांइस की डिग्री प्राप्‍त की।

लुईस पॉश्‍चर ने आगे रसायनशास्‍त्र की पढ़ाई की और फिर स्‍ट्राबर्ग में रसायन-शास्‍त्र पढ़ाने लगे। वहां उन्‍होंने रैसेमिक एसिड की प्रकाश संबंधी विशेषताएं पता लगाने के लिए अध्‍ययन और प्रयोग किए। इसी दौरान उनकी रसायनशास्‍त्र के प्रख्‍यात प्रोफेसर जे.बी. बायट से मित्रता हो गई। इसने उन्‍हें फ्रांस का महान वैज्ञानिक बना दिया।

उनकी सबसे महत्वपूर्ण खोजें रोगाणु अध्ययन के क्षेत्र में थीं। उन्होंने दिखाया कि कीटाणुओं को विकसित होने के लिए कुछ सूक्ष्म जीवों की आवश्यकता होती है; इस ज्ञान का उपयोग करते हुए, उन्होंने पाया कि खमीर के किण्वन में देरी हो सकती है। लुई पाश्चर ने दूध जैसे तरल पदार्थ में बैक्टीरिया को मारने के व्यावहारिक तरीकों की ओर रुख किया। पॉश्‍चराईजेशन की उनकी प्रक्रिया ने दूध के प्रोटीन को नष्ट किए बिना दूध में बैक्टीरिया को सफलतापूर्वक मार दिया। यह एक मौलिक खोज थी जिसने दूध पीने को सुरक्षित बनाया। 

"एक व्यक्ति जो कड़ी मेहनत करने की आदत डाल लेता है, वह इसके बिना कभी नहीं रह सकता है। कड़ी मेहनत इस दुनिया में सफलता की नींव है। ”- लुईस पॉश्‍चर 

एन्‍थ्रैक्‍स के टीके की खोज : उन्‍होंने एन्‍थ्रैक्‍स के कारण पता किए और टीके की प्रक्रिया खोज निकाली। 1880 में, जीन-जोसेफ-हेनरी टूसेंट, एक पशु चिकित्सा सर्जन ने एंथ्रेक्स बैक्टीरिया को मारने के लिए कार्बोलिक एसिड का उपयोग किया था। पाश्चर ने इसी तरह की पद्धति का इस्तेमाल किया, उनकी अधिक प्रसिद्धि के कारण उन्हें खोज का श्रेय दिया गया।

रेबीज के टीके की खोज : एंथ्रेक्स के टीके की सफलता ने पाश्चर को रेबीज के लिए एक इलाज विकसित करने के लिए प्रोत्साहित किया - यह उस समय एक बहुत ही सामान्य बीमारी थी। इसी तरह के सिद्धांतों का उपयोग करते हुए, उन्होंने बीमारी का इलाज विकसित किया। रेबीज से प्रभावित जानवरों पर परीक्षण सफल रहा; हालाँकि, वह मनुष्यों पर परीक्षण करने के लिए अनिच्छुक थे क्योंकि उन्हें डर था कि शायद यह काम न करे। एक बार उन्होंने खुद पर परीक्षण करने की सोची। हालाँकि, इससे पहले कि वह अपनी योजना को लागू कर पाते, एक युवा लड़के को उसके पास लाया गया। जिसे एक पागल कुत्ते द्वारा 14 बार काट लिया गया था। उनके माता-पिता उनकी नई तकनीक को आजमाने के लिए तैयार हो गए। उनका उपचार सफल रहा और उपचार की खबर जल्द ही फैल गई। 350 से अधिक लोग लुई पाश्चर के पास इलाज के लिए आए। लुई और उनके वैज्ञानिकों की टीम ने रेबीज से पीड़ित लोगों को बचाने के लिए कड़ी मेहनत की और सफल रहे। इन्ही सब खोजों ने आगे चलकर पॉश्‍चर इंस्‍टीट्यूट की आधारशिला रखने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभायी। 

लुइस की मृत्यु 1895 में 73 वर्ष की आयु में हुई। उन सब सम्‍मानों के बावजूद, जो पॉश्‍चर को मिले, वह हृदय से बहुत सादे बने रहे। उन्‍होंने अपने ही तरीके से मानवता की पीड़ाओं को कम करने के प्रयासों में अपना जीवन जिया। अपने अंतिम दिन उन्होंने कहा:

"मुझे युवा होना पसंद है ताकि मैं खुद को नई बीमारियों के अध्ययन के लिए समर्पित कर सकूं।"

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