Thursday, 21 June 2018

हिंदी कहानी - गिलहरी कि तीन रेखाएं

हिंदी कहानी - गिलहरी कि तीन रेखाएं 

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बात उस समय की है जब लंका में रावण राज करता था। एक दिन उस 10 सिरों वाले रावण ने राम की पत्नी सीता का अपहरण कर लिया। राम ने सीता को छुड़ाने के लिए युद्ध का निर्णय किया। वह अपनी वानर सेना के साथ लंका की ओर बढ़े।

बहुत दूर सफर करने के बाद वह समुद्र तट पर पहुंचे। लंका पहुंचने के लिए उन्हे समुद्र पार करना पड़ा। समुद्र की लहरें तेजी से उमड़ रही थी। लहरों को काबू में लाने के लिए राम ने बाण चलाया। तभी समुद्र का राजा प्रकट हुआ और बोला समुद्र के अंदर अनगिनत जीव-जंतु रहते हैं। सभी प्राणियों की रक्षा करना मेरा कर्तव्य है। प्रकृति का विरोध करके सफलता प्राप्त नहीं होगी। इसलिए मेरा आपसे अनुरोध है कि आप एक मजबूत पुल बनाकर ही समुद्र पार कीजिए।

राम ने सबसे सलाह लेकर अपनी वानर सेना को पुल बांधने की आज्ञा दी। देखते ही देखते हजारों बंदर काम पर जुट गए। बड़े-बड़े पत्थर वहां लाए गए। वे एक पल भी विश्राम किए बिना अपने-अपने काम में लगे रहे। एक गिलहरी अपने मुंह से छोटे-छोटे कंकड़ दबाकर लाने लगी। बड़े-बड़े पत्थरों के साथ जमा करती रही।

वह बड़ी फुर्ती से ऊपर नीचे भाग रही थी। उसे देखकर राम को भी हैरानी हुई। इतनी छोटी गिलहरी यहां क्या कर रही है ? गिलहरी को भी इस तरह आड़े-तिरछे भागते हुए देखकर बंदरों को गुस्सा आ गया। वे चिल्लाने लगे, "अरे तुम ! छुटकू सी ! इस काम के लायक नहीं हो। गिलहरी ने सिर उठाकर कहा मैं पुल बनाने में मदद करना चाहती हूं।

बंदर ठहाका लगा कर हंसने लगे और उसका मजाक उड़ाने लगे। ऐसी बेवकूफ़ों जैसी बातें हमने कभी नहीं सुनी। गिलहरी ने कहा मुझसे बड़े-बड़े पत्थर उठाए नहीं जाते, छोटे-छोटे कंकड़ ही ला सकती हूं। बंदरों ने गिलहरी को बाहर धकेल दिया। फिर भी गिलहरी छोटे-छोटे कंकड़ एक कोने में जमा करती रही। यह एक बंदर बर्दाश्त नहीं कर पाया। उसने गिलहरी को आसमान की ओर उछाल दिया।

गिलहरी ने हवा में ही राम कहकर पुकारा। राम ने गिलहरी को अपने हाथ में थाम लिया। फिर बंदरों को समझाया कि तुम बहुत बलवान हो मगर जो तुम्हारे जैसे शक्तिशाली नहीं है उनका मजाक उड़ाना ठीक नहीं है। हर प्राणी अपनी क्षमता के अनुसार मदद करता है। प्राणी के शरीर की ताकत से ज्यादा उसके प्यार और लगन महत्वपूर्ण है।

हमें सभी की सहायता की जरूरत है। बंदरों ने राम कि इस बात पर जब गौर किया तो उन्हें एहसास हुआ कि बड़े-बड़े पत्थरों के बीच छोटे-छोटे पत्थरों के जुड़े रहने से पुल  मजबूत रहेगा। राम ने प्यार से गिलहरी की पीठ थपथपाई और उसकी पीठ पर तीन रेखाएं बन गई। आज भी यह कहा जाता है कि वही रेखाएं गिलहरी की पीठ पर दिखाई देती हैं। 

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