Saturday, 19 January 2019

केदारनाथ अग्रवाल का जीवन परिचय तथा रचनाएँ

केदारनाथ अग्रवाल का जीवन परिचय तथा रचनाएँ

केदारनाथ अग्रवाल हिंदी काव्य की प्रगतिवादी काव्यधारा के अनन्य कवि हैं। इन्होंने अपनी साहित्यिक कृतियों से हिंदी साहित्य में अप्रतिम योगदान दिया। काव्य रचनाओं में ही नहींबल्कि गद्य साहित्य में भी इन्होंने साहित्य सृजन किया। अत: साहित्य के प्रति उनकी अनुपम उपलब्धियों को ध्यान में रखते हुए उन्हें समय-समय पर विभिन्न हिंदी संस्थानों द्वारा पुरस्कृत किया गया।
kedarnath agrawal
जीवन परिचय : केदारनाथ अग्रवाल जी का जन्म 1 अप्रैल 1911 ई़ को उत्तर प्रदेश के बाँदा जनपद के कमासिन गाँव में हुआ था। केदारनाथ जी की माता का नाम घसिट्टो तथा पिता का नाम हनुमान प्रसाद था। इनकी आरंभिक शिक्षा कमासिन गाँव में हुई। कक्षा तीन तक पढ़ने के बाद रायबरेली से कक्षा छ: उत्तीर्ण की। कक्षा सात व आठ कटनी के जबलपुर से उत्तीर्ण की। इसी समय पार्वती नामक कन्या से इनका विवाह हो गया। इसके पश्चात् केदार जी इलाहाबाद गए। इविंग क्रिश्चियन कॉलेज से इंटर पास करने के बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से स्नातक तथा डी़ ए़ वी़ कॉलेज कानपुर से एल़ एल़ बी. की परीक्षा उत्तीर्ण की। 22 जून सन् 2000 को साहित्य के इस महान उपासक का देहांत हो गया।

केदारनाथ अग्रवाल का इलाहाबाद से गहरा रिश्ता था। इलाहाबाद विश्वविद्यालय में अध्ययन के दौरान ही उन्होंने लिखने की शुरूआत की। उनकी लेखनी में प्रयाग की प्रेरणा का बड़ा योगदान रहा है। प्रयाग के साहित्यिक परिवेश से उनके गहरे रिश्ते का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उनकी सभी मुख्य कृतियाँ इलाहाबाद के परिमल प्रकाशन से ही प्रकाशित हुईं। प्रकाशक शिवकुमार सहाय उन्हें पितातुल्य मानते थे और बाबूजी’ कहते थे। लेखक और प्रकाशक में ऐसा गहरा संबंध जल्दी देखने को नहीं मिलता। यही कारण रहा कि केदारनाथ ने दिल्ली के प्रकाशकों का प्रलोभन ठुकराकर परिमल से ही अपनी कृतियाँ प्रकाशित करवाईं। उनका पहला कविता संग्रह फूल नहीं रंग बोलते हैं’ परिमल से ही प्रकाशित हुआ था।

रचनाएँ केदार जी की प्रमुख रचनाएँ इस प्रकार हैं
  1. काव्य-कृतियाँ: अपूर्वाफूल नहीं रंग बोलते हैंलोक और आलोकनींद के बादलपंख और पतवारकहे केदार खरी-खरीयुग की गंगाखुली आँखें खुले डैने आदि
  2. गद्य साहित्य: बस्ती खिले गुलाबों कीयात्रा संस्मरणविवेक-विमोचनसमय समय परदतिया (उपन्यास)विचारबोध आदि


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